





‘जिमीकन्द’ का वर्णन भारतीय धर्मग्रंथों में भी पाया जाता है। संस्कृत में जिमीकन्द को ‘सूरन’ के नाम से जानते हैं। एशिया भर में यह मुख्य रुप से पकाया जाने वाला 1.0-1.5 मीटर लंबा, देशी फसलों में सबसे लोकप्रिय भूमिगत तने वाले कंदों में से एक है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लाखों लोग इसे एक पसंदीदा सब्जी के रूप में बड़े पैमाने पर खाते हैं और यह खाद्य सुरक्षा और लाभकारी नकदी फसल के रूप में लोकप्रिय है। इन कंदों को ‘अकाल फसल’ भी कहा जाता है, जिनका उपयोग तब किया जाता है जब अन्य मुख्य फसलों की कमी होती है यह कंद सही तरीके से तैयार किए जाने पर स्वाद और उसके भीतर निहीत गुणों का खजाना है। इसका बाहरी भाग खुरदरा और भूरा होता है, जबकि अंदर का गूदा सफेद या हल्का गुलाबी होता है। इनमें कई लंबी जड़ें होती हैं; पत्तियां अकेली, त्रिपक्षीय, 30-90 सेंटीमीटर चौड़ी होती हैं।
जिमीकंद उन पारंपरिक भारतीय सब्जियों में से एक है जिसे कई लोग स्वाद से ही पहचान लेते हैं। जिमीकंद में मसालों को अवशोषित करने की क्षमता प्रचुर मात्रा में होता है। अपने पाक गुणों, चिकित्सीय मूल्यों, औषधीय उपयोग और उच्च उपज क्षमता के कारण इस कंद को ‘कंद फसलों का राजा’ कहा जाता है। ठीक तरीके से पकाने पर यह नरम, स्वादिष्ट और बेहद संतोषजनक बन जाता है। कच्चा खाने पर इससे त्वचा में खुजली हो सकती है, यही कारण है कि बहुत से लोग इसे पकाने से कतराते हैं।
यह सब्जी विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में खाई जाती है और पाचन, जोड़ों के दर्द और ऊर्जा के लिए लाभकारी मानी जाती है। इसे आमतौर पर खेतों में उगाया जाता है, लेकिन थोड़ी सी उचित तैयारी और देखभाल से इसे घर में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यह न तो पेड़ है और न ही फल , बल्कि एक कंद है जो एक कंद से उगता है।
बवासीर के उपचार में सहायक होने के कारण इसे संस्कृत में ‘अर्सोघ्न’ के नाम से भी जाना जाता है वहीं दिपावली पर कई जगह इसकी सब्जी खाना भी शुभ माना जाता है।
जिमीकंद के औषधीय उपयोगः
जिमीकंद का उपयोग तीव्र गठिया के उपचार में किया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार, इसका उपयोग पेचिश, बवासीर और पाइल्स में भी किया जाता है।
कैल्शियम ऑक्सालेट (calcium oxalate) की उपस्थिति के कारण इसके कंद जलन पैदा करते हैं।
इसका अचार भी बनाया जा सकता है।
यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, याददाश्त, फोकस और एकाग्रता में सुधार करता है।
जिमीकंद में तनाव दूर करने वाले गुण भी होते हैं।
ग्रामीण इलाकों में इसके तनों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकता है।
ये पोषक तत्वों और खनिजों से भरपूर होते हैं।
इनको वातहर, रेचक और कफ निस्सारक के रुप में भी प्रयोग किया जाता हैं।
ताजे जिमीकंद तीखे होते हैं और उत्तेजक एवं कफ निस्सारक होने के साथ-साथ भूख और स्वाद बढ़ाते हैं।
जिमीकंद के स्वास्थ्य लाभ (फायदे):
यह पोषक तत्व प्राकृतिक विकल्पों में आसानी से नहीं पाया जाता; इसलिए, इसके सब्जी को अपने आहार में अवश्य शामिल करें।
पेट भरने और फाइबर से भरपूर होने के कारण अच्छा है।
तलने या अधिक मात्रा में खाने पर अच्छा नहीं है।
उबले हुए, मसालों का संतुलित संतुलन तथा बहुत कम तेल में तले हुए जिमिकंद को खाना सबसे उचित माना गया है।
जिमीकंदमें पाये जाने वाले रासायनिक पोषक तत्वः
जिमीकंद में प्रोटीन, वसा, फाइबर, कार्बोहाईड्रेट, स्टार्च, ऑक्सालिक एसिड और कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और विटामिन ए जैसे खनिज पाए जाते हैं।
इनके अलावा ग्लूकोज, गैलेक्टोज और जाइलोज भी मौजूद होते हैं।
इसमें एक सक्रिय डायस्टैटिक एंजाइम की उपस्थिति दर्ज की गई है।
कंद में बेटुलिनिक एसिड, बीटा सिटोस्टेरॉल, स्टिग्मास्टेरॉल और बीटा सिटोस्टेरॉल पामिटेट पाये जाते हैं।
जिमीकंद किसे नहीं खाना चाहिए?
इन फायदों के बावजूद जिमीकंद हर किसी के लिए उपयोगी नहीं है।
गंभीर ऐसिडिटी वाले व्यक्ति को जिमीकंद के सेवन से परहेज करना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को सूरन से एलर्जी है तो उन्हें उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
जिमीकंद में आक्सलेट की मात्रा अधिक होती है अतः जिन्हें गुर्दे की पथरी हो उनके लिए इसका सेवन पूर्णतः निषेध है।
वास्तव में यह सब्जी कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है, लेकिन सर्वोत्तम स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित आहार में शामिल करना चाहिए। खाना पकाने में इसकी बहुमुखी प्रतिभा इसे विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक व्यंजनों में एक मूल्यवान सामग्री बनाती है, विशेष रूप से दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान।
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