





आस्टियोपोरोसिस से पीडि़त 50 प्रतिशत महिलाओं में विटामिन D की कमी पायी जाती है। एक और शोध के अनुसार विश्व के एक तिहाई बच्चे विटामिन A की कमी से पीडि़त हैं। जिनके रक्त में विटामिन C का स्तर अधिक होता है, उनमें स्ट्रोक की आशंका 42 प्रतिशत कम हो जाती है।
विटामिन K का पर्याप्त मात्रा में सेवन करने से डायबिटीज का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। विटामिन B6 को सबसे ज्यादा स्थिर विटामिन माना जाता है। विटामिन B12 इकलौता ऐसा विटामिन है, जो लीवर में कई वर्षों तक स्टोर रह सकता है। इसके साथ ही पानी में घुलनशील विटामिनों को शरीर सीधे उपयोग कर लेता है और बचे हुए विटामिन यूरीन के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
आपको कितने विटामिन की प्रतिदिन आवश्यकता होती है, यह आपकी उम्र और लिंग पर निर्भर करता है। गर्भावस्था और आपका स्वास्थ भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विटामिन की खोज 1912 में एफ- जी- हाफकिन्स ने की थी, परन्तु इसे विटामिन नाम casimir Funk ने दिया था। रासायनिक रूप में ये कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा गन्धक आदि तत्वों से बने सक्रिय व जटिल कार्बनिक यौगिक है। ये ऊतको में एन्जाइम का निर्माण करते हैं। विटामिन D हमारे शरीर में स्वतः बनता है जबकि विटामिन K आंत में उपस्थित कोलोन नामक वैक्टीरिया बनाता है।
विटामिन को दो भागों में विभाजित किया गया है- पानी में घुलने वाले विटामिन और वसा में घुलने वाले विटामिन। पानी में घुलनशील विटामिन शरीर में मौजूद पानी में घुल जाते हैं और वसा में घुलनशील विटामिन शरीर के फैट (चर्बी) में घुल जाते हैं। वसा में घुलने वाले विटामिन्स की संख्या 4 होती है और पानी में घुलने वाले विटामिन्स 9 होते हैं।
कुल 13 प्रकार के विटामिन होते हैं।
विटामिन A- रेटिनॅाल और थाईरिमीन केमिकल कम्पाउंडस से मिलकर बना है।
स्त्रोत- विटामिन A चुकन्दर, गाजर, शकरकंद, मकई के दाने, मक्खन, पनीर, दूध, हरी सब्जियां, टमाटर और पीले रंग के फलों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
लाभ- ये खून में कैल्शियम को संतुलित बनाये रखने में मदद करता है और त्वचा, नाखून, बाल, दांत, मसूड़ों, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है।
हानि- इसकी कमी से आंखो में समस्या होती है। छोटे बच्चों में विटामिन A के अभाव से उनके कद का विकास रूक जाता है, इससे स्किन और बालों की भी समस्या उत्पन्न होती है।
विटामिन B- विटामिन B कई रूपों में पाया जाता है। जैसे- विटामिन B1 (थियामिन), B2 (राइबोफ्रलेविन), B3 (नियासिन), B5 (पैंटोथोनिक एसिड), B6 (पाइरिडॅाक्सिन), B7 (बायोटिन), B9 (फॅालिक एसिड) और B12 (कोबालामिन) इनमें से प्रत्येक विटामिन के विशिष्ट उपयोगी कार्य हैं।
स्त्रोत- यह विटामिन चोकर, अंकुरित अनाज, दूध, पालक, ताजी सब्जियां, सहजन, गाजर, चुकन्दर, अदरक, किशमिश, केला, मूंगफली और काजू में पाया जाता है।
लाभ- इस विटामिन का प्रमुख कार्य है पाचन क्रिया को स्वस्थ बनाये रखना। B1 और B2 मांसपेशी, तंत्रिका और हृदय कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है। B3 पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में सहायता करता है। B6 इम्यूनी तंत्र को मजबूत और प्रोटीन को तोड़ने में शरीर की सहायता करता है। B9 ब्रेस्ट कैंसर को रोकने में सहायक है। B12 सर्वाइकल कैंसर की आशंका को कम करता है।
हानि- इसकी कमी से पेट सम्बन्धी बीमारियों के अलावा नसों में सूजन, पैरा-लाइसिस या हार्ट अटैक की सम्भावना हो सकती है, इसके साथ ही एनीमिया, थकान, भूख नहीं लगना, अवसाद उत्पन्न होना, बाल झड़ना, एक्जिमा और बेरी- बेरी रोग भी इसी विटामिन की कमी से होता है।
विटामिन C- विटामिन C शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के साथ ही शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाये रखता है।
स्त्रोत- यह विटामिन नींबू, मूली, आंवला, शकरकंद, बैंगन, गोभी, टमाटर, प्याज, संतरा, अन्नानास, अनार, आम व अंकुरित अनाज में पाया जाता है।
लाभ- यह रक्त नलिका की दीवार को मजबूत करता है और दांतों, मसूड़ों को स्वस्थ बनाये रखता है।
हानि- विटामिन C की कमी से स्कर्वी रोग हो सकता है, जिसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी और हर समय थकान महसूस होने लगती है, मसूड़ों में खून आता है और जोड़ों में दर्द रहने लगता है। इसकी कमी से एनीमिया भी होता है।
