





लिकोरिस या मुलेठी, जिसे ‘‘स्वीटवुड’’ के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रभावी और शक्तिशाली औषधीय जड़ी बूटी है। लिकोरिस जड़ सुगंधित होती है और इसका उपयोग चाय और अन्य पेय पदार्थों में स्वाद बढ़ाने वाले एजेंट के रूप में किया जाता है।
खांसी और गले की खराश से राहत पाने के लिये मुलेठी की जड़ों का सीधे सेवन किया जा सकता है।
आयुर्वेद की पाठ्यपुस्तक भावप्रकाश में मुलेठी के गुणों का उल्लेख इस प्रकार किया गया हैः
यष्टि हिमा गुरुः स्वादि चक्षुषया बलवर्णकृत।
सुस्निग्ध शुक्राला केशया स्वर्या पित्तानिलास्त्रजित।
व्रण शोथविषच्छर्दितृष्णग्लानिक्षायपहा।
मुलेठी प्रकृति में सीता (ठंडी), पचने में गुरु (भारी) और स्वाद में मधुर (मीठा) होती है। चक्षुय (आंखों के लिये अच्छा) गुण के कारण मुलेठी आँखों की समस्याओं के लिये फायदेमंद है। यह अपने बल्य (शक्ति प्रदाता) गुण के कारण ताकत में सुधार करने में भी मदद करता है। यह अपने शुक्राल गुण के कारण शुक्राणु और वीर्य की गुणवत्ता में सुधार करने में भी मदद करता है।
मुलेठी मुंह के छालों और दांतों पर जमी पथरी जैसी मौखिक समस्याओं के उपचार में उपयोगी हो सकती है। यह पित्त और वात को संतुलित करती है, जिससे मुंह के छालों और अन्य पित्त विकारों में आराम मिलता है। मुलेठी पाउडर और शहद का पेस्ट लगाने से इसके उपचार और शीतलता प्रदान करने वाले गुणों के कारण मुंह के छालों में आराम मिल सकता है। इसके अल्सर रोधी, एंटीऑक्सीडेंट और सूजन रोधी गुणों के कारण यह पेट के अल्सर और सीने में जलन जैसी गैस्ट्रिक समस्याओं के उपचार में भी लाभकारी है। ऊर्जा स्तर बढ़ाने और थकान दूर करने के लिये भी मुलेठी का सेवन किया जा सकता है।
मुलेठी पाउडर त्वचा की बनावट और रंगत सुधारने में भी उपयोगी है। कुछ मामलों में, मुलेठी का अत्यधिक सेवन मतली और सिरदर्द का कारण बन सकता है।
मुलेठी के फायदे
खांसी के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी अपने रोपन (उपचारक) और कफ निस्सारक गुणों के कारण गले में खराश, गले की जलन, खांसी और ब्रोंकाइटिस के लिये अच्छी होती है।
पेट के अल्सर के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी की जड़ का अर्क पेट के अल्सर के प्रबंधन में सहायक हो सकता है। मुलेठी के अर्क में मौजूद ग्लाइसीरैटिनिक एसिड में मजबूत सूजनरोधी गुण होते हैं और यह सूजन पैदा करने वाले कारकों की गतिविधि को रोककर पेट में दर्द और सूजन को कम करता है।
सुझाव:
एक चम्मच मुलेठी पाउडर लें। पेट के अल्सर से जुड़े दर्द और सूजन से राहत पाने के लिये इसे दिन में तीन बार एक कप दूध के साथ सेवन करें।
मुलेठी अपनी शीत तासीर के कारण पेट के अल्सर में फायदेमंद होती है। यह एक मोटी श्लेष्म परत बनाती है जो अपने रोपन (उपचारक) स्वभाव के कारण पेट की रक्षा करती है।
सीने की जलन के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी कार्यात्मक अपच और उससे जुड़े लक्षणों जैसे ऊपरी पेट भरापन, आंतों में गैस के कारण दर्द, डकार, पेट फूलना, मतली, उल्टी, सीने में जलन और भूख न लगना आदि के प्रबंधन में प्रभावी है।
थकान दूर करने में मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी अपने मधुर (मीठे) और रसायन (कायाकल्प करने वाले) गुणों के कारण तत्काल ऊर्जा प्रदान करके थकान और कमजोरी को दूर करने के लिये जानी जाती है।
