





‘‘गुरू र्ब्रह्मा गुरू र्विष्णु, गुरू र्देवो
महेश्वरा गुरू र्साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः’’
जो आपको कुछ बना सकते है, जो बनाये रख सकते है, उसकी विशेषता की रक्षा कर सकते है, व उसके हित के लिये उसका नाश कर पुनः निर्माण कर सकते है, जो स्वयम् परम सत्य है, जो वास्तविकता में हमारे समक्ष है, उस गुरू को प्रणाम।
उस स्थिरता को, उस स्थाई ज्ञान को, उस प्रेम को प्रणाम, उस पूर्णता प्रदायता को प्रणाम।
महर्षि वेद व्यास जिन्होंने महाभारत व पुराणों की रचना की। वेदों का संकलन किया वे चिरंजीवी आज भी अपने ज्ञान-चेतना के स्वरूप हमारे समक्ष उपस्थित है, गुरू पूर्णिमा पर्व उसी चेतना व ज्ञान के प्रतीक के स्वरूप मनाया जाता है। गुरू की शक्ति चमत्कार दिखाने में या आपको नियंत्रण करने में नहीं, अपितु स्वयम् आपको विशिष्ट बनाने में है, पूर्ण बनाने में है, आपकी हर उस इच्छा नैतिक मनोकामना को पूर्ण करने के लिये आपको पथ प्रशस्त करने में है व उसे आप प्राप्त कर सके उसे भोग सकते है श्वास की भांति आपके सदैव साथ रहते है।
इस गुरू पूर्णिमा पर्व पर आपको उस पूर्णता का, उस श्वास का बोध हो, जिसके बिना आपका जीवन मृत है, चेतना रहित है।
गुरू के ज्ञान से ही आप दुःख रहित, ज्ञान पूर्ण, कौशल पूर्ण व अपनी योग्यता को प्रमाणित, पूर्ण कर सकेंगे। आप सभी के पास उस दिव्य चेतना का भंडार है-गुरूदेव के आशीर्वाद के स्वरूप में, दीक्षा-साधना के स्वरूप को, उनकी चेतना, प्रवचन, पत्रिका के स्वरूप में आपको तो उसको केवल आत्मसात् करना है।
इस 08-09-10 जुलाई को नारायण शक्तिमय गुरू पूर्णिमा महामाया महामालिनी अम्बिका लक्ष्मी महोत्सव पर रायपुर (छ.ग.) में सम्मिलित होकर आप भी उस चेतना से परिपूर्ण हो।
आपका अपना
विनीत श्रीमाली
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