





शुभाशीर्वाद
जीवन में शांति का तात्पर्य जीवन के धर्म, अर्थ, काम की पूर्णता और इन्हीं क्रियाओं की प्राप्ति के लिए व्यक्ति निरंतर कर्म करता रहता है और आवश्यक नहीं की कर्म के माध्यम से ही जीवन में सब कुछ परिस्थितियां अनुकूल हो जाए और जब ऐसा नहीं हो पाता तो व्यक्ति व्यथित, परेशान और अशांत सा हो जाता है और वह जीवन भर शांति की प्राप्ति के लिए मृग मरीचिका की तरह भटकता रहता है जब कि वास्तव में शांति प्राप्त करने का एक ही माध्यम दुनियां में है और वह यह है कि जो व्यक्ति अपनी बैचेनी अशांति को शांति से स्वीकार कर लेता है तो फिर उसकी अशांति विदा हो जाती है क्योंकि अशांति जिस ढंग से व्यक्ति जीवन में पैदा करता है उसी तरह से अशांति को विदा करने की क्रिया का ज्ञान होना आवश्यक है अर्थात् व्यक्ति जीवन में अनेक अनेक इच्छाएँ कामनाएं पालता रहता है और कामनाएँ पूरी न होने पर जीवन में अशांतता बढ़ती रहती है। और व्यक्ति अशांतता को स्वीकार नहीं करता और स्वीकार न करना ही अशांति की जड़ है। इसीलिए संत महात्मा कहते हैं कि जीवन की तीव्र इच्छाऐँ धर्म, अर्थ, काम की प्राप्ति को पूर्ण शांतता के साथ जीवन में उतारने की क्रिया करनी चाहिए। जिस तरह से नदी पार करनी होती है तो जब नदी का वेग मंद होता है तब पार करना उचित रहता है क्यों कि तीव्र वेग में निकलना चाहें तो फिर नहीं निकल सकते और यदि निकलेंगे भी तो पानी के साथ बहते हुए भंवर में ही समा जाएंगे। टीक ऐसे ही संसार रूपी नदी को पार करना हो तो निरन्तर पुरूषार्थ रूपी क्रिया में सलंग्न रहना चाहिए। अर्थात जीवन में उतावलापन आपा-धापी हाय-तौबा और क्रोध के द्वारा जीवन की दिशा को श्रेष्ठता ओर पूर्णता की और गतिशील नहीं किया जा सकता और जीवन में दशा उसी की खराब होती है जिसे सही दिशा नहीं मिलती और सही दिशा के लिए जीवन में पुरूषार्थ का भाव बना रहे निरंतर बना रहे और सही गुरू अपने साधक और शिष्यों को पुरूषार्थ रूपी चेतना और चिंतन दे कर निरंतर निरंतर जीवन में श्रेष्ठता और पूर्णता प्राप्ति की की ओर अग्रसर करता है।
दीपावली महोत्सव की आपको और आपके पूरे परिवार को सद्गुरू रूपी शक्ति का पूर्ण आशीर्वाद और मंगल कामना प्रदान करते हुए हर्ष हो रहा है यह महोत्सव निश्चिंत् रूप से आपके जीवन में पूर्ण मंगलकारी और मनोवांछित इच्छाओं से परिपूर्ण रूप से फलीभूत होगा । आपके जीवन में निरंतर और निरंतर प्रकाश, उजास, नवीन चेतना और शुभ चिंतन का विस्तार हो सकेगा। ऐसा ही यह मंगलमय पर्व आपके जीवन में अक्षुण बना रहे ऐसी ही मैं आप सभी के लिए हृदय भाव से कामना और आशीर्वाद प्रदान करता हूं।
इस दीपावली से यह संकल्प लें कि प्रत्येक माह अपनी स्वयं की वाणी और क्रिया के माध्यम से दो पत्रिका सदस्य निश्चिंत रूप से बनायेंगे ही क्योंकि आपकी वाणी ही मेरी वाणी है और मैंने सदैव सदैव कर्मशील और क्रियाशील बनाने की चेतना प्रदान की है और यह कार्य आप सहज भाव से निश्चिंत रूप से कर सकते हैं इसके लिये यह संकल्प सहज भाव से लें।
संकल्प ऐसा न हो कि कोई आपको जबरदस्ती हाथ में जल ड़ालकर और कसम दिलाकर जबरदस्ती कार्य करने के लिए बाध्य करें। इस तरह के संकल्प लेने से संकल्पकर्त्ता और उसके परिवार में मधुर वातावरण नहीं रहता क्योंकि जब संकल्प में ही जोर जबरदस्ती और दबाव से प्रेरित है तो फिर परिवार में उन्नति, प्रगति, सुचिता और श्रेष्ठता नहीं आ सकती जबकि वास्तव में श्रेष्ठ स्थितियां परिवार में तभी आती है जब सहजता प्रसन्नजता तथा आत्मीय भाव से युक्त संकल्प के साथ क्रिया प्रारंभ की जाती है।
आपके स्नेह और आत्मीय भावना और चिंतन के फल स्वरूप निरंतर शिविरों की श्रृंखला पूरे भारतवर्ष और विदेशों में हो रही है । इसके पीछे मेरा मंन्तव्य यही है की मैं आपसे निरंतर संपर्क में रहूं अर्थात् आप मेरे ही परिवार के सदस्य के रूप में रहें। आपके जीवन की प्रतिकूल और विषम स्थितियों को साधना और चिंतन के माध्यम से समाप्त कर सकूं और इसी जीवन में आपको सफलता के उच्चतम सोपानो तक पहुंचा सकूं।
आपकी इसी प्रसन्नता और आत्मीय भाव स्वरूप देश के कोने कोने में छोटे छोटे गांवों और कस्बों में भी साधक और शिष्य शिविरों का आयोजन के लिए कार्य करने के लिए आगे आ रहे हैं और सद्गुरूदेव की वाणी और चेतना के प्रसार में सहभागी बन रहे हैं।
कार्तिक पूर्णिमा और गृहस्थ संन्यास महोत्सव का पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करते हुए हर्ष होता है कि आपके आने वाला जीवन हर दृष्टि से पूर्णमद पूर्णमिद: की ओर अग्रसर हो सके इस हेतु पूजा अर्चना युगल रूप में साथ में करने से निश्चिंत रूप से परिवार में श्रेष्ठ अभिवृ्धि प्राप्त होती है और इससे भी अधिक श्रेष्ठता अपने सद्गुरू से माया मोहिनी शक्तिपात दीक्षा प्राप्त करने से नूतन वर्ष हर दृष्टि से धन-धान्य, आरोग्यता और सम्मोहन आकर्षक युक्त हो सके। जीवन के प्रत्येक क्षण में धवलता, उज्ज्वलता श्रेष्ठता और सम्पन्नहता प्राप्त हो सकेगी।
पुनः मैं आपको हृदय भाव से कोटी कोटी आशीर्वाद और मंगल कामना प्रदान करता हूं।
आपका अपना
कैलाश चन्द्र श्रीमाली
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