





शुभाशीर्वाद !
सांसारिक जीवन में जो अनेक-अनेक विषमताओं रूपी गढ्ढे होते हैं, वे विषमता रूपी गढ्ढे भरने के लिए ज्ञानरूपी गुरु के मार्ग दर्शन से साधक द्वारा चेतना और ऊर्जा ग्रहण करने से और उसी अनुरूप क्रिया और परिश्रम से समाप्त होते हैं। जल प्राप्ति के लिए अनेक-अनेक उथले गढ्ढे खोदने का विफल प्रयास मत कीजिए, वे तो शीघ्र ही सूख जायेंगे। एक ही स्थान पर पर्याप्त गहरा गढ्ढा खोदिये। अपनी यथा शक्ति, ज्ञान चेतना और परिश्रम को उसी में केन्द्रित करिये।
आपको स्वच्छ तथा शुद्ध जल तो पर्याप्त मिलेगा ही और जो शीघ्र समाप्त भी नहीं होगा। ठीक उसी तरह जीवन में भी जो भी लक्ष्य निर्धारित करें उन लक्ष्यों पर यथा शक्ति, ऊर्जा, ज्ञान चेतना, और परिश्रम हेतु निरन्तरता की स्थिति बनाये रखने पर और साथ ही कर्म भाव की निरन्तरता होने पर लक्ष्यों की समयबद्ध योजना के अनुरूप पूर्णता प्राप्ति सम्भव होती है। वे ही सफलतम व्यक्तित्व बना पाते है। बहुत दुःख और विषाद का यह समय है जब हमारे हजारों-हजारों आस्थावान भक्त चार-धाम यात्रा पर गये और सैंकड़ो भक्त काल कवलित हो गए साथ ही लाखों स्थानीय-वासी बेघर और रोजगार विहीन हो गए सिद्धाश्रम साधक परिवार को इन अकाल मृत्यु से ग्रसित भक्तों के प्रति बहुत गहरी संवेदना है साथ ही बेघर और रोजगार विहीन स्थानीय-वासियों के लिए सिद्धाश्रम साधक परिवार ने हर सम्भव सहायता देने का आश्वासन दिया है और उसे क्रिया रूप में संचालित किया जा रहा है। आपका सहयोग भी अनिवार्य है, जो भी हृदय भाव से सहायता या सहयोग करना चाहे वे सीधे प्रधानमंत्री राहत कोष में धन राशी का ड्रॉफ्रट जमा करा सकते है अथवा इस पत्रिका में लिखे खाता क्रमांक में सीधे भेज सकते हैं।
आद्या शक्ति माता वैष्णों देवी कटरा जम्मू धाम में सैंकड़ो साधकों ने पैदल यात्रा सम्पन्न करते हुए थकान और अत्यधिक भीड़ की वजह से साधकों को कुछ समस्या देखनी पड़ी परन्तु जब साधक में अपनी आद्या शक्ति स्वरूपा माँ से मिलने का भाव चिंतन होता है, तो सच्चा भक्त सामान्य परेशानियों को अनदेखा कर देता है क्योंकि वह जानता है कि माँ भी अपनी संतान को इस संसार में लाने के लिए अनेक-अनेक कष्ट झेलती है परन्तु वे सभी कष्ट संतान के संसार में आने से स्थूल हो जाते है। ठीक उसी तरह माँ के साक्षीभूत रूप में दर्शन और गुरु से त्रि-शक्ति युक्त शक्तिपात दीक्षा और काल भैरव शक्ति दीक्षा ग्रहण की तो सभी साधक ऊर्जा और आनन्द से सरोबार हो गये यह सब सद्गुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्दजी महाराज जी की अनुकम्पा से ही सम्पन्न हो पाया हैं।
