





क्यों होता है सिरदर्दः जब सिर के अन्दर दर्द-संवेदी संरचनाओं में अतिक्रियाशीलता होती हो या रक्त वाहिकाएं, मांसपेशियों, सिर और गर्दन की नसों से कोई कारण उत्पन्न होता है तब सिरदर्द होता है। यह मस्तिष्क की रासायनिक गतिविधि में होने वाले बदलावों का परिणाम भी हो सकता है। सिरदर्द का लक्षण तब दिखाई देता है, जब सिर के संवेदनशील नसों को कोई अन्य कारण उत्तेजित करता है।
जिसमें शराब के सेवन से होने वाला हैंगओवर (अत्यधिक नशा), ब्रेन टयूमर, खून के थक्के (Blood clots), मस्तिष्क में या उसके चारों ओर रक्तस्राव (Bleeding), कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता, मस्तिष्कघात (Concussion), निर्जलीकरण (Dehydration) काला मोतियाबिंद, बुखार, रात में सोते समय दांत पीसना, इन्फ्रलुएंजा, दर्द की दवा का अत्यधिक सेवन, घबराहट, दौरे आना, तनाव, मासिक धर्म के पहले, दौरान या उसके बाद हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण, पीठ और गर्दन की मांसपेशयों में तनाव के कारण, थकावट, भूख लगना, दर्द की दवाएं (जो लम्बे समय तक उपयोग कर बंद कर दी जाएं), शराब, कैफीन और सुगर की मात्रा में वृद्धि होना आदि कारण होते है।
सामान्य सिरदर्दः इसमें भौहों से ऊपर सिर के दोनों हिस्सों में सामान्य दर्द, दबाव या खि्ंचाव होता है, ऐसे दर्द में तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता तो नहीं होती है। इस प्रकार का सिरदर्द अक्सर होता रहता है। जो लोग अचानक होने वाले गंभीर दर्द का अनुभव करते हैं, उन्हें तुरंत चिकित्सकीय जांच करवानी चाहिए।
तनाव से सिरदर्द (Stress) : वर्तमान में तनाव से जुड़ा सिरदर्द सर्वाधिक होता है, यह सिरदर्द का सबसे सामान्य रूप है। इस तरह का सिरदर्द में दिन के मध्य में धीरे-धीरे शुरु होता है। यह सिरदर्द आवधिक (Episodic) होता है, जो कुछ घंटे के लिए बना रहता है और कई दिनों तक लगातार होता रहता है। तनाव का सिरदर्द दीर्घकालिक भी हो सकता है, जो 15 दिन से एक महीने या इससे अधिक 3 महीने की अवधि के लिए हो सकता है। इसमें सिर के दोनों हिस्सों में दबाव और हल्के से मध्यम सिरदर्द होता है। यह दर्द गर्दन और सिर के पिछले हिस्से से चारों ओर फैलता है।
माइग्रेन (Migraine) : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार माइग्रेन दुनिया भर में अक्षमता (Disability) के कारण काम न कर पाने का छठवां सबसे बड़ा कारण है। माइग्रेन कुछ घंटों से लेकर 2 से 3 दिनों तक रहता है। यह सिर के किसी भी हिस्से में मध्यम से तीव्र दर्द पैदा करता है। इसमें मतली उल्टी, प्रकाश-ध्वनि से संवेदनशीलता हो सकती है।
क्लस्टर (Cluster) : क्लस्टर सिरदर्द आम तौर पर 15 मिनट से 3 घंटे तक रहता है। यह अचानक से लेकर आठ बार प्रतिदिन, कुछ सप्ताह या महीनों के लिए हो सकता है। यह बहुत तीव्र होता है, जो सिर के एक तरफ आंख-कान के आस-पास होता है। चेहरे के एक तरफ स्थित आंख का लाल होना और पानी निकलना, नाक का बहना और पलक का सूख जाना या सूजन भी हो सकता है।
