





तंत्र विज्ञान कहता है कि वह विशेष क्रिया जिससे अपने शरीर, मन के अनुसार क्रिया सम्पन्न कर प्रकृति को अपने अनुकूल बनाया जाये। जब प्रकृति मन रूपी यंत्र के अनुकूल हो जाती है तो सारे कार्य सरल हो जाते है और यही सारे कार्य सरल हो जाते है ओर यही तो साधना है। साधना के द्वारा हम मंत्र और यंत्र के माध्यम से तंत्र रूपी क्रिया सम्पन्न करते हैं।
तंत्र शास्त्री कहते हैं कि होली, दीपावली, नवरात्रि, महाशिवरात्रि तो अपने आप में साधना सिद्धि और श्रेष्ठ कार्यों के लिये सिद्ध मुहूर्त स्वरूप होता है। लेकिन उनके साथ ही साथ ग्रहण-काल साधनाओं के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण मुहूर्त है। इस समय पृथ्वी और पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों के लिए ग्रहण एक विशेष प्रभाव से युक्त रहता है। ऐसे समय में यदि साधना अर्थात् तंत्र क्रिया सम्पन्न कर ली जाए तो उसका प्रभाव तत्काल मिलता ही है।
सद्गुरूदेव ने अपने प्रवचनों में इस बात को विशेष रूप से स्पष्ट किया और प्रत्येक ग्रहण के समय शिष्यों को विशेष साधनाएं सम्पन्न कराई। सद्गुरूदेव ने कहा है कि – ग्रहण-काल में महाविद्याएं साधनाएं अवश्य सम्पन्न करनी चाहिए। महाविद्याओं में भी धूमावती, बगलामुखी, छिनन्न्मस्ता, महाकाली, त्रिपुर भैरवी विशेष रूप से सम्पन्न करनी चाहिए।
ग्रहण-काल के दौरान शत्रु बाधा निवारण, राज्य-बाधा निवारण से सम्बन्धित साधनाएं विशेष रूप से सम्पन्न करनी चाहिए। ग्रहण-काल के दौरान मनोकामना पूर्ति से सम्बन्धित साधनाएं अवश्य ही सम्पन्न करनी चाहिए।
सद्गुरूदेव ने कहा है चन्द्र ग्रहण का काल खण्ड तो 10 मिनट से 40 मिनट तक का ही होता है, लेकिन उसका प्रभाव 12 घड़ी पहले अर्थात् मूल ग्रहण काल से 4 घण्टे 48 मिनट पहले से प्रारम्भ हो जाता है।
ग्रहण के पश्चात् अपने घर के पात्र एवं पूरे घर को स्वच्छ करना चाहिए। ग्रहण-काल के दौरान कोई भोजन आदि ग्रहण नहीं करना चाहिए ग्रहण की समाप्ति के पश्चात् पूर्ण सूर्य या चन्द्र को देखकर ही भोजन करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण का दर्शन नहीं करना चाहिए। यदि वे ऐसा करती हैं तो उनकी संतान के विकारों से युक्त उत्पन्न होने की आशंका रहती है। ग्रहण-काल में यदि कीड़ा भी काट लेता है तो उसका जहर कई गुना बढ़ जाता है। अतः देह के सम्बन्ध में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। ग्रहण-काल के दौरान घर के बाहर अनावश्यक घूमना उचित नहीं माना गया हे क्यों कि ऐसा माना जाता है कि ग्रहण-काल में प्रकृति अपने अलग रंग में होती है ओर उसके प्रभाव से शरीर में कई परिवर्तन आते हैं।
इस वर्ष का दिव्यतम श्रेष्ठमय मुहुर्त स्वरूप चन्द्रग्रहण इस वर्ष आश्विन शुक्ल पूर्ण चेतनामयी चंद्र ग्रहण शरद पूर्णिमा, 8 अक्टूबर, 2014 बुधवार को सांय 06.02 से 07.02 मिनट के मध्य होगा। यह चन्द्र ग्रहण सम्पूर्ण भारतवर्ष में दृश्यमान होगा। ग्रहण स्पर्श काल दोपहर 02.48 से प्रारम्भ हो जायेगा। ग्रहण मध्य काल 04.25 रहेगा। ग्रहण मोक्ष काल सायं 07.02 रहेगा।
ग्रहणकाल
ग्रहण प्रारम्भ दिन में :- 01.47
ग्रहण स्पर्श :- 02.48
ग्रास:- 03.57
ग्रहण मध्य :- 04.25
सांय:- 06.02 से 07.02
मोक्ष काल संध्या बेला:- 07.02
ऐसे दिव्यतम प्रभाव युक्त पूर्ण फलदायी चंद्रग्रहण बुधोदय के अवसर पर वशीकरण साधना करने से न केवल अपने आप को स्व सम्मोहन स्वरूप वरन् दूसरो को भी अपने मन के मुताबिक सम्मोहित किया जा सकता है।
