





नींबू का टुकड़ा काट कर दाद पर मलने से पहले कुछ जलन-सी प्रतीत होती है, किन्तु दाद की खुजली कम हो जाती है तथा कुछ दिनों नित्य मलने से रोग मिट जाता है।
मुलहठी के चूर्ण को भांगरे के रस में पीसकर लेप करने से अथवा सुखाये हुए आँवलों के चूर्ण को नींबू के रस में मिलाकर लेप करने से बाल झड़ना बंद होकर बाल काले होते हैं।
जलने पर तुरंत गुवारपाठा का गूदा लगाने से बर्फ जैसी ठण्डक प्राप्त हो जाती है तथा घाव जल्दी भरने लगता है।
लम्बाई बढ़ाने के लिए अश्वगंधा चूर्ण, काले तिल, खजूर को घी में मिला कर नित्य तीन गोली एक महीने तक खाने से लाभ होता है। साथ में पादपश्चिमोत्तानासन, और पुल्ल-अप्स आसन करने से एवं हाथ से शरीर झुलाने से लम्बाई बढ़ती है।
बच्चे के दाँत निकलने पर तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर मसूढ़े पर घिसने से बालक के दाँत बिना तकलीफ़ के बढते जाते हैं।
सूखे आँवले के चूर्ण को गाय के घी के साथ मिलाकर चाटने से थोड़े ही दिनों में तुतलापन दूर हो जाता है।
बादाम की गिरी, चारोली एवं खसखस को बारीक पीसकर, दूध में उबालकर, खीर बनाकर उसमें गाय का घी एवं मिश्री डालकर पीने से दिमाग पुष्ट होता है।
चेहरे पर झुर्रियाँ हों तो दो चम्मच ग्लिसरीन में आधा चम्मच गुलाबजल एवं थोड़े नीबूं के रस की बूँदें मिलाकर मुँह पर रात्रि को लगायें। सुबह उठकर ठण्डे पानी में मुँह धो डालें। एक मास तक ऐसा करने से त्वचा का रंग निखरकर झुर्रियाँ कम हो जायेगी।
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