





महिषासुर की असुर वृत्ति के विनाश और संहार के लिए त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपनी चेतन्य शक्ति से जान लिया कि असुरों का विनाश केवल नारी रूपी शक्ति से ही सम्भव है। धर्म की ग्लानि और अधर्म का ज्यों-ज्यों विस्तार होता है, ऐसे असुरों के परितराण और दुष्वृतियों के विनाश के लिए, दुर्गा का प्राकट्य स्वरूप भी देवताओं द्वारा अपनी अपनी शक्ति के अंश स्वरूप में अवतरित किया गया और इसी के फलस्वरूप दुर्गा का अवतरण हुआ। सांसारिक मनुष्यों द्वारा अपने भीतर आत्मिक और शारीरिक बल, ज्ञान और चेतना शक्ति से विद्या, बल और धन-धान्य की परिपूर्णता से जीवन निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो सके इन्हीं सोपानो को प्राप्त करने के लिए निरन्तर शक्ति स्वरूपा की आराधना की जाती है।
माता महा लक्ष्मी की पिण्डी
डुग्गर के शतश्रृंग पर्वत के त्रिकूट शिखर पर माता वैष्णों देवी विराजमान है। पर्वत की पवित्र गुफा में जो तीन पिण्डियां है उनमें मध्यवर्ती पिण्डी माता महा लक्ष्मी की है और महा लक्ष्मी विष्णु की शक्ति है। अतः इसका दूसरा नाम वैष्णवी है। यह वैष्णवी परा-शक्ति हैं।
परमात्मा की और भी नानाविध शक्तियां हैं। इन अनेक शक्तियों में श्री विष्णु की अहन्त नाम की एक शक्ति है, वही महालक्ष्मी है। एक स्थान पर स्वयं महालक्ष्मी ने इन्द्र से कहा- उस पारब्रह्म की, जो चन्द्रमा की चाँदनी की तरह समस्त अवस्थाओं में साथ देने वाली परमशक्ति है, वह सनातनी शक्ति मैं ही हूं। मेरा दूसरा नाम नारायणी भी है। मैं नित्य, निर्दोष, सीमारहित कल्याण गुणों वाली, नारायणी नाम वाली, वैष्णवी परा सत्ता हूँ।
पुरातन शास्त्रों के अनुसार जो देवी परम शुद्ध सत्व-स्वरूपा है, उनका नाम महालक्ष्मी हैं। परम परमात्मा श्रीहरि की वे शक्ति है। हजार पंखुडि़यों वाला कमल उनका आसन है। उनके मुख की शोभा तपे हुए स्वर्ण के समान है, और इनका रूप करोड़ों चन्द्रमाँओं की कान्ति से सम्पन्न है। माता महा लक्ष्मी के मुख पर सदैव मुस्कान व्याप्त रहती है। सम्पत्तियों की ईश्वरी होने के कारण अपने सेवकों को ये धन ऐश्वर्य, सुख, सिद्धि और मोक्ष प्रदान करती है। भगवान श्रीहरि की माया तथा उनके तुल्य होने के कारण इन्हें नारायणी कहा जाता है। वैष्णवी और दुर्गा इनके दूसरे प्रसिद्ध और प्रमुख नाम है।
जैसे नदियों में गंगा, देवताओं में श्रीहरि तथा वैष्णवों में शिव श्रेष्ठ स्वीकार किये गए हैं, उसी प्रकार देवी के सभी नाम रूपों में वैष्णवी नाम से प्रसिद्ध भगवती महा लक्ष्मी श्रेष्ठ है। माता महा लक्ष्मी अत्यन्त सुन्दर, संयमशील, शान्त, मधुर और कोमल स्वभाव की हैं। क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहंकार आदि से रहित अपने भक्तों पर कृपा करते रहना और अपने स्वामी श्रीहरि से प्रेम करना उनका स्वभाव है। वे मधुर और प्रिय लगने वाले वचन ही बोलती हैं।
माता महाकाली की पिण्डी