साइनस सिरदर्द (Sinus) : साइनस में सूजन या संक्रमण के कारण चेहरे, माथे और आंखों के पीछे दबाव और सूजन महसूस की जाती है।
रीबाउंड सिरदर्द (Rebound) : दर्द के लक्षणों का इलाज करने वाली दवा का अत्यधिक मात्रा में उपयोग करने से रीबाउंड सिरदर्द होता है। यह दर्द प्रातः से रात्रि तक बना रहता है। दर्द की दवा से इसमें आराम तो मिलता है, लेकिन दवा का असर खत्म होते ही भयंकर दर्द प्रारम्भ हो जाता है। इसमें गर्दन में दर्द, बैचेनी, नाक का बंद होना और नींद में कमी आना आदि है। रिबाउंड सिरदर्द के अनेक लक्षण होते हैं और इसका दर्द हर दिन अलग-अलग हो सकता है।
थंडरक्लैप सिरदर्द (Thunderclap headaches) : यह सबसे गंभीर और बुरा सिरदर्द बताया गया है। अचानक होने वाला यह सिरदर्द एक मिनट से भी कम समय में अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है और 5 मिनट से अधिक समय तक रहता है।
रीढ़ सम्बन्धित सिरदर्द (Spinal) : यह सिरदर्द जो स्पाइनल टेप कमर के छिद्र (Lumbar puncture) से उत्पन्न होता है। इसमें रीढ़ की हड्डी के कॅालक से रिसाव होता है, जिससे खड़े होने पर भयंकर सिरदर्द होने लगता है।
एलर्जी सिरदर्द (Allergy) : पर्यावरण में एलर्जी पैदा करने वाले तत्व नासिका मार्ग और साइनस ऊतक में जलन पैदा कर देते हैं, जिसके कारण सिरदर्द हो सकता है।
सिरदर्द कैसे रोकें : खूब पानी पिएं, नियमित रूप से पौष्टिक-सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करें, मसालेदार-तली हुयी चीजों से परहेज करें, अत्यधिक शोर से बचें। दर्द की दवाओं का सेवन कम से कम करें, शराब ना पीएं, तम्बाकू उत्पादों को सिरदर्द का कारण बताया जाता है, इन उत्पादों से दूर रहने पर सिरदर्द में कमी आती है और सम्पूर्ण स्वस्थ की रक्षा भी होती है।
नियमित समय पर पर्याप्त नींद लें। जरूरत से ज्यादा ना सोंचे, तनाव को कम करने का प्रयास करें। मोबाईल फोन भी सिरदर्द का कारण होता है, इसलिए मोबाईल पर कम से कम बात करने का प्रयास करें।
सिरदर्द दूर करने के घरेलू उपायः सामान्य व नियमित सिरदर्द को दूर करने का सबसे उचित उपाय उसके कारण को ढूंढ कर उसे दूर करना है। नाड़ी शोधन प्राणायाम व भ्रामरी प्राणायाम और अनुलोम-विलोम के बाद बीस मिनट तक ध्यान करें, यह सिरदर्द के लिए अत्यंत प्रभावशाली उपाय है।
एक्यूप्रेशर द्वाराः अपनी दोनों हथेलियों को सामने कर एक हाथ से दूसरे हाथ के अंगूठे और तर्जनी के बीच की जगह पर हल्के हाथ से मसाज करें, यह प्रक्रिया दोनों हाथ में दो से चार मिनट तक दोहराएं।
‘‘ किसी भी समस्या का मूल उपचार उसे उत्पन्न करने वाले कारण में निहित होता है, इसलिए प्रयास सदा उस कारण को दूर करने के लिए होना चाहिए, तब ही मन, मस्तिष्क और शरीर स्वस्थ-सुदृढ़ बन पाता है ’’
परम पूज्य सद्गुरुदेव कैलाश श्रीमाली जी
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