





श्रावण मास जीवन की सभी स्थितियों को नियंत्रित करने में समर्थ है। उदाहरण के लिये परिवार के मुखिया विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ आय प्राप्ति के लिये चिन्तित रहता है, पत्नी अपने अक्षुण्ण सौभाग्य की कामना करती है, किशोर आयु-वर्ग के बालक-बालिकाओं को विद्या प्राप्ति की समस्या होती है, वहीं युवा वर्ग के साथ विवाह, सुखद गृहस्थ जीवन, शत्रुनाश, राज्य-सम्मान इत्यादि स्थितियों को श्रावण मास में नियंत्रित करना संभव है।
जो जीवन में निरन्तर चलते रहते हैं उनका भाग्य भी अग्रसर रहता है और वही जीवन में पूर्ण रूपेण आयु वृद्धि, धर्म, अर्थ, यश, सौभाग्य व लक्ष्मी की निश्चित रूप से प्राप्ति करता है। श्रेष्ठ गुरू की क्रिया यही रहती है कि इन सभी सुस्थितियों से शिष्य को पूर्णता प्रदान करें। जिससे वे गृहस्थ जीवन का पालन करते हुये भी अपनी सभी कामनाओं को पूर्णता से प्राप्त कर शक्ति तत्व और शिवत्व को आत्मसात कर पूर्ण हो सकें।
जीवन की श्रेष्ठता तो तभी संभव है, जब व्यक्ति का समाज में एक वर्चस्व हो, जहां उसकी बातों को ध्यान पूर्वक सुना जाता हो, सम्मान पूर्वक ग्रहण किया जाता हो और धन, ऐश्वर्य से भी सम्पन्न हो, क्योंकि धन-सम्मान आदि आज के भौतिक जीवन में महत्वपूर्ण एवं आवश्यक बन गये हैं। भगवान शिव के कुबेराधिपति स्वरूप की साधना करने से साधक रावण के समान अतुलनीय धनवान, ऐश्वर्यवान और वैभवशाली होता है और लक्ष्मी अपने ‘श्री’ स्वरूप में भगवान शिव के साथ अखण्ड रूप से विद्यमान होती है। और सांसारिक जीवन की भी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ लक्ष्य प्राप्ति के लिये क्रियाशील बनाये रखती है।
अतः उक्त सुस्थितियों से अपने जीवन को सरोबार करने हेतु इस श्रावण मास में सद्गुरूदेव जी द्वारा इस विशिष्ट श्रावण शक्ति शिवोहम् धनदा दीक्षा अवश्य ही ग्रहण करें। जिससे आपके जीवन में सर्व स्वरूप में पूर्णता आ सके।
उक्त दीक्षा श्रावण मास सोमवार जो कि दिनांक 14 जुलाई 2025 को सम्पन्न करे, साधना प्रक्रिया जुलाई की पत्रिका के पृष्ठ संख्या 02 पर अंकित है।
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