विटामिन D- शरीर द्वारा कैल्शियम का अवशोषण करने के लिए विटामिन D का होना बहुत ही आवश्यक है। यह एक मात्र ऐसा विटामिन है। जो हमें सूर्य की धूप से मुफ्त मिलता है, सप्ताह में तीन दिन 15 मिनट तक धूप में बैठने से शरीर अपने लिए जरूरी विटामिन D का निर्माण कर लेता है। फिर भी भारत में 49 प्रतिशत शहरी और 20 प्रतिशत ग्रामीणों में इसकी कमी पाई गयी है।
स्त्रोत- विटामिन D का सबसे अच्छा स्रोत सूर्य की किरणें हैं। जब हमारे शरीर की खुली त्वचा सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के सम्पर्क में आती हैं, तो ये किरणे त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन D का निर्माण करती हैं। इसके अलावा दूध, मक्खन, मूंगफली और तिल विटामिन डी का अच्छा स्रोत हैं
लाभ- यह शरीर में कैल्शिम के स्तर को नियंत्रित करता है, जो तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक है। सुन्दर, सुडौल चेहरा, उभरा हुआ वक्ष, चमकती हुई दंत पंक्ति और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
हानि- इसकी कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, जोड़ो में दर्द, मार्निंग सिकनेस, शारीरिक कमजोरी। बच्चों में इस विटामिन की कमी से रिकेटस रोग होता है और बड़ों में आस्टियोपोरेसिस रोग उत्पन्न होता है, जिसमें हड्डियां पतली और कमजोर होने लगती हैं।
विटामिन E – मांसपेशियों और नाडियों की सामान्य उत्पत्ति और मजबूती को बनाये रखता है और एलर्जी से बचाव करने में सहायक होता है।
स्त्रोत- विटामिन E हरी पत्तेदार सब्जियों, अनाज, सोयाबीन, मक्का और छिलके वाले सभी खाद्य पदार्थो में पाया जाता है।
लाभ- कोलेस्ट्राल लेवल को संतुलित रखने वाला यह विटामिन खून में लाल रक्त कणों के निर्माण में मदद करता है साथ ही शरीर के हर अंग को सुचारु ढंग से चलाने में भी सहायक होता है। त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में सहायक ये विटामिन फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। बच्चे की नियमित शारीरिक वृद्धि एवं पिट्यूटरी ग्रंथि को क्रियाशील रखने के लिए विटामिन E एक आवश्यक तत्व है।
हानि- इसकी कमी से प्रजनन क्षमता में कमी आती है और बढ़ती उम्र का असर भी जल्दी दिखने लगता है।
विटामिन K- यह विटामिन खून को गाढ़ा और स्वस्थ बनाता है।
स्त्रोत- विटामिन K छिलकेदार अनाज और हरी सब्जियों में पाया जाता है।
लाभ- यह विटामिन चोट लगने पर खून गाढ़ा करके जमाने का काम करता है, और लीवर स्वस्थ बनाये रखता है। वह रोग जिसमें रक्त बहने का डर हो, ऐसे में विटामिन K का प्रयोग अत्यन्त लाभप्रद है।
हानि- शरीर से जो रक्तस्राव होता है, वह इसी विटामिन की कमी के कारण होता है। इसके अतिरिक्त, पुराना अतिसार, पुरानी पेचिश, बड़ी अंतडि़यों में सूजन आदि रोग इसकी कमी से होता है।
विटामिन्स सभी युवा, पुरुष, महिला, बुजुर्ग के लिए आवश्यक है। मनुष्य की शारीरिक क्रियायें इन्हीं पर निर्भर होती हैं। इसलिए इनकी उपयोगिता और कमी से उत्पन्न होने वाले विकारों को जानना महत्वपूर्ण है। विटामिन्स का प्रयोग एक निश्चित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि विटामिन का अधिक उपयोग भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
अतः आवश्यकता अनुसार चिकित्सक से परामर्श लेकर विटामिन को संतुलित किया जा सकता है। जिससे व्यक्ति अनेक प्रकार की व्याधियों से सुरक्षित होता है और उसका शरीर स्वस्थ, तंदुरूस्त, हष्ट-पुष्ट बनता है। कहा जाता है प्रथम सुख निरोगी काया जो बहुत हद तक हमारे भोजन, कार्य और शरीर की देख-भाल पर निर्भर करता है। इसलिए जो भी अपने जीवन में प्रथम सुख की इच्छा रखते हैं, उन्हें विटामिन्स युक्त भोजन, व्यायाम, प्राणायाम, योग, ध्यान, आसन आदि का आश्रय लेना चाहिए।
विटामिन्स की संतुलित मात्रा हमारे शरीर की अनेक व्याधियां समाप्त करती है, साथ ही इसके असंतुलित होने पर अनेक रोगो का उदय भी हो जाता है। स्वास्थय की दृष्टि से विटामिन्स के संतुलित रहने से शरीर हष्ट-पुष्ट, सुड़ौल और आकर्षक बना रहता है। चिकित्सक अनेक प्रकार की गंभीर बीमारियों में विटामिन्स की मात्रा संतुलित करने की ही दवाईयां देते हैं। स्वयं के स्वास्थय पर थोड़ा सा ध्यान आपको आरोग्यमय दीर्घायु जीवन प्रदान करता है।
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