





कलियुग में केवल एक मात्र काली महाविद्या ही शीघ्र सिद्ध होने वाली हैं। और साधक की सभी दुर्गति को पूर्णता से समाप्त करने में सक्षम हैं। इसीलिए शास्त्रों में कहा गया हैं कि-
कलौ काली कलौ काली कलौ काली तू केवला
कलौ काली कलौ काली कलौ काली तू सिद्धिदा
कामः- सभी प्रकार की इच्छा या कामना की पूर्ति।
कलाः-सभी प्रकार के भोगों व आनन्द की परिपूर्णता
कालीः- जीवन की दुर्गति व पापों से मुक्ति और पूर्ण शक्ति तत्व से साधक युक्त होता हैं।
अतः यह कामकलाकाली विद्या, साधक के छोटी-बड़ी सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली कामधेनु तुल्य हैं। यद्यपि काली के असंख्य रूप हैं, फिर भी साधकों द्वारा प्रमुख रूप से काली के स्वरूप ‘भद्रकाली’ ‘श्मशानकाली’ ‘महाकाली’ ‘कामकला काली’ ‘दक्षिणकाली’ आदि की साधना श्रेष्ठतम मानी गई है।
महाकाली अत्यन्त तीक्ष्ण साधना मानी गई है, जबकि ऐसा नहीं है, काली की स्तुति, साधना तीक्ष्ण व सौम्य दोनों रूपों में की जाती है, प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर, स्वच्छ सफेद वस्त्र धारण कर दक्षिण दिशा की ओर मुह कर बैठ जाये, संक्षिप्त गणेश, गुरु पूजन सम्पन्न करें सामने बाजोट पर कामकलाकाली यंत्र को स्थापित कर, अक्षत, पुष्प, कुंकुम से पूजन कर अपने दायें हाथ में जल लेकर विनियोग करें।
विनियोगः-
अस्य श्री कामकालाकाली मन्त्रस्य महाकाल ऋषि,
बृहती छदः कामकलाकाली देवता, क्लीं बीजं हूं
शक्तिः, सर्वार्थसिद्धये जपे विनियोगः। जल छोड दें
ध्यान
शवारूढ़ां महाभीमां घोरदंष्ट्रां हसन्मुखीम्
चतुर्भजां खड्गमुण्डबराभयकरां शिवाम्
मुण्डमालाधरां देवीं ललजिह्नां दिगम्बरीम्
एवं ध्यायेत् कामकालीं श्मशानालय वासिनीम्
काली की प्रमुख पीठ शक्तियां का पूजन करें।
यंत्र पर चारों ओर नौ कुंकुंम की बिन्दियां लगाते हुए निम्न क्रम उच्चारण करें।
मम ऊँ जयायै नमः। ऊँ विजयायै नमः। ऊँ अजितायै
नमः। ऊँ अपराजितायै नमः। ऊँ नित्यायै नमः। ऊँ
विलासिन्यै नमः। ऊँ दोग्ध्रयै नमः। ऊँ अघोरायै नमः।
ऊँ मंगलायै नमः। पूर्णाय कालीकायै नमः।
यंत्र पूजन के पश्चात् निम्न मंत्र की दुर्गति विनाशक कामकला माला से 5 माला दो दिन तक जाप करें।
जाप के बाद समस्त सामग्री नदी में विसर्जित कर दें।
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