गुफा में दूसरी पिण्डी माता महाकाली की है। महाकाली महाशक्ति का प्रधान अंग है। शुम्भ और निशुम्भ के साथ होने वाले सहासमर के समय में ये भगवती दुर्गा के ललाट से प्रकट हुई थी। भगवती दुर्गा का इन्हें आधा अंश माना जाता है। गुण और तेज में ये दुर्गा के ही समान हैं। इनका अत्यन्त शक्तिशाली शरीर करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी है। सम्पूर्ण शक्तियों में ये प्रमुख है, और इनसे बढ़कर कोई शक्तिशाली है ही नहीं। ये प्रयोग-स्वरूपिणी, सम्पूर्ण सिद्धि प्रदान करने वाली है। श्रीहरि के तुल्य है।
भद्रकाली, श्मशान-काली, गुह्यकाली और रक्षाकाली आदि नामों से इनके अनेक रूप हैं। इनका एक अन्य प्रसिद्ध नाम चामुण्डा है। इन्होंने असुरों के साथ होने वाले युद्ध में चण्ड-मुण्ड नामक दो महा असुरों का संहार किया। अतः इनको चामुण्डा भी कहा जाने लगा। महाकाल भगवान शिव का एक नाम है उनकी शक्ति होने के कारण इनको भी महाकाली कहा जाता है। ये देवी नीलकमल की भांति श्याम है।
माता सरस्वती की पिण्डी
गुफा की तीसरी पिण्डी महासरस्वती की है।
महाशक्ति के तीसरे प्रमुख परमात्मा से सम्बन्ध रखने वाली यह वाणी की अधिष्ठात्री, कवियों की इष्ट देवी, शुद्ध सत्व स्वरूपा और शांतरूपिणी है। वाणी, विद्या, बुद्धि और ज्ञान को प्रदान करने वाली यही देवी है। वाणी में श्रेष्ठता, विद्याओं और कलाओं में निपुणता, बुद्धि में विलक्षणता और ज्ञान में विविधता के लिये इनकी कृपा से ही सम्भव हो पाती है।
संसार की सभी विद्याये और कलायें इनका स्वरूप है। प्रत्येक मनुष्य को बुद्धि, विद्या, कविता करने की शक्ति, नाटक-उपन्यास और अन्य प्रकार की साहित्य रचना के लिये प्रतिभा, योग्यता और स्मरण-शक्ति इन्हीं की कृपा से होती हैं। मनुष्य को स्मरण-शक्ति प्रदान करने वाली माता सरस्वती को स्मृति शक्ति, ज्ञानशक्ति और बुद्धि शक्ति कहा गया है। प्रतिभा और कल्पना शक्ति भी यही है। इन्हीं की दया से ब्रह्मा, शेषनाग, बृहस्पति, वाल्मीकि, व्यास आदि वेद-शास्त्र, स्मृतियां, इतिहास, पुराण और काव्य रचना में समर्थ हुए।
शक्ति को आत्मसात करने के लिए स्त्री स्वरूप में दुर्गा, ज्ञान स्वरूप में सरस्वती और धन-धान्य वृद्धि में महालक्ष्मी की ही वंदना की जाती है। संसार में मनुष्यों द्वारा हर तरह की शक्ति से ओत-प्रोत होने के लिए इन्हीं शक्तियों की आराधना से पूर्णता प्राप्त होती है। आध्यात्मिक रूप से आद्या शक्ति, ज्ञान शक्ति और क्रिया शक्ति के प्रतीक स्वरूप में इसी की वंदना की जाती है क्योंकि सुखी जीवन के लिए बुद्धि, धन और आरोग्यमय देह की प्राप्ति हेतु माँ शक्ति के तीनों स्वरूपों की वंदना अनिवार्य है।
