





भगवान सदाशिव अवर्चनीय हैं, वे अनन्त स्वरूपों में अनन्त क्रियायें इस प्रकार से करते दिखाई देते हैं, जैसे संसार के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ये क्रियायें चल रही हों। भगवान शिव को तंत्रेश्वर, रसेश्वर, महामृत्युंजय, अघोरेश्वर, अर्धनारीश्वर, वीतराग कहा गया है। जीवन के सारे पक्ष शिव चरित में स्पष्ट दिखाई देते हैं। भगवान शंकर की उपासना करने वाला कोई भी साधक अपने जीवन में निराश नहीं हो सकता क्योंकि भगवान शंकर तो औढ़रदानी है। गृहस्थ जीवन के आदर्श स्वरूप भगवान शिव और माता पार्वती ही हैं, इसलिये प्रत्येक गृहस्थ शिव-गौरी को अपना आराध्य मानता है, संसार जगत् में भगवान शिव ही एक ऐसे देव हैं, जो गृहस्थ जीवन की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
गृहस्थ जीवन है तो बाधायें तो आयेंगी ही, और यही एक अवसर होता है, जब साधक महाशिवरात्रि की विशिष्ट साधनायें सम्पन्न कर अपने जीवन को शिव-गौरी परिवारमय निर्मित कर सकता है। इन विशिष्ट साधनाओं को महाशिवरात्रि और सूर्य ग्रहण की चैतन्यता में सम्पन्न कर साधक अपने जीवन के सभी अभावों को दूर सकेंगे। महाशिवरात्रि पर साधना सम्पन्न करने के पश्चात् यदि संभव हो तो सूर्य ग्रहण पर पुनः उसी साधना को सम्पन्न करें, जिससे साधनात्मक चेतना, ऊर्जा को सूर्य की तेजस्वी रश्मियों के साथ आप अपने देह में स्थापित कर सकें। ये साधनायें अत्यन्त प्रभावशाली और शीघ्र फलदायी हैं। यदि किसी कारणवश महाशिवरात्रि पर साधना सम्पन्न ना कर सकें तो सूर्य ग्रहण पर अवश्य सम्पन्न करें।
व्यक्ति के जीवन का आधार उसका परिवार ही होता है और स्वयं भगवान शिव का स्वरूप सद्गृहस्थ ही तो है। परिवार के सभी सदस्य निरोगी रहें परस्पर विचारों की टकराहट न हो, सुखमय जीवन यापन हेतु धन-धान्य से पूर्ण हों, जिससे जीवन की प्राथमिकतायें पूरी हो सके और आने वाले जीवन के लिये भी निश्चिंतता का भाव बना रहे। साधक ऐश्वर्य प्रदायक नव महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें, संक्षिप्त पूजन कर निम्न मंत्र का 4 माला धनदा माला से जप करे। दोनों हाथ जोड करके भगवान शंकर का ध्यान करें।
मंत्र जप के उपरांत यंत्र को किसी नदी अथवा शिवालय में दक्षिणा के साथ विसर्जित कर दें।
जीवन में केवल रोग, पीड़ा की बराबर उपस्थिति ही नहीं, अनेक-अनेक समस्याओं का कारण किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति द्वारा तांत्रिक के माध्यम से सम्पन्न करवाया गया प्रयोग अथवा किसी अतृप्त मलिन आत्मा का प्रकोप भी होता है, जिसके कारण अभाव युक्त नरकीय जीवन में जीने के लिये व्यक्ति विवश हो जाता है, ऐसी दुष्ट शक्तियों का निवारण जीवन की प्रथम आवश्यकता होती है। किसी पात्र में महाकाल चैतन्य पिशाचनी यंत्र सरसों की ढ़ेरी पर स्थापित कर उस पर 108 बार निम्न मंत्र जप करते हुये प्रत्येक मंत्र के साथ एक लौंग यंत्र पर चढ़ाये।
दोनों हाथ जोड़ करके भगवान शिव का ध्यान करें-
यह साधना तीन दिवस सूर्य ग्रहण तक सम्पन्न करें। साधना समाप्ति के बाद अग्नि में सरसों और लौंग को अग्नि आहूति करें और पूरे परिवार की रक्षा और बाधा निवारण हेतु महोदव से प्रार्थना करें। बाद यंत्र को नदी में प्रवाहित कर दें।
सौन्दर्य केवल स्त्री का ही नहीं पुरूष का भी स्वप्न होता है, ऐसा स्वप्न जो आंखो में तैर कर सारे संसार को विषाद मुक्त कर सकता है। किसे आग्रह नहीं होता जीवन में दैहिक सौन्दर्य प्राप्त करने का, फिर वही तो किसी अन्य को भी विषाद मुक्त करने और हृदय का सौन्दर्य बनने का आधार भी होता है। यह शिवरात्रि का पर्व तो वास्तव मे दो सौन्दर्यों के मिलन की ही घटना होती है, किसी बाजोट पर सफेद वस्त्र पर कन्दर्प लावण्य युक्त प्रियाकर्षण यंत्र को अपने समक्ष रख कर 3 माला मंत्र सौन्दर्य शक्ति माला से करें।
दोनों हाथ जोड़ करके भगवान शिव का ध्यान करें-
साधना पश्चात् माला को एक माह तक करें, बाद में किसी नदी में विसर्जित कर दें।
