





रोग कोई भी हो कैसा भी हो उसे असाध्य नहीं मान लेना चाहिए। मनृष्य उपाय करे तो उसे सफलता भी मिल जाती है। नियमित रुप से आहार विहार को संतुलित रखने सात्विकभाव रखने परिश्रम तथा व्यायाम करने से आरोग्यमय दीर्घायु जीवन की प्राप्ति होती है।
सिर ओर माथे पर बादाम रोगन की मालिस से सिर दर्द में लाभ होता है।
लगातार हिचकी आने पर बडे बडे घूंट ले कर ताजा पानी पीने से आराम होता है।
क्षय रोग की निवारण हेतु द्राक्षासव दो चम्मच नित्य पानी के साथ लेने से आराम आता है।
सर्दी में शरीर मे खराश होने पर नारियल के तल में फूलाया हुआ सुहागा मिलाकर शरीर पर प्रात: स्नान करने से पूर्व अच्छी तरह से मालिश करने से खुश्की समाप्त होती है।
पावों में बिवाई (फटना) के निवारण हेतु शहद और घी के साथ सेंघा नमक सरसों के तेल में डाल कर एक रुप में मिश्रण कर स्नान के बाद बिवाई पर लगाने से आराम आता है।
मधुमेह की आरंभिक अवस्था में बबूल की हरी पत्तियां जल में भिगोकर पीस लें और साथ में चार पांच काली मिर्च पीस कर मिला लें और बाद में छान कर पीने से आराम आता है।
दुर्बलता नाशक हेतु इसबगोल, शीतल, चीनी, छोटी इलायची के दाने १-१ ग्राम लेकर बारीक पीस कर इसमें मिश्री मिलाकर काढा लेने से कमजोरी समाप्त होती है।
सेंघा नमक, सौंठ, छोटी इलायची, भुनी हींग, पिप्पली समान भाग का चूर्ण आधी रत्ती की मात्रा में देने से वातजशूल, बुखार या ज्वर में लाभ होता है।
रोज पांच तुलसी के पत्ते कच्चे चबाने से गले और बुखार में लाभ मिलता है।
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