





लक्ष्मी की आराधना मनुष्य जीवन की प्राथमिकता है। लक्ष्मी के अभाव में चाहे वह गृहस्थ हो या संन्यासी सबका जीवन कठिन ही है। उसके जीवन में लक्ष्मी का समावेश होना ही चाहिए क्योंकि वर्तमान और भूतकाल में भी लक्ष्मी की आराधना हुई है और होती रहेगी क्योंकि पूर्वकाल की अपेक्षा आज वर्तमान में इसकी आवश्यकता और भी बढ़ गई है। यह अर्थप्रधान युग है इसलिए घर के बाहर एक पग रखते ही लक्ष्मी की आवश्यकता होती है, इसलिए अपने जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए लक्ष्मी की आराधना मनुष्य से अपेक्षित है। विश्वामित्र और वशिष्ठ जैसे महर्षियों ने भी लक्ष्मी की आवश्यकता को समझते हुए, विरक्त और त्यागी होते हुए भी लक्ष्मी को अपनी साधना में संचित स्थान प्रदान किया और लक्ष्मीवान बने रहे जिससे बड़े से बड़े राजा-महाराजा इन वैभववान महापुरूषों के सामने नतमस्तक हुए।
रावण ने भी इन्द्राक्षी मूंगा माला को धारण कर स्वर्ण खप्पर साधना इन्द्राक्षी मूंगा माला से ही सम्पन्न कर अपने राज्य को सोने का बना पाया। और यह एक गूढ़ सत्य है कि सृष्टि से रावण ही एक ऐसा व्यक्तित्व था जिसने अपने राज्य को पूर्ण स्वर्णमय बना पाया।
विश्वामित्र ऋषि अपने समय के सबसे निर्धन और दरिद्र समझे जाते थे, जो अपने शिष्यों को दो वक्त का भोजन भी नहीं दे पाते थे। उन्होंने सहस्त्राक्षी महालक्ष्मी की साधना में इन्द्राक्षी मूंगा माला से जप किया और इस प्रकार महालक्ष्मी को अपने घर में अपने आश्रम में स्थापित करके वे शक्तिवान और ऐश्वर्यवान हुए और तत्कालीन ऋषियों में वैभववान, सम्पदावान ऋषि कहलाये। महर्षि विश्वामित्र को भौतिकता की चरम सीमा पर पहुंचाने का सबसे बड़ा श्रेय इन्द्राक्षी मूंगा माला को है। इस प्रमाण से यह सिद्ध होता है कि लक्ष्मी साधना में इन्द्राक्षी माला की क्या उपयोगिता है, अतः आप भी अपने पूजा में इस माला से आराधना अवश्य करे।
वैसे तो लक्ष्मी की आराधना के लिए और भी कई मालाएं हैं, उनसे भी लक्ष्मी की आराधना संभव है किन्तु इन्द्राक्षी मूंगा माला से लक्ष्मी मंत्र का जप करने से भगवती कमलवासिनी का आशीर्वाद शीघ्र प्राप्त होता है। इस माला के निर्माण में महालक्ष्मी के विशिष्ट मंत्रें से इसके एक-एक मनके को 108 बार मंत्र जप करके विशेष प्रकार से चैतन्यता दी जाती है तथा इस माला के सुमेरू को 11 हजार महालक्ष्मी मंत्रें से चैतन्य करने के बाद प्राण-प्रतिष्ठा के विशेष मंत्रें से चैतन्यता देकर शक्ति युक्त किया जाता है जिससे किसी भी महालक्ष्मी की साधना के लिए माला अनुकूल हो पाती है। महालक्ष्मी की जितनी भी साधना या अनुष्ठान हैं उनमें यह माला अत्यन्त उपयोगी है तथा अनुकूलता प्रदान करने वाली है।
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