माता वैष्णो देवी आदि शक्ति का स्वरूप है इस शक्ति का कोई ओर-छोर नहीं है इसका अवतरण असुरों के संहार के लिए सृष्टि के रचियता, पालन कर्त्ता और संहार कर्त्ता के सामूहिक शक्तियों से माता को प्रकट किया गया है। इस शक्ति में सृष्टि के निर्माण कर्त्ता ब्रह्मा ने महा-सरस्वती रूप प्रदान किया, पालन कर्त्ता विष्णु ने महालक्ष्मी का तथा संहार कर्त्ता भगवान सदाशिव महादेव ने महाकाली की चेतना का प्रार्दुभाव किया। कटरा जम्मू से 14 कि- की दूरी पर त्रिकूट पर्वत की गुफा में इन तीनों ही देवी स्वरूप में पिण्डियाँ अवस्थित है। सर्व कार्यसिद्धि के लिए तीन रूप धारण किये हुए हैं। ये तीनों शक्तियाँ ही आदि शक्ति का स्वरूप हैं किन्तु महा-सरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के स्वरूपों का समवेश नाम ही माता वैष्णों देवी कहलाती हैं।
सात्विक साधक जीवन के मनोरथों को पूर्णरूपेण प्राप्त करने के लिए माता वैष्णों देवी की भक्ति अवश्य करता है। जीवन में अनेक विपत्तियों के समाधान में वैष्णों देवी ही पूर्णरूपेण सहायक रहती है। मनुष्य देह हर रूप में भौतिक सुखों से श्रेष्ठता को प्राप्त हो सकें। इसके लिए बुद्धिमान व्यक्ति आद्या शक्ति और भैरव का दर्शन कर अपने जीवन को सौभाग्यशाली बनाने की ओर अग्रसर होता है। इसी हेतु सद्गुरुदेव के सानिध्य में माता वैष्णों देवी की यात्रा कर माँ शक्ति को पूर्णरूपेण आत्मसात करने की क्रिया सम्पन्न की जा सके। इसी हेतु श्रेष्ठमय दिवस पर सहस्त्र चक्र जागरण दीक्षा, वैभव धन लक्ष्मी दीक्षा, शत्रु पीड़ा हरण संहार दीक्षा और अप्सरा अनंग दीक्षा प्रदान की जायेगी। थोड़ा कष्ट सहन करने वाला ही अपने जीवन के कार्यों में अनुकूलता और श्रेष्ठता ला सकता है। लाखों लाखों भक्त माता वैष्णों देवी की यात्रा करते है तो निश्चित रूप से यह पवित्र तीर्थ स्थान अवश्य ही पूर्ण प्रज्ञा और चैतन्य युक्त निशि्ंचत ही है। यह आप भली-भांति जानते है। जिसको अपने जीवन की नारकीय स्थितियों को समाप्त करना होता है। उसके पाँव ठिठक नहीं पाते और वह यात्रा में सामान्य सी असुविधाओं को भुला देता है क्योंकि उसका लक्ष्य उस त्रि-शक्ति शत्रुहन्ता महाकाली, ज्ञानरूपी सरस्वती और जीवन को हर दृष्टि से वैभवशाली बनाने में सहायक महालक्ष्मी को पूर्णरूपेण आत्मसात करने का चिंतन होता है।
साधकों के लिए कटरा में विश्राम और भोजन की व्यवस्था गुरुदेव द्वारा की गई है। कटरा से वैष्णों देवी की पैदल यात्रा करना श्रेयष्कर रहता है।
कटरा से माता वैष्णो देवी और भैरव मंदिर तक की यात्रा केवल पैदल ही होगी। कटरा में ही केवल पंजीकृत साधकों के लिए ही ठहरने और भोजन की व्यवस्था गुरूदेव द्वारा हॉल (Hall) में ही संभव हो सकेगी।
बहिन, बेटियां माताऐं किसी भी स्थिति में अकेली नहीं आऐं। बीमार, असक्त, क्लीष्ट रोगी इस शिविर में भाग नहीं लें।
3 मई 2014 शनिवार को कटरा पहुँचना अनिवार्य है। रात्रि में विश्राम की व्यवस्था की गई है।
4 मई 2014 को प्रातः पूर्व ही रात्रि से माता वैष्णो देवी की पद यात्रा प्रारंभ होगी।
शंकराचार्य बोधित्सव दिवस पर मध्यांह समय पर जब सूर्य पुरी तेजस्विता से साधको के साथ-साथ माता वैष्णों देवी को आलोकित कर रहा होगा। ऐसे प्रकाश पर्व के अवसर पर सहस्त्र चक्र जागरण दीक्षा, वैभव धन लक्ष्मी दीक्षा प्रदान की जायेगी।
