





मान्यता है कि भगवान सदाशिव पृथ्वी लोक मे प्रवास काल में मैथिल कोकिल कवि विद्यापति के भावों से भावविभोर हो कर महादेव ने उगना रूप में चाकर बन कर अपना स्वरूप दिखाया इसी नाम से प्रसिद्ध उगना महादेव स्थान दक्षिण में अवस्थित है। शिवरात्रि और वैशाख शुक्लपक्ष के प्रदोष पर्व पर लाखों भक्त आकर उगना महादेव की पूजा अर्चना कर अपने जीवन को शिवगौरी मय बनाने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दिव्य उगना मंदिर के उत्तर में समरमाथा पर्वत श्रृँखलाएं साधक संन्यासी और पर्यटकों को अपनी ओर सम्मोहित करती है।
सद्गुरूदेव के वचनानुसार सिद्धाश्रम दिवस जैसे अतुलनीय अवसर पर शिविर हेतु ऐसे स्थान का चयन किया है जो कि उगना महादेव और शक्ति स्वरूपा छिन्नमस्ता चेतन्य रूप में विराजमान है। जहाँ शिव और शक्ति साथ-साथ रहती है उस स्थान पर साधना पूजा करने से मनुष्य पुरूषोतम मय बनने की ओर अग्रसर होता है जिससे जीवन की मलिनता जीर्ण-शीर्ण स्थितियां, दरिद्रता को पूर्ण रूपेण समाप्त कर साक्षीभूत शिव-शक्ति रूप में सिद्धाश्रम के दर्शन कर अपने जीवन को भौतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से परिपूर्ण बना सकता है। छिन्नमस्ता नारायण सिद्धाश्रम शक्ति साधना शिविर का आयोजन 21-22 मई 2013 को उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रांगण लौकहा, जिला- मधुबनी, (बिहार)
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