





साथ ही ‘‘सिद्ध’’ वह है जो स्थापित हो चुका है या जिसका प्रमाण हो गया है या अमुक ने मान लिया और व अन्त है उसे आज तक का अर्जित ज्ञान ठुकरा नहीं सकता क्योंकि उसके आगे पीछे के हर पहलु को प्रमाणित कर दिया है।
परन्तु हम यह क्यो भुल जाते है कि ज्ञान तो अन्नत है! इसके न प्रारम्भ का पता है न अन्त का।
पूर्व जीवन का क्या छूट गया था व इस जीवन में क्या पाना है इसका ज्ञान तो केवल गुरू को ही है वे ही आपको बतला सकते है किस साधना को सम्पन्न कर आप सिद्धि को प्राप्त कर सकते है व ज्ञानी- सिद्ध बनने में आपके जीवन में क्या अवशेष या बाधा आ रही है।
यह तो सत्य है और सिद्ध कि ज्ञान प्राप्ति केवल साधक से ही संभव है और वह ज्ञान ही आपके अपने जीवन के हर समस्या, कष्ट के निवारण व सुख-शांति, भोग-विलास, ऐश्वर्य-वैभव प्राप्त करने में सहायक होगा। जब ज्ञान का अभाव होता है तभी व्यक्ति पीड़ित होता है। साधना ज्ञान की प्राप्ति तो केवल जीवन के उद्धार के लिये है।
ग्रहण करने के लिये तो बहुत सारा ज्ञान है परन्तु आपके लिये उचित क्या है इसका ज्ञान केवल गुरू को ही है इस चेतना को आत्मसात् करने के लिये आप गणपति ऋद्धि-सिद्धि शुभ लाभ धनदा साधना महोत्सव, 26-27 अगस्त को बिहार शरीफ (बिहार) में सम्मिलित होकर आप भी उस चेतना से परिपूर्ण हो।
आपका अपना
विनीत श्रीमाली
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