





भगवान विष्णु के इस अवतार का स्वरुप अपार शक्ति सम्पन्न, अपने बल का उपयोग हमेशा धर्म, समाज व प्रकृति की रक्षा के लिये करने वाले दिव्य पुरुष के रुप में जाना जाता है। श्री बलराम ने पृथ्वी पर अन्याय, अधर्म का प्रसार करने वाले दुष्टों का संहार करने में भगवान कृष्ण का सदा सहयोग किया।
मानव जीवन में भी निरन्तर आसुरी प्रवृत्ति वाले लोगों की मौजूदगी रहती है जो पग-पग पर साधक के जीवन में, उनके कार्यों में व्यवधान डालते हैं। घर हो या दफ्तर हर मामलों में दखलंदाजी करते हैं, परिणामतः जीवन व्यतीत करना दुष्कर हो जाता है, ऐसे लोग साधक के जीवन की सफलता में बाधक होते हैं। ऐसी दुष्ट प्रवृत्ति वाले लोग या तो तंत्र क्रियायों द्वारा या कटाक्ष भरी ज़बान, सामाजिक लांछनों द्वारा साधक को परेशान करते हैं, जीवन दूभर व घुटन भरा बना देते हैं। परन्तु अब साधक को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। जिस प्रकार भगवान बलराम सदा धर्म व न्याय के मार्ग पर चलते हुये आसुरी शक्तियों का विनाश किया करते ठीक उसी भांति साधक “श्री बलराम प्राण रक्षा ऊर्जा शक्ति प्राप्ति साधना” सम्पन्न कर उन्हीं की भांति वीर-निडर बन जाते हैं। श्री बलराम अपने भक्त के जीवन में जो भी बाधायें एवं चिन्ताकारक विषय हैं उनका सर्वनाश कर भयमुक्त व ऊर्जावान जीवन प्रदान करते हैं।
“श्री बलराम प्राण रक्षा ऊर्जा शक्ति प्राप्ति दीक्षा” से युक्त हो जाने पर नकारात्मक व बुरी शक्तियां साधक को छू भी नहीं पाती व साथ ही साधक भगवान बलराम की ही भांति न्याय के मार्ग पर प्रशस्त रहते हुये अपना संपूर्ण जीवन संतुष्टि व शांतिपूर्वक प्रगतिशील बनाने में सफल होता है।
साधना विधि:
किसी भी गुरूवार की प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर पीली धोती और गुरू चादर धारण करें। पूजा स्थान में सामने लकड़ी के बाजोट पर पीला बस्त्र बिछायें साथ ही बाजोट के बायें ओर शुद्ध घी का दीपक जलायें। इसके बाद किसी ताम्र पात्र में ॐ लिखकर उस पर ‘प्राण रक्षा यंत्र’ और ‘जीवट’को स्थापित कर पंचोपचार पूजन कर अपनी मनोकामनायें व्यक्त कर सद्गुरूदेव का ध्यान करे। फिर संकल्प लेकर ‘प्राण शक्ति माला’ से निम्न मंत्र का 11 माला मंत्र जप सम्पन्न करे।
मंत्र
।। ॐ ह्रीं श्रीं नारायण तत्वाय स्थापयामि नमः ।।
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