





जैसा कि आप सभी जानते ही है कि ‘पहला सुख निरोगी काया’ है, इसीलिये जब जीवन रोग से त्रस्त हो जाता है तब सारे अन्य सुख निर्मोल से प्रतीत होते हैं, क्योंकि जब शरीर ही स्वस्थ नहीं तो जीवन व्यतीत करने का कोई लक्ष्य ही नहीं।
वहीं दूसरी ओर जब शरीर से चुस्त-तंदरूस्त तो जीवन के सभी सुखों को आनन्द लिया जा सकता है, परिवार, सगे साथियों के साथ खुशनुमा जीवन व्यतीत किया जा सकता है। घर, व्यापार, नौकरी, पढ़ाई पर पूर्णतया ध्यान देकर जीवन सफलता पूर्ण हंसी-खुशी से व्यतीत किया जा सकता है।
तो गुरूदेव जी द्वारा नर-नारायण रोग मुक्ति आरोग्यता प्राप्ति दीक्षा प्राप्त कर परिवार के सदस्य को क्लिष्ट एवं कष्ट पूर्ण रूग्णावस्था से मुक्ति दिलायें।
नर-नारायण सर्व रोग मुक्ति आरोग्यमय साधना
साधना सामग्री- सर्व रोग मुक्ति यंत्र और सर्व रोग मुक्ति नर नारायण माला।
किसी भी सोमवार या पूर्णिमा को प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पीले आसन पर पूजा स्थान में बैठ जायें। अपने सामने लकड़ी की चौकी पर स्वच्छ पीला कपड़ा बिछाकर उस पर ‘सर्व रोग मुक्ति यंत्र’ को स्थापित कर साथ ही घी का दीपक जलायें। सर्वप्रथम संक्षिप्त गणेश/गुरू पूजन सम्पन्न करें ।
तत्पश्चात् अपने दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प बोलें कि मैं (अपना नाम) अकाल मृत्यु व रोग निवारण के लिए तथा सभी समस्याओं में समूल निदान हेतु सम्पन्न कर रहा हूँ और मुझे इसमें सफलता प्राप्त हो, ऐसा कहकर जल को भूमि पर छोड़ दें। तत्पश्चात् ‘सर्व रोग मुक्ति नर नारायण माला’ से निम्न मंत्र की 7 माला मंत्र जप 11 दिनों तक करें।
मंत्र:
।। ऊँ क्लीं कालयै रोग मृत्यु मुक्तये क्लीं फट् ।।
साधना समाप्ति के पश्चात् यंत्र व माला को नदी में विसर्जित कर दें अथवा गुरू चरणों में अर्पित कर दें। साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन करें व शुद्ध-सात्विक भोजन ग्रहण करें।
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