





ध्यान, चेतना की वह यथार्थ अवस्था है-जहां कोई विचार या कोई विषय नहीं होता। हमारा मन एक नित्य व सतत प्रवाह है जहां सदा ही चाहे हम जो भी कार्य क्यों न कर रहे हो-विचार चलते रहते हैं, इच्छाएं, स्मृतियां, कोई योजना, क्रिया रात-दिन निरन्तर चलती ही रहती हैं। यहां तक कि नींद में भी हमारा मन चलता रहता है, स्वप्न भी चलते रहते हैं। इसके विपरीत जब कोई विचार नहीं चलते, कोई कामना जागृत नहीं होती, जीवन की सारी उठा-पटक जब शांत हो जाती है, हम मौन अवस्था में होते हैं- वह अवस्था ही ध्यान है।
ध्यान आंरभ करते समय याद रखें कि इसे उसी विधि से शुरू करें, उस तरीके को अपनाएं जो रूचिकर लगे। ध्यान को जबरदस्ती थोपना नहीं चाहिये क्योंकि यदि ऐसा किया तो कोई भी कार्य व क्रिया सहज नहीं हो पायेगी। और जिस दिशा में मन की सहज रूचि हो उसी दिशा में ध्यान सरलता से घटता है।
ध्यान लगाते समय इसके उचित स्थान का चयन करना आवश्यक है। इसके लिये एक छोटा सा मंदिर, घर का कोई कोना, ध्यान कक्ष चुन सकते हैं। फिर उस स्थान का किसी और काम के लिये उपयोग न करें, क्योंकि प्रत्येक कार्य की अपनी तरंगे होती हैं।
जो उस स्थान को जागृत करती है, ध्यान-साधना में सफलता के लिये, वहां एक सहज वातावरण निर्मित हो जाता है, जिसमें हम बहुत सरलता से ध्यान में गहरे प्रवेश कर सकते हैं।
ध्यान के लिये एक नियत समय चुनना भी बहुत उपयोगी होता है, क्योंकि हमारा शरीर व मन एक यंत्र है। यदि हम नित्य एक ही समय पर भोजन करते हैं, तो हमारा शरीर रोजाना उसी समय पर भोजन की मांग करने लगता है, ठीक उसी समय रोजाना हमें भूख लगनी आरंभ होती हैं।
यदि हम एक नियत स्थान पर, नियत समय पर रोज ध्यान करेंगे तो हमारे शरीर व मन में ध्यान के लिये भी एक इच्छा या भूख निर्मित होगी, एक भावदशा निर्मित होगी जो ध्यान लगाने में सहयोगी ही साबित होगी।
जहां ध्यान लगा रहे हैं, उस स्थान पर अंधेरा हो, अगरबत्ती-धूपबत्ती की महक को, स्वच्छ कपड़े, स्वच्छ आसन जिनका उपयोग केवल ध्यान के समय ही किया जाता हो, इन सब से ध्यान में मदद मिलती है, और ध्यान द्वारा परमात्मा मनुष्य में उतरता है, मनुष्य को आत्म-बोध होता है।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,