





ज्वार कफ और पित्त को शांत करता है, वात को बढ़ाता है। शरीर को बल प्रदान करता है, थकान दूर करता है। यह जलन, मोटापा, गैस, घाव तथा रक्तपित्त को नष्ट करता है। इसके फल पौष्टिक, पाचक, खून साफ करने वाले तथा कफ को निकालने वाले होते हैं।
ज्वार क्या है
ज्वार के कोमल दाने को भूनकर खाया जाता है। ज्वार की जड़ थोड़ी मधुर तथा रुचिकारक होती है और पित्तविकार तथा प्यास को खत्म करती है। इसके तने से मिले शक्कर पेट के लिए थोड़ी गरम तथा रुचिकारक होती है और जलन को खत्म करती है।
ज्वार विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का अच्छा स्त्रोत है। इसकी वजह से यह शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। यह कुछ खास प्रकार के कैंसर के खतरों को भी कम कर सकता है। साथ ही यह हृदय और मधुमेह रोगियों के लिए भी अच्छा विकल्प है।
ज्वार में विटामिन बी काफी उच्च मात्रा में मौजूद होता है, जो कि शरीर में सही मेटाबॉलिज्म, तंत्रिका विकास, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के लिये काफी जरूरी होता है। इसमें मैग्नीशियम की मात्रा होने की वजह से यह स्वस्थ दिल और मजबूत हड्डियों के लिये काफी लाभदायक है। इसमें प्रोटीन होने की वजह से, यह शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है।
96 ग्राम ज्वार में शरीर की दैनिक जरूरत का 20 प्रतिशत फाइबर होता है, जो कि ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है और वजन बढ़ने से रोकता है।
ज्वार के फायदे
ज्वार के सेवन से मिलती है ऊर्जा –
ज्वार कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर होती है। ये शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार उसमें वृष्य और बलकारक गुण होता है जो कि एनर्जी को बनाये रखने में मदद करता है। साथ ही शारीरिक ऊर्जा भी बरकरार रहती है।
मधुमेह को नियंत्रित करने में मददगार ज्वार-
ज्वार में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल आसानी से कंट्रोल रहता है। यदि मधुमेह रोगी इसे अपने आहार में शामिल करते हैं, तो यह ग्लूकोज के लेवल को नियमित रखने में मदद करता है।
ज्वार से हड्डियां मजबूत होंगी-
ज्वार की रोटी में मैग्नीशियम और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है जो हड्डियों की ताकत को बढ़ाता है और उन्हें मजबूत बनाता है। यह हड्डियों से जुड़ी समस्याओं को रोकने में मदद करता है।
किडनी के रोग में लाभदायक ज्वार-
ज्वार का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से किडनी के रोग ठीक होते हैं। 5-10 मिली ज्वार के तने के रस को पीने से किडनी के रोगों तथा गोनोरिया, पेशाब करने में दिक्कत जैसी परेशानी आदि में लाभ होता है। इससे घाव सूखता है। प्रदर रोग के दौरान ज्वार के भुने भुट्टों का सेवन करना चाहिये।
ज्वार से पीलिया का इलाज-
ज्वार के तने का रस 5 मिली सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है। ज्वार के भुट्टे को आग में भूनकर खाने से पीलिया, गोनोरिया, ल्यूकोरिया आदि में लाभ होता है।
लकवा में ज्वार का प्रयोग लाभदायक-
ज्वार के दानों को उबाल कर, इसका रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में एरण्ड तेल मिला लें। इसका लेप करने से लकवा में लाभ होता है।
सांसों की बीमारी में फायदेमंद-
ज्वार के भुने हुए फलों को गुड़ के साथ खाने से साँस फूलना तथा सांस की नली की सूजन आदि रोगों में लाभ होता है।
वजन कम करने में सहायक-
ज्वार को आप अपने खाने की सूची में जोड़ सकते है यदि आप अपना वजन नियंत्रित करना चाहते है क्योंकि ज्वार में फाइबर ज्यादा होने से ये पाचन को ठीक रखता है और शरीर से अवशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
हृदय स्वास्थ्य को बढ़ाता है-
ज्वार में मौजूद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और मैग्नीशियम कई तरह से हृदय स्वास्थ्य में योगदान करते हैं। आहार फाइबर कोलेस्ट्रॉल अणुओं से जुड़कर और शरीर से उनके उत्सर्जन को सुगम बनाकर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। कोलेस्ट्रॉल का कम स्तर हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है। एंटीऑक्सीडेंट हृदय प्रणाली को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाते हैं, जबकि मैग्नीशियम रक्तचाप को नियंत्रित करने और सामान्य हृदय ताल बनाए रखने में मदद करता है।
धतूरे के विष के असर को उतारता है ज्वार-
ज्वार के रस में चीनी तथा बराबर मात्रा में दूध मिला लें। इसे 20 मि.ली. मात्रा में सुबह, दोपहर तथा शाम पिलाने से धतूरे के विष का असर खत्म हो जाता है।
पाचन स्वास्थ्य का समर्थन-
ज्वार में फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण इसमें पाचन तंत्र को नियमित रूप से कार्य करने का गुण होता है। यह कब्ज को कम करता है और आंतों के स्वास्थ्य में सुधार करता है। इससे पाचन क्रिया अच्छे से काम करती है और शरीर हल्का महसूस होता है।
कान की बीमारी में ज्वार से फायदा-
ज्वार के रस को गुनगुना करके 1-2 बूंद कान में डालने से बहते कान की बीमारी में लाभ होता है।
आँख के रोग में फायदेमंद ज्वार का उपयोग-
ज्वार के आटे को काजल की तरह आँखों में लगाने से आँख के रोगों में लाभ होता है।
ग्लूटेन-मुक्त-
ज्वार स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है, जो इसे सीलिएक रोग या ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले व्यक्तियों के लिए एक आदर्श अनाज बनाता है। गेहूं, जौ जैसे कई आम अनाजों में ग्लूटेन होता है, जो असहिष्णु लोगों में पाचन संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ज्वार एक सुरक्षित और पौष्टिक विकल्प प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से समझौता किये बिना विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।
कैसे खाएं ज्वार-
यह एक सुपरफ़ूड मिलेट है (Superfood Jowar Sorghum) है। यह आमतौर पर चावल की तरह तैयार किया जाता है। ज्वार प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। इस तरह से यह मसल्स हेल्थ को भी फायदा पहुंचाता है। खाने से पहले इसे रात भर भिगोया भी जाता है। इससे यह मुलायम हो जाता है और सुपाच्य भी। इसे धीमी आंच पर नरम होने तक पकाएं। चपाती, बिस्कुट और अन्य पके हुए सामान बनाने के लिए ज्वार के आटे का उपयोग किया जा सकता है।
ज्वार या सोरघम, एक पोषण संबंधी पावर हाउस है जिसमें असंख्य स्वास्थ्य लाभ हैं। पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने से लेकर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने तक, सोरघम एक बहुमुखी अनाज है जिसे आसानी से विभिन्न व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है। इसकी ग्लूटेन-मुक्त प्रकृति और समृद्ध पोषक तत्व प्रोफ़ाइल इसे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व्यक्तियों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनाते हैं।
ज्वार के लाभों और उपयोगों को समझकर, आप इस प्राचीन अनाज को अपने आहार में शामिल करने के बारे में सूचित निर्णय ले सकते हैं। ज्वार के साथ आज ही प्रयोग करना शुरू करें और इसके अनगिनत स्वास्थ्य लाभों का अनुभव करें।
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