





शक्ति ही सब कुछ है। शक्ति के बिना हम न सोच सकते हैं, न बोल सकते हैं, न हिल-डुल सकते हैं, न देख सकते हैं, न स्वाद ले सकते हैं, न जान सकते हैं, और न समझ ही सकते हैं। हम शक्ति के बिना न तो खड़े हो सकते हैं और न चल फि़र सकते हैं। इन्द्रिय और प्राण भी शक्ति के ही परिणाम हैं। विद्युत-शक्ति, आकर्षण-शक्ति तथा चिन्तन-शक्ति आदि सभी शक्ति के व्यक्त रूप हैं।
इस जीवन में त्रि-पिण्ड स्वरूप में महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी दैवीय शक्तियों को जाग्रत करने हेतु यह विशिष्ट पूजन त्रि-शक्ति चैतन्य यंत्र, शक्ति माला, त्रि-पिण्ड सामफ़ल्य फ़ल के साथ इस विशेष साधना को विजय दशमी के दिन सम्पन्न कर अपने आपको तीनों शक्तियों से आपूरित कर सकेंगें।
इस साधना को विजय दशमी के दिन सम्पन्न करें। रावण दहन के बाद संध्या बेला में स्नान कर सांयकाल 6:53 से 8:24 तक के मध्य साधना सामग्री को अपने पूजा स्थान में लेकर शांत निर्मल भाव से अपने सद्गुरु रूपी सर्व शक्ति का ध्यान करते हुए सद्गुरु देव के माध्यम से सिद्धाश्रम से चेतना को आत्मसात कर सकेंगे। उसके फ़लस्वरूप उक्त स्थितियों की प्राप्ति हो सकेंगी।
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