यह वशीकरण प्रयोग अत्यधिक उपयोगी और महत्वपूर्ण है। तंत्र और मंत्र के ग्रन्थों में वशीकरण से सम्बन्धित सैकड़ों प्रयोग है ओर उन्हें समय-समय पर आजमाया जाता भी है, पर पूरा संसार इस बात को स्वीकार करता है, कि तिब्बती लामाओं के पास जो वशीकरण प्रयोग हैं, उनसे बन्दूक की गोली से भी तीव्र परिणाम प्राप्त किया जा सकता है, कठोर से कठोर हृदय को भी अपने वश में किया जा सकता है।
तिब्बती लामाओं ने वशीकरण प्रयोगों के द्वारा राजाओं को अपने वश में करके सैकड़ों वर्षों तक राज्य किया। ‘केरवेन’ नामक कठोर और भयंकर महिला शासक को भी अपने वश में करके, उसे एक प्रकार से अपना गुलाम बना दिया था और वह कठोर हृदय शासिका जीवन भर उस लामा के वश में रही ओर लामा ने जो भी उचित-अनुचित आज्ञा दी, उसे उस शासिका ने पूरा किया।
तिब्बत के तांत्रिक ‘यागू’ ने स्वीकार किया है, कि इन आकर्षण प्रयोग को नरभक्षी शेर पर किया जाए, तो वह भी बिल्ली की तरह पालतू बन कर पीछे-पीछे घूमता रहता है। इस दुर्लभ प्रयोग से छः प्रकार के परिणाम तुरन्त प्राप्त किए जा सकते है –
ध्यान दें – कृपया असामाजिक कार्यो के लिए इस साधना का प्रयोग न करें।
सबसे पहले इस मंत्र को सिद्ध करना पड़ता है। इसके लिए मात्र 210 माला मंत्र जप पांच दिन में होनी आवश्यक हे अर्थात् नित्य 42 मालाएं मंत्र जप होनी चाहिए। इसमें ‘तिब्बती माला’ का ही प्रयोग किया जाता है।
8 अक्टूबर, 2014 को चन्द्रगगण काल (1.47 से 7.02) में स्नान आदि से निवृत्त होकर पश्चिम दिशा की ओर मुंह कर साधक बेठ जाएं और सामने “लामा वशीकरण विग्रह’ रख दें तथा मात्र अगरबत्ती लगाकर जप प्रारम्भ कर दें।
पांच दिन पश्चात् जब मंत्र जप पूरा हो जाए, तब उस लामा वशीकरण विग्रह को किसी काले कपडे में बांध कर पूजा स्थान में रख दें।
जब मंत्र सिद्ध हो जाए, तब जिसको वश में करना हो, उसका नाम उच्चारण करते हुए, मात्र तीन माला मंत्र जप सम्पन्न करें।
उसके सामने जाएं तो वह वश में होता हुआ, उसका कहा मान लेता है और जैसा वह कहता है उसी प्रकार से कार्य सम्पन्न करता है। इसका प्रभाव जीवन भर बना रहता हे।
प्रयोग सिद्ध करने के बाद किसी पर भी प्रयोग करने का मंत्र
इस साधना को पुरूष या स्त्री कोई भी सम्पन्न कर सकता है। इससे किसी प्रकार की हानि नहीं होती हैं। प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि आप जिस पर मंत्र प्रयोग कर रहे है, उसे इस बात का पता नहीं चले, कि उस पर प्रयोग किया गया है। प्रत्येक क्रिया के लिये नूतन सामग्री होना आवश्यक है। साधना सिद्ध करने के पश्चात् माला और विग्रह पांच दिन बाद नदी में प्रवाहित कर दें तथा मंत्र जप सिद्ध करने के पश्चात् किसी अन्य पर मंत्र प्रयोग करने के लिए नवीन सामग्री प्राप्त करें।
शारदीय पूर्णिमा और दिव्यतम पूर्ण तेजमय प्रभाव युक्त चंद्रग्रहण के अवसर पर सांसारिक परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने तथा जीवन में सुख और शांति की वृद्धि हेतु मनोनुक्ल सर्व सम्मोहन शक्तिपात दीक्षा प्राप्त करने से जीवन में सही रूप से परिस्थितियां स्वयं के नियत्रंण मे बननी प्रारम्भ हो जाती है इस हेतु तीन पत्रिका सदस्य बनाने पर उक्त शक्तिपात दीक्षा और साधना साम्रगी उपहार स्वरूप प्रदान की जायेगी।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,