





मनुष्य के जीवन में धन का सबसे अधिक महत्व माना गया है। धन के अभाव से पूरा जीवन और उसका कार्य-कलाप प्रभावित सा हो जाता है। कार्य-व्यापार में भी विभिन्न प्रकार की बाधाएं आने लगती हैं। कभी-कभी बहुत अच्छा चल रहा व्यापार अचानक से ठप हो जाता है और आदमी सड़क पर आ जाता है। जिससे पीड़ित मनुष्य मानसिक और शारीरिक रुप से अर्धविक्षिप्त या पूर्ण-विक्षिप्त बन जाता है। किसी व्यक्ति के उन्नति और अवनति का पता इस बात से भी चलता है कि वह तंत्र बंधनों से कितना मुक्त है। तंत्र बंधन से पीड़ित व्यक्ति किसी से अपनी व्यथा कहाँ कह पाता है?
इन नारकीयमय, विनाशमय बंधनों की निवृत्ति के लिए आवश्यक है गुरुत्वीय शक्ति, जिसके माध्यम से मनुष्य गुरुत्व शक्तियों से युक्त होते हुए जीवन के अनर्गल तंत्र, प्रेत-पिशाच बंधनों से मुक्त होता है तथा उसके जीवन में ‘श्री’ अर्थात् ‘लक्ष्मी’ का आगमन होता है। जिससे बंद पड़े कारोबार-व्यापार में अतुलनिय वृद्धि होती है।
गुरुत्व शक्ति युक्त तंत्र बंधन निवृत्ति श्री लक्ष्मी कवच धारण करने से व्यक्ति के जीवन में आय का स्त्रोत बना रहता है तथा आने वाली कुस्थितियाँ पूर्णरुपेण समाप्त होती ही हैं। जिससे जीवन श्री सायुज्य बन पाता है तथा जीवन में धन, यश, वैभव स्वरुप में लक्ष्मी का आगमन होता है।
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