





मृत्यु रूपी स्थितियों का संहार कर जो साधक को मोक्ष अर्थात् धन-वैभव-यश, ज्ञान, आरोग्य, आयु वृद्धि से आपूरित करते हैं, वही तो हैं त्रयम्बकेश्वर महामृत्युजंय महादेव! त्रयम्बकं अर्थात् तीनों लोकों के पिता सोम, चन्द्र, अग्नि तीनों मण्डलों के जनक सत, रज, तम तीनों गुणों के महेश्वर बुद्धि, अहंकार, मन तीन अग्नि गार्हपत्य, आहवनीय, दक्षिणाग्नि तीन देव ब्रह्मा, विष्ण, महेश और जगत् के तीन लोक स्वर्ग लोक, नरक लोक, पाताल लोक के स्वामी भगवान त्रयम्बकेश्वर ही हैं।
त्रयम्बकेश्वर स्वरूप में भगवान शिव मानव जीवन की मृत्यु पाश का शमन कर जन्म-मरण के बन्धन से मुक्ति प्रदान करते हैं, जिस सूर्य की किरणों से पककर अपने मूल बन्धन से उर्वारूक (ककड़ी) मुक्त होता है, उसी प्रकार शिवत्व को आत्मसात करने वाला व्यक्ति सभी सांसारिक समस्याओं से मुक्त हो जाता है।
इस संसार में कर्म फल देने के लिये ही सृष्टि होती है। व्यक्ति अपने जीवन में अनेक प्रकार के सुख और दुःख भोगता हुआ अन्ततः पूर्ण सृष्टि में विलीन हो जाता है। इसलिये भगवान शिव को प्रलय का देव कहा गया है जो साधक जीवन के सब दुःखों को हर लेते हैं, इसीलिये वे हर हैं और प्रार्थना में भी कहा जाता है- हर-हर महोदव अर्थात् जो सभी विपदाओं का हरण करने वाले हैं, वे ही तो महादेव हैं।
त्रयम्बकेश्वर महामृत्युजंय शिवाभिषेक दीक्षा परम पूज्य सद्गुरूदेव महातपोभूमि विश्वनाथ में सभी साधकों को प्रदान करेंगे, जिससे रक्षा, श्री, कीर्ति, कान्ति और आर्थिक सुदृढ़ता से युक्त जीवन में शिवत्व, गुरूत्व और शक्ति तत्व से आपूरित हो सकेंगे।
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