टीबी (तपेदिक) में मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी में मौजूद रसायन (कायाकल्प करने वाले) और रोपन (उपचार करने वाले) गुणों के कारण यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और तपेदिक के रोगियों के फेफड़ों में जीवाणु संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करती है।
मलेरिया के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी अपने रसायन गुणों के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर मलेरिया से लड़ने में मदद करती है।
फैटी लिवर रोग के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4)½ के कारण होने वाले फैटी लिवर के मामले में उपयोगी हो सकती है। अपने विषहरण और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण, मुलेठी (CCl4)½ से होने वाले लिवर की क्षति को उलट देती है। यह लिवर एंजाइमों की बढ़ी हुई गतिविधि को रोककर और लिवर में एंटीऑक्सीडेंट के स्तर को बढ़ाकर काम करती है। मुलेठी में मौजूद ग्लाइसीरिज़िक एसिड में अच्छे हेपेटोप्रोटेक्टिव और सूजन-रोधी गुण होते हैं, इसलिये यह गैर-अल्कोहलिक हेपेटाइटिस के इलाज में भी प्रभावी हो सकता है।
उच्च कोलेस्ट्रॉल के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी अपने वात और पित्त को संतुलित करने वाले गुणों के कारण उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने और प्लाक बनने के जोखिम को कम करने में मदद करती है।
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी अपने सीता (ठंडे) और रोपन (उपचारक) स्वभाव के कारण आईबीएस के मामले में सूजन को कम करती है और उपचार प्रक्रिया को तेज करती है।
गठिया के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
आयुर्वेद के अनुसार, गठिया को संधिवात कहा जाता है, जिसमें वात दोष बढ़ने से जोड़ों में दर्द और सूजन होती है। मुलेठी अपनी शीत तासीर के कारण वात को संतुलित करती है और गठिया में राहत प्रदान करती है।
संक्रमणों के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी अपने रसायन (कायाकल्पकारी) गुणों के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है।
बांझपन के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी में मौजूद वाजीकरण (कामोत्तेजक) और रसायन (कायाकल्प करने वाले) गुणों के कारण यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने और पुरुष बांझपन के प्रबंधन में मदद करती है।
प्रोस्टेट कैंसर के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी में पाया जाने वाला ग्लाइसीरिज़िन प्रोस्टेट कैंसर के खिलाफ एक चिकित्सीय एजेंट के रूप में कार्य कर सकता है। ग्लाइसीरिज़िन एपोप्टोसिस को प्रेरित करके प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं के कोशिका गुणन को रोकता है। इसलिये, मुलेठी को प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ एंटी-ट्यूमरिजेनिक गतिविधि के लिये जाना जाता है।
कारोनिक हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) संक्रमण के लिये मुलेठी के क्या फायदे हैं?
मुलेठी में मौजूद ग्लाइसीरिज़िन में एंटीवायरल गतिविधि होती है और यह हेपेटाइटिस सी वायरस के गुणन को रोकता है। यह वायरस को स्वस्थ यकृत कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकता है और क्रोनिक हेपेटाइटिस सी से पीड़ित रोगियों की स्थिति में सुधार करने के लिये जाना जाता है। मुलेठी में हेपेटोप्रोटेक्टिव गतिविधि भी होती है क्योंकि यह मुक्त कणों से लड़ती है और लिपिड पेरोक्सीडेशन प्रेरित कोशिका क्षति को रोकती है।
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