





माता पार्वती ने 108वीं बार जब जन्म लिया और हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में घोर तपस्या की। पुराणों की कथा के अनुसार, श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुये और उन्हें दर्शन दिये साथ ही उन्हें अपनी पत्नी बनाने का वरदान दिया था। अर्थात् आत्मीय भाव से कोई भी स्त्री शिव की अभ्यर्थना करती है तो मनसा स्वरूप में अवश्य ही कामना पूर्ति होती ही है। झूला-झूलने का भाव चिन्तन यही है कि गृहस्थ जीवन निरन्तर आनन्द के साथ व्यतीत होता रहे।
सुहागिन स्त्रियों के लिये हरियाली तीज बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक यह त्योहार पति के प्रति पत्नी के समर्पण का प्रतीक हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मनोकामनायें पूरी होती हैं।
हिन्दू धर्म में अनेक व्रत, उपवास बताये गये हैं, व्रत उपवास करने से शारीरिक, मानसिक, आत्मिक शुद्धि संभव हो पाती है। साथ ही मनोकामनाओं की प्राप्ति के लिये भक्त और ईश्वर का तारतम्य जुड़ पाता है। हिन्दू संस्कृति में अधिकांश व्रत सौभाग्य से सम्बन्धित होते हैं अर्थात् हर स्वरूप में जीवन की दुर्गति को समाप्त करना और गृहस्थ जीवन को श्रेष्ठमय बनाना है और यह कार्य स्त्री ही श्रेष्ठ रूप में करती है।
इसलिये स्त्रियों का जीवन धार्मिक कार्य, नित्य पूजन, उपवास, व्रत आदि की क्रियाओं में अत्यधिक रचा-बसा होता है। अपने प्राकृतिक स्वभाव के कारण स्त्रियों को इन धार्मिक क्रियाओं में संतुष्टि, संतोष व आनन्द भी प्राप्त होता है।
अगर किसी लड़की की शादी में देरी हो रही है, अगर किसी लड़की की शादी में बार-बार बाधायें आ रही हैं या बात बनते-बनते बिगड़ जाती है, या इच्छित वर से विवाह में परेशानी हो, प्रेम विवाह में बाधायें हो तो हरियाली तीज के दिन विधि-विधान के साथ मां गौरी की पूजा अर्चना करें। साथ ही यह पर्व विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने घर के सुख-समृद्धि के लिये और सुहागन के रूप में जीवन बिताने के लिये मनाती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो सुहागन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं, उनको सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
इस विशेष पर्व की दिव्यता-चैतन्यता को सरलता व सहजता से आत्मसात कर जीवन को अखण्ड सुहाग सौभाग्य, सुयोग्य वर-वधु प्राप्ति, कुल-वंश वृद्धि, सुसंस्कार संतान, कार्य-रोजगार-व्यापार, यश-वैभव, सुख-समृद्धि, धन लक्ष्मीमय सुस्थितियों से सरोबार करने हेतु सर्व सुखदा गृहस्थ जीवन पूर्णता प्राप्ति गौरी शंकर दीक्षा ग्रहण करें। इस विशिष्ट दीक्षा को स्त्री-पुरूष सभी ग्रहण कर सकते हैं। इस दीक्षा से स्त्रियों को उक्त सुस्थितियां प्राप्त होगी। वहीं पुरूष वर्ग पौरूषता, रस, ओज, कार्य-रोजगार-व्यापार, सुयोग्य वधू प्राप्ति के लिये ग्रहण करना श्रेष्ठ रहेगा।
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