





योग का प्रयोग आंतरिक विज्ञान के रूप में भी किया जाता है, जो विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं का सम्मिलन है, जिसके माध्यम से मनुष्य शरीर एवं मन के बीच सामंजस्य स्थापित कर आत्मा साक्षात्कार को प्राप्त करता है। योग अभ्यास का उद्देश्य सभी त्रिविध प्रकार के दुःख से आत्यन्तिक निवृत्ति प्राप्त करना है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति जीवन में पूर्ण स्वतन्त्रता तथा स्वास्थ्य प्रसन्नता एवं सामंजस्य का अनुभव प्राप्त कर सके।
योग विद्या का उद्भव हजारों वर्ष प्राचीन है, श्रुति परम्परा के अनुसार भगवान शिव योगविद्या के प्रथम आदिगुरू, योगी या आदियोगी हैं। हजारों- हजार वर्ष पूर्व हिमालय में कांतिसरोवर झील के किनारे आदियोगी ने योग का गूढ़ ज्ञान पौराणिक सप्तऋषियों को दिया था। इन सप्तऋषियों ने इस अत्यन्त महत्त्वपूर्ण योगविद्या को एशिया, मध्यपूर्व, उत्तरी अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिका सहित विश्व के अलग-अलग भागों में प्रसारित किया। अत्यन्त रोचक तथ्य यह है कि आधुनिक विद्वान सम्पूर्ण पृथ्वी की प्राचीन संस्कृतियों में एक समानता मिलने पर अचंभित हैं। वह भारत भूमि ही है, जहाँ पर योग की विद्या पूरी तरह अभिव्यक्त हुई है। भारतीय उपमहाद्वीपों में भ्रमण करने वाले सप्तऋषि एवं अगस्त्य मुनि ने इस योग संस्कृति को जीवन के रूप में विश्व के प्रत्येक भाग में प्रसारित किया।
योग ने मानवता के मूर्त और आध्यात्मिक दोनों रूपों को महत्त्वपूर्ण बनाकर स्वयं को सिद्ध किया है। सिंधु सरस्वती घाटी सभ्यता में योग साधना करती अनेकों आकृतियों के साथ प्राप्त ढेरों मुहर एवं जीवाश्म अवशेष इस बात का प्रमाण हैं कि प्राचीन भारत में योग का अस्तित्व था। सरस्वती घाटी सभ्यता में प्राप्त देवी एवं देवताओं की मूर्तियां एवं मुहरें तंत्र योग का संकेत करती हैं। वैदिक एवं उपनिषद परंपरा, शैव, वैष्णव तथा तांत्रिक परंपरा, भारतीयदर्शन, रामायण एवं भगवद्गीता समेत महाभारत जैसे महाकाव्यों, बौद्ध एवं जैन परंपरा के साथ – साथ विश्व की लोक विरासत में भी योग मिलता है। योग का अभ्यास पूर्व वैदिक काल में भी किया जाता था। महर्षि पतंजलि ने उस समय के प्रचलित प्राचीन योग अभ्यासों को व्यवस्थित व वर्गीकृत किया और इसके निहितार्थ और इससे संबंधित ज्ञान को पातंजलयोगसूत्र नामक ग्रन्थ में एक क्रमबद्ध प्रकार से व्यवस्थित किया है।
योग व्यक्ति के शरीर, मन, भावना एवं ऊर्जा के स्तर पर कार्य करता है। इसे व्यापक रूप से चार वर्गों में विभाजित किया गया है। कर्मयोग मे हम शरीर का प्रयोग करते हैं, ज्ञानयोग मे हम मन का प्रयोग करते हैं, भक्तियोग में हम भावना का प्रयोग करते हैं और क्रियायोग में हम ऊर्जा का प्रयोग करते हैं। योग की जिस भी प्रणाली का हम अभ्यास करते हैं, वह एक दूसरे से आपस में अधिक मीली हुई होती है। योग आसन का अभ्यास शरीर एवं मन में स्थायित्व लाने में सक्षम हैं, आसन का अभ्यास महत्त्वपूर्ण समय सीमा तक मनोदैहिक विधि पूर्वक अलग-अलग करने से स्वयं के अस्तित्व के प्रति दैहिक स्थिति एवं स्थिर जागरूकता बनाए रखने की योग्यता प्रदान करता है। प्राणायाम श्वास प्रश्वास प्रक्रिया का सुव्यवस्ति एवं नियमित अभ्यास है। यह श्वसन प्रक्रिया के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने एवं उसके पश्चात् मन के प्रति सजगता उत्पन्न करने तथा मन पर नियंत्रण स्थापित करने में सहायता करता है।
11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस संकल्प का मसौदा प्रस्तुत किया गया। मसौदे को व्यापक समर्थन मिला जिसके अंतर्गत 177 देश इस मसौदे के प्रस्तावक बने जो संयुक्त राष्ट्र महा सभा के इतिहास में अभी तक हुए किसी भी संकल्प में सर्वाधिक प्रस्तावकों की संख्या है।
27 सितम्बर 2014 को भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में विश्व समुदाय से एक अंतर्राष्ट्रिीय योग दिवस को अपनाने की अपील की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘‘योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है, मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है, विचार संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह केवल व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन-शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आयें एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने की दिशा में काम करते हैं।’’ 11 दिसम्बर 2014 को अमेरिका में स्थित संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सर्वप्रथम इसे 21 जून 2015 को पूरे विश्व में ‘अन्तराष्ट्रीय योग दिवस’ के नाम से मनाया गया।
भारत में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े पैमाने पर मनाया गया जिसकी तैयारियाँ बड़े जोर-शोर से सरकार कर रही थी। योग दिवस का मुख्य समारोह दिल्ली के राजपथ पर हुआ जिसमें खुद प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने शिरकत की। प्रधानमन्त्री ने राजपथ पर लगभग 36,000 लोगों के साथ योग किया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर राजपथ के मंच को साझा करने के लिए प्रधानमन्त्री के साथ कुल छह अन्य लोगों को मौका मिला प्रधानमन्त्री कार्यालय ने चार योग गुरु जिसमें योग गुरु रामदेव, एच आर नागेन्द्र, श्रीमती हंसाजी जयदेव योगेन्द्र और स्वामी आत्माप्रियनन्दा को शामिल किया गया साथ ही आयुष मन्त्री श्रीपद नाइक और आयुष मन्त्रालय सचिव निलंजन सान्याल को मंच पर बैठने को मंजूरी मिली थी। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का गणतंत्र दिवस समारोह जैसा कवरेज दूरदर्शन द्वारा किया गया था।
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