





विश्वामित्र ने तो यहां तक कहा है- बाकी नौ महाविद्याओं का भी समावेश मांतगी साधना में स्वतः ही हो गया है। चाहे हम अन्य शक्ति साधनाएं न भी करें और केवल मांतगी साधना को ही सम्पन्न कर लें तो, तो भी अपने आप में पूर्णता प्राप्त हो सकती हैं।’’ इसीलिए तो शास्त्रों में मांतगी साधना को सृष्टि शक्ति का चिंतन कहा हैं।
मातंगी मेवत्वं पूर्ण, मातंगी पूर्णत्व उच्चते अर्थात् मातंगी एकमात्र श्रेष्ठतम साधना है जो पूर्णता दे सकती है। मातंगी शब्द जीवन के प्रत्येक पक्ष को उजागर करने की क्रिया का नाम है, जिससे जीवन के दोनों ही पक्षों को पूर्णता मिलती है, विशेष रूप से जीवन के भौतिक पक्ष को पूर्ण आनन्दमय बनाने के लिए ही की जाती है।
साधना के लाभ- भगवती मातंगी के मंत्र साधना से गृहस्थ सुख की प्राप्ति होती है। तो इस साधना से पति-पत्नी के मध्य में सम्बन्ध मधुर हो जाते हैं। साधक का कुटुंब सुख, पुत्र, पुत्रियों, पत्नी, स्वास्थ्य, यश, कीर्ति पूर्णता आदि सभी कुछ प्राप्त होता है, जिससे उसका गृहस्थ जीवन पूर्ण माना जा सकता हैं।
यह साधना वस्तुतः रस एवं सौन्दर्य की साधना है इसको सम्पन्न करने से व्यक्ति के अन्दर सम्मोहन एवं सौन्दर्य व्याप्त हो जाता है, जिसके प्रभाव से लोग उससे आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाते। जीवन में ऐश्वर्य की पूर्ण प्रधानता हो जाती है। स्वास्थ्य, आयु, धन, भवन सुख, वाहन सुख, राज योग, यात्राएं और विविध इच्छाओं की पूर्ति सब कुछ तो मातंगी अपने साधक को प्रदान करती ही हैं।
साधना विधाानः- प्रातः काल उठकर स्नान करने के पश्चात् ‘दैनिक साधना विधि’ से संक्षिप्त गणपति और गुरु पूजन सम्पन्न करें। तत्पश्चात् दक्षिणाभिमुख होकर बैठ जाएं। सर्वप्रथम ‘रस सौन्दर्य प्रणीत मातंगी यंत्र’ को हाथ में लेकर जल से स्नान कराएं, तत्पश्चात् उसे पोंछ कर किसी ताम्र पात्र में स्थापित करें। यंत्र का कुंकुंम अक्षत से पूजन करें, तथा धूप-दीप प्रज्ज्वलित करें।
दोनों हाथ जोड़कर भगवती मांतगी का ध्यान करें।
श्यामांगी शशिशेखरां त्रिनयनां रत्न सिंहासन
स्थितताम् वेदैर्बाहु दण्डैरसिखेटक पाशांकुशा
धराम् नानारत्ना विभूषितां त्रिजगतां धात्रीं स्फुर
लोचनाम् वंदे सुन्दर पद्मपादयुगलां मातंगी
इसके बाद ‘सर्व सम्मोहक मातंगी माला’ से निम्न दशाक्षर मंत्र की 5 माला जाप करें।
साधना समाप्ति के बाद गुरु आरती और शिव आरती सम्पन्न कर अगले दिन साधक यंत्र व माला को नदी में विसर्जित कर दें। इस साधना के बाद निश्चय ही साधक को भगवती गौरी लक्ष्मी स्वरूप मांतगी की कृपा प्राप्त होती है।
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