





व्यक्ति अपने अच्छे-बुरे कर्मों को सोचकर एक नये चिंतन, नये विचारों को अपने मानस में संजोते हुये ‘नववर्ष’ का स्वागत करता है, जिससे कि वह अपने नये विचारों को, अपनी कल्पना को नये ढंग से विस्तार देकर एक नवीन जीवन की पुष्टि कर सके, जिससे कि उसका आने वाला समय, नया वर्ष खुशियों से भरा हो, मंगलमय हो, उत्सवमय हो।
नववर्ष का अर्थ ही जीवन शैली में नवीनता, नया उत्साह और बल भर देना है, जिससे कि यह ‘नया वर्ष’ हमारे लिये उमंग और उत्साह से भरा हुआ हो और यह उमंग, जोश, बल, उत्साह, आनन्द, श्रेष्ठता हमें मिल सकती है इस ‘‘सर्व कार्य सिद्धि नववर्ष सर्वोन्नति प्राप्ति दीक्षा’’ के माध्यम से, जो हमारे जीवन को पूर्णता, श्रेष्ठता, अद्वितीयता प्रदान करने वाली है।
दीक्षा के फलस्वरूप व्यक्ति के शरीर में एक विशेष प्रकार की तेजस्विता और दिव्यता आ जाती है, जिस तेज और बल के माध्यम से वह पूरे वर्ष भर सफलता प्राप्त करता है और तब उसके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई न्यूनता नहीं रह जाती, क्योंकि इस नववर्ष के दिव्य, स्वर्णिम क्षणों का उचित प्रयोग कर वह उस ऊर्जा शक्ति के माध्यम से अपने जीवन के भौतिक और आध्यात्मिक दोनों पक्षों में सफलता प्राप्त कर लेता है जो मानव जीवन का हेतु होता है और यही मानव जीवन की श्रेष्ठता है, अद्वितीयता है, सम्पूर्णता है।
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