





यदि युवक-युवती के विवाह में बाधा आ रही हो, उचित वर-वधू प्राप्त नहीं हो रही हो, तो गन्धर्व यंत्र मुद्रिका अपने आप में महत्वपूर्ण उपाय है। इसको धारण करने वाला किसी निश्चित पुरूष या स्त्री से ही शादी करना चाहता हो और सामने वाला स्वीकृति नहीं देता हो तो इसके धारण करने से सामने वाले व्यक्ति का आकर्षण स्वतः बढ़ जाता है और अनुकूल स्थिति पैदा हो जाती है। यही नहीं अपितु शीघ्र मन की इच्छा के अनुरूप विवाह कार्य सम्पन्न होने की दृष्टि से यह गन्धर्व यंत्र मुद्रिका अपने आप में महत्वपूर्ण है।
विवाह के बाद पति-पत्नी में प्रेम बना रहे, पति अनुकूल बना रहे, गृहस्थ सुख में वृद्धि रहे, इस दृष्टि से भी यह मुद्रिका महत्वपूर्ण है। यदि प्रेमिका चाहे कि उसके प्रेमी का चित्त बदले नहीं तो यह यंत्र महत्वूपर्ण है। गृहस्थ जीवन में पति-पत्नी में अनुकूलता बनी रहे इस हेतु यह मुद्रिका सर्वाधिक सहयोगी है। वास्तव में ही यंत्र मुद्रिका जीवन का सौन्दर्य है, इसे किसी भी हाथ की अनामिका उंगली में धारण करना चाहिये।
वास्तव में ही वे मनुष्य दुर्भाग्यशाली कहे जा सकते हैं, जिनके सामने ऐसे यंत्र या सुविधा उपलब्ध हो और वह अपने जीवन में लाभ न उठा सके या अपनी इच्छा के अनुरूप कार्य सम्पन्न न कर सकें, तो दुर्भाग्य के अलावा और क्या कहा जा सकता है? यह अंगूठी वैवाहिक जीवन को पूर्ण रूप से मधुर बनाये रखने में विशेष रूप से सहायक है।
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