भगवान शिव की एक उपाधि कुबेराधिपति भी है, अतः यह सहज संभव है कि साधक भगवान शिव की साधना कर स्वयं भी कुबेरवत बनने में समर्थ हो सके। इस हेतु लक्ष्मी कुबेर यंत्र को गुरू चित्र के समक्ष स्थापित कर निम्न मंत्र का 11 माला धनदा यक्षिणी से जप करे।
दोनों हाथ जोड़ करके भगवान शिव का ध्यान करें-
मंत्र जप के पश्चात यंत्र को लाल कपड़े में लपेट कर अपने तिजोरी में स्थापित कर दें। साथ ही प्रतिदिन धूप, दीप दिखाते रहें, यह साधना दरिद्र से दरिद्र व्यक्ति को कुबेरवत् बनाने में समर्थ, साधक चाहे तो इस मंत्र का नियमित रूप से 51 या 108 बार जप कर सकता है।
आज भी विवाह योग्य हो जाने पर भी युवा पुत्र-पुत्री का घर में बैठे रहना न केवल उस युवक-युवती वरन पूरे परिवार के लिये क्लेश का कारण होता है। पूरे परिवार पर ही सामाजिक रूप से एक प्रश्न चिन्ह आरोपित हो जाता है। ऐसी अमधुर स्थिति की समाप्ति के लिये या तो स्वयं अथवा उस युवक-युवती के नाम का संकल्प कर उसका कोई भी रक्त सम्बन्धी किसी ताम्रपात्र में मौलिमणि कवच स्थापित कर संक्षिप्त पूजन करें।
दोनों हाथ जोड़ करके भगवान शिव का ध्यान करें-
यह साधना महाशिवरात्रि से सूर्य ग्रहण काल समापन के पूर्व तक 51 माला मंत्र जप गौरी शक्ति माला से मंत्र जप करें।
किसी भी विद्यार्थी का समस्त संसार केवल अपनी शिक्षा और उच्च प्रतिशत के अंक प्राप्त करने के प्रयासों तक में ही सीमित रहता है। आधुनिक युग में 85 या 90 प्रतिशत अंको के आधार पर ही मेरिट निर्माण का कार्य आरम्भ होता है, साथ ही शिक्षा स्तर दिनों-दिन जटिल होता जा रहा है, ऐसे में बालकों को यदि दैवीय शक्ति, ऊर्जा और चेतना मिल जाये तो वे अपने लक्ष्य को श्रेष्ठता से प्राप्त कर सकते हैं, इस दिवस विशेष पर शारदाम्बा ऐं शिवोह्म कवच प्राप्त कर इसका संक्षिप्त पूजन करें साथ ही कवच पर 108 बार मंत्र जप सम्पन्न करे, और उसे गले या भुजा में धारण कर लें। और प्रतिदिन 21 बार निम्न मंत्र का जप करते रहें, जिससे श्रेष्ठ सफलता की स्थितियां निर्मित हो सकें।
दोनों हाथ जोड़ करके भगवान शिव का ध्यान करें-
एक माह पश्चात कवच को किसी नदी में विसर्जित कर दें।
गरू तत्व का समाहितीकरण कितना आवश्यक है, यह तो वह ही समझ सकता है, जो वास्तव में साधक की श्रेणी में आते हैं, अनावश्यक और व्यर्थ के प्रलापों से दूर जहां हर क्षण साधक एक विशिष्ट भावभूमि में लीन रहता है, ऐसी स्थिति प्राप्त कर लेना एक साधक के लिये अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, जो साधक हैं उनके लिये यह साधना अत्यन्त आवश्यक है। इस साधना को सम्पन्न करने के पश्चात शिष्य हर क्षण गुरू में लीन रहते हुये उनके अमूल्य ज्ञान और तपस्यांश चेतना को आत्मसात कर अनेक रहस्यों से साक्षात्कार कर लेता है।
निखिल दिव्य चैतन्य यंत्र को स्थापित कर पंचोपचार पूजन कर गुरू ध्यान करें। गुरू चित्र पर ध्यान एकाग्र करते हुये निम्न मंत्र का 21 माला मंत्र जप गुरू तत्वाभिषेक माला से करें। दोनों हाथ जोड़ करके भगवान शिव के गुरू स्वरूप का ध्यान करे।
साधना समाप्ति के पश्चात् साधना सामग्री को किसी नदी में विसर्जित कर दें।
जाज्वल्यमान, ऊर्जावान व्यक्ति ही जीवन में सफ़लता व कीर्ति के शिखर पर पहुंच सकता है, साथ ही आज के प्रतिस्पर्धा के युग में प्रभावी व्यक्तित्व, पौरूषता, उमंग, जोश, सम्मोहन शक्ति से युक्त होना अत्यन्त आवश्यक है, तभी व्यक्ति को समाज, व्यवसाय, नौकरी, परिवार में उच्च स्थान प्राप्त हो पाता है, कामदेव अनंग शक्ति जहां एक ओर व्यक्ति की सभी मनोकामना को पूर्ण करने में समर्थ हैं, वहीं दूसरी ओर शारदाम्बा की चेतना से ओत-प्रोत व्यक्ति जीवन के सभी अंधाकारमय परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करता है, इस हेतु 13-14-15-16 फ़रवरी तक कैलाश नारायण सिद्धाश्रम दिल्ली में कामदेव अनंग सम्मोहन शक्ति वृद्धि दीक्षा से साधक पुरूषोत्तम शक्ति से युक्त होगा साथ ही शारदाम्बा ऐं बीज अंकन दीक्षा से विद्यार्थी उच्च शिक्षा और सफ़लता प्राप्त कर सकेंगें।
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