





जिस घर में नित्य प्रति गीता पाठ होता हो उस घर में दारिद्रय नहीं रहता, भगवान कृष्ण की कृपा से पारिवारिक सूख सम्पति में वृद्धि तथा पुत्र, पौत्र लाभ होता है।
गीता अनुष्ठान में सर्वप्रथम साधक को ताम्रपत्र पर अंकित ‘‘गीता यन्त्र’’ अवश्य ही स्थापित कर देना चाहिये। ये गीता यन्त्र मन्त्रसिद्ध प्राणप्रतिष्ठायुक्त तथा नीचे दिये गये चित्र के अनुसार होना चाहिये और इसकी पूजा चन्दन से करनी चाहिये। गीता साधना किसी भी दिन प्रारम्भ की जा सकती है, प्रातः ब्रह्म मुहुर्त सबसे उपयुक्त है, इसे अपने पूजा स्थान में स्थापित कर पंचोपचार पूजा सम्पन्न करनी चाहिये तथा चन्दन, तुलसी, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आचमन एवं ताम्बूल (सुपारी) का अर्पण करना चाहिये। प्रथम दिन साधक भक्तिपूर्वक गीता का पाठ अवश्य करे, जब एक बार प्रारम्भ करेंगे तो बार-बार पाठ करने की इच्छा उत्पन्न होगी, जो साधक संस्कृत पाठ नहीं कर सकते, वे इसके हिन्दी अनुवाद का पाठ भी सम्पन्न कर सकते है।
गीता यन्त्र स्थापित कर एक माला ‘‘ ऊँ नमः भगवते वासुदेवाय’’ मन्त्र का जप अवश्य करना चाहिये। जब गीता पाठ पूर्ण हो जाय तो साधक को मन्त्र प्रयोग करना चाहिये, मन्त्र प्रयोग में यह निश्चित है कि कम से कम तीन हजार मन्त्र जप से ही यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है और उसके पश्चात् प्रयोग किया जाना चाहिये।
स्थाने हृषीकेष तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्पनुरज्यते च।
रक्षांति भीतानि दिषो द्रवन्ति, सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसंघाः।।
(गीता 11/36)
इस श्लोक द्वारा जल को अभिमन्त्रित कर भूत-प्रेत ग्रसित व्यक्ति को पिला देने से भूत-प्रेत का निवारण होता है, रोगी को पिलाने से रोग नाश होता है। इस हेतु 108 बार गीता यन्त्र के आगे मन्त्र जप करना आवश्यक है तांबे का एक लोटा जल से भर कर रखे और एक माला मन्त्र जप करें और रोगी को जल पिला दें, निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
भूत-प्रेत रोग निवारण दीक्षा न्यौछावर 1800/-
गीता यन्त्र का पूजन कर इस मन्त्र का 108 बार प्रतिदिन जप करने से कैसी भी दरिद्रता हो कितने ही श्राप से ग्रसित व्यक्ति हो उसकी दरिद्रता दूर होती ही है।
मन्त्र
वायुर्यमोग्निर्वरूणः शशांक प्रजापतिस्त्वं प्रपिता महष्च।
नमो नमस्तेस्तु सहस्त्रकृत्वा पुनष्च भूयो¿पि नमो नमस्ते।।
(गीता 11/36)
दरिद्रता नाशिनी दीक्षा न्यौछावर 1800/-
यदि किसी बालक को नजर लग गई हो अथवा किसी ने कोई जादू, टोना-टोटका कर दिया हो अथवा कोई व्यक्ति प्रेत बाधा से ग्रसित हो तो निम्न मन्त्र का 108 बार नीम की डाली अपने हाथ में लेकर उस बालक को स्पर्श कराते हुये 108 बार जप करना चाहिये। इस प्रकार झाड़ने से वह बाधा दूर हो जाती है।
मन्त्र
स्वामिदेवः पुरूषः पुराण, स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम।
वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम, त्वया ततं विवश्मनन्तरूप।।
(गीता 11/36)
नजर दोष बाधा निवारण दीक्षा न्यौछावर 1800/-
गीता यन्त्र के आगे एक माला ‘ऊँ नमः भगवते वासुदेवाय’ तथा एक माला मन्त्र का जप करने से रूके हुये कार्य सिद्ध होते है तथा लक्ष्मी वृद्धि होती है, खर्च के अनुपात में आमदनी बढ़ती है।
मन्त्र
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमो¿स्तु सर्व एव सर्व।
अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्व समान्योषि ततोसि सर्वः।।
(गीता 11/36)
कार्य व्यापार वृद्धि लक्ष्मी दीक्षा न्यौछावर 1800/-
निम्न मन्त्र के अनुष्ठान से अधिकारी अथवा कोई भी व्यक्ति जो कि आप से अप्रसन्न है आपके कार्य पूरे नहीं करता है वह प्रसन्न होता है तथा आपको अपने कार्यो में सहयोग देता है।
मन्त्र
यच्वावहासार्थनसत्कृतोसि विहारषय्यासन भोजनेषु।
एकोधवाप्यायुत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामह्मप्रमेयम्।।
(गीता 11/36)
रोजगार प्राप्ति ईप्सितं दीक्षा न्यौछावर 1800/-
निम्न पांच प्रयोगों के अलावा गीता मन्त्र के अन्य बहुत से प्रयोग है, जिन्हें साधक नित्य प्रति सहज भाव से अवश्य कर सकते है, लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पहले तीन हजार मन्त्र जप कर मन्त्र को सिद्ध अवश्य किया जाय तभी भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, साधकों को चाहिये कि वे अपने घर में गीता की पुस्तक अवश्य रखें गीता का नित्य प्रति पाठ करें और अपने बालकों को भी यह अभ्यास डालें कि वे गीता अध्ययन की और रूचि लें, गीता तो वास्तव में कर्म प्रधान जीवन के सभी भागों के मूल विवेचन का महाग्रन्थ है।
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