भैरव मन्दिर प्रांगण में सांध्य बेला में पूजा-अर्चना ध्यान के साथ शत्रु पीड़ा हरण संहार दीक्षा और अप्सरा अनंग दीक्षा प्रदान की जायेगी।
दर्शन, पूजा और दीक्षा प्राप्त करने के साथ ही अपनी स्वयं की व्यवस्था से सीधे घर को प्रस्थान करेंगे जिससे की जो दिव्यता आपने प्राप्त की है उसका पूरे जीवन भर श्रेष्ठ लाभ प्राप्त होता रहे।
शुल्क राशि कैलाश सिद्धाश्रम जोधपुर अथवा गुरूधाम दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से जमा कराऐं अथवा ड्राफ्रट/सीधे खाता में जमा कर पंजीकरण (Registration) कराना होगा।
(पंजीकरण शुल्क: 4100/-)
न्यौछावर राशि भेजने के लिए आप ‘प्राचीन मंत्र यंत्र विज्ञान’, ‘Pracheen Mantra Yantra Vigyan’ Jodhpur के नाम का ड्रॉफ्रट अथवा आप चाहे तो उक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, यू-आई-टी-, जोधपुर ‘प्राचीन मंत्र यंत्र विज्ञान’ खाता क्रमांक 31763681638 अथवा स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, यू-आई-टी-, जोधपुर ‘कैलाशचन्द्र श्रीमाली’ खाता क्रमांक 31706102525 में भेज कर भी लाभ प्राप्त कर सकते है। उक्त नाम से अपने वहां की बैंक शाखा में जमा करवा कर PAY IN SLIP की कॉपी भिजवा सकते हैं। पंजीकरण शुल्क आप सीधे अपने वहां केबैंक में जमा करा सकते हैं। बैंक ट्रांसफर का चालान नं- sms अथवा फैक्स करने पर पंजीकरण स्वीकार कर लिया जाएगा।
आप प्राचीन मंत्र-यंत्र विज्ञान जोधपुर कार्यालय के फोन न- 0291-2517025, 0291-2517028 अथवा मोबाइल नं- 07568939648, 08769442398 पर सम्पर्क कर विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
माता वैष्णों देवी की यात्रा में प्रतिदिन साठ से सत्तर हजार भक्त पहुँचते है इसीलिए माता वैष्णो देवी साईन बोर्ड द्वारा ओनलाईन बुकिंग की ही व्यवस्था निर्दिष्ठ की गई है। इस हेतु मनोकामना भवन में स्वंय साधक द्वारा ही इस वेब साईट पर www.matavaishnodevi.org बुकिंग ली जाती है और यह बुकिंग यात्रा दिवस से 30 दिन पूर्व ही खुलती है। आपके स्वयं के द्वारा बुकिंग कराने पर आपको समय पर रहने और सोने की व्यवस्था उपलब्ध हो सके। साईन बोर्ड द्वारा अनेक स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय और स्नानघर बनाये गये है। उनका सही रूप से उपयोग कर माता वैष्णों देवी त्रि-पिण्ड के दर्शन पूर्ण श्रद्धा और आकांक्षा पूर्ति स्वरूप में अपने हृदय भाव में उस शक्ति को आत्मसात कर सके और अपनी कामना लेकर सद्गुरुदेव से दीक्षा प्राप्त करे। साधकों के भोजन प्रसाद की व्यवस्था निर्धारित भोजनालय में ही प्रदान की जायेगी। माता वैष्णों देवी दर्शन और गुरुदेव द्वारा शक्तिपात दीक्षा के सामुज्य को आत्मसात करने के बाद भगवान श्री भैरव बाबा की आभा को संचित कर सके इस हेतु भैरव दर्शन की व्यवस्था रखी गयी है।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,