





गुलाबी फि़टकरी फ़ुलाई हुई 2-3 रत्ती की मात्रा में देने के लिए एकाहिक ज्वर में लाभ होता है।
छोटी पीपल के चूर्ण में सेंधा नमक मिला कर गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से सब प्रकार की खाँसी दूर होती है इससे गले में रूका हुआ कफ़ भी निकल जाता है।
सूखे हुए आमले और धनियाँ समान भाग का कपड़छन चूर्ण करें और उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिला कर पानी के साथ सेवन करावें तो दस्त में लाभ होता है।
छोटी पीपल, सोंठ और आँवले समान भाग का 2-3 ग्राम तक की मात्र में चूर्ण, समान भाग घी और शहद के साथ खाने से श्वास तथा हिचकी दूर होती है ।
काली मिर्च और कुटकी समान भाग का चूर्ण तुलसी रस और मधु के साथ लेने से मलेरिया में लाभ होता है।
नारियल के तेल में फ़ुलाया हुआ सुहागा मिलाकर शरीर पर मालिश करने से खुजली में राहत मिलती है।
पीली सरसों का तेल साफ़ कपड़े से छान कर रखें और दोनों नासा-छिद्रों में 2-3 बूँदे प्रातः- साँय दोनों समय डालें। कुछ दिन निरन्तर ऐसा करने से नया-पुराना सभी प्रकार का जुकाम मिट जाता है उसमें कोई भी अन्य तेल मिश्रण नहीं होना चाहिए।
नौसादर और चूना महीन करके शीशी में, कड़ी डाट लगा कर रखें। इसे सूँघने से सब प्रकार का सिर दर्द तत्काल दूर होता है।
काली मिर्च का चूर्ण, भाँगरे के रस के साथ पीस कर नस्य लेने से भी सभी प्रकार के सिर दर्द में लाभ होता हैं।
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