स्वामी सच्चिदानन्द समस्त वेदों व शास्त्रों के ज्ञानी थे जिन्होंने अपने असीम ज्ञान से अलौकिक गुरु शिष्य परम्परा का संचार किया। उन्होंने सदैव अपने भक्तों के सुख-दुःख, सफलता-विफलता व आध्यात्मिक जीवन के हर उतार-चढ़ाव में एक स्तम्भ की तरह खड़े रहकर अपने शिष्यों का उद्धार और मार्ग दर्शन किया। इसी परम्परा को आगे ले जाते हुए उनके श्रेष्ठ शिष्य व मेरे पिता परमहंस स्वामी नारायण दत्त श्रीमाली जी, जो स्वयं उनके द्वारा सर्व साधनाओं की ऊर्जा से ओत-प्रोत थें उन्होंने अपने शिष्यों को भौतिक व पारिवारिक जीवन के सभी कर्त्तव्यों को पूर्ण रूप से किस तरह से पालन किया जाये और साथ ही कैसे श्रेष्ठता प्राप्त की जाये वह ज्ञान और भाव निरन्तर प्रदान किया।
अभी आप जिसे जीवन कहते हो, वह जीवन नहीं है, जीवन नाम का मात्र धोखा है! यदि आप अपने इस जीवन को जीवन कहते हो तो फिर राम, महावीर, बुद्ध, कबीर, नानक, शंकराचार्य का जीवन क्या था? विचार करो! जब आपके जीवन में प्रकाश की कोई किरण नहीं है, गुरु रूपी चिन्तन भाव की हृदय पर कोई रेखा नहीं है गुरुरूपी ज्ञान की कोई चेतना भाव नहीं है अपने भीतर उतरने का भाव चिंतन नहीं हैं तो फिर जीवन का कोई मोल नहीं हैं। जबकि जीवन अमूल्य है और इस जीवन को राममय, कृष्णमय, शंकराचार्यमय बनाना हैं तो अपनी न्यून स्थिति से हट कर कुछ विशेष क्रियाये करना आवश्यक हैं और ऐसी ही चेतना और क्रिया को आत्मसात करने के लिए जितना हम अपने भाव रूपी गुरु के समीप रहेंगे तब ही ज्ञानतत्व को, ब्रह्मतत्व को पूर्णता से आत्मसात कर सकेंगे। साथ ही पूर्णता से जीवन के अर्थ सार को प्राप्त कर सकेंगे।
इसी हेतु श्री सच्चिदानन्द जी महाराज और सद्गुरुदेव जी की आज्ञा स्वरूप ही पंचदिवसीय अहम ब्रह्मास्मी कुबेर वैभव लक्ष्मी महाकाल शक्ति महोत्सव का आयोजन महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण उज्जैन (म-प्र-) में इस वर्ष 24 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक सम्पन्न किया जायेगा। इस साधना शिविर में अधिक से अधिक साधक सम्मिलित हो सकें और सहज रूप में दिव्यत्म श्रेष्ठमय पूर्ण वर प्रदायक पवित्र स्थान पर सुगमता से पहुंच सकें। साथ ही भगवान सदा शिव महादेव के उस ज्योर्तिलिंग स्वरूप का साक्षीभूत स्वरूप में दर्शन और उनके श्री चरणों में गुरु के सानिध्य में बैठ कर जीवन के कुछ क्षण श्रेष्ठ साधना कर जीवन की विषमताओं और न्यूनताओं और विषपूर्ण स्थिति को पूर्णरूपेण समाप्त कर सकें।
साधक द्वारा श्रावण मास में भगवान शिव और माता गौरी की आराधना वन्दना करने से वह अपने जीवन को शिव गौरी युक्त बनाने की ओर गतिशील हो पाता है। गुरु का कर्त्तव्य हर दृष्टि से शिष्य की रक्षा करना है इस हेतु रक्षाबंधन महोत्सव 19,20,21 अगस्त को सम्बलपुर उड़ीसा में सम्पन्न होगा गुरु द्वारा दीक्षा के साथ रक्षा सूत्र धारण कराया जायेगा।
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