





भगवान शिव की पवित्रता और चेतन्यता प्राप्ति का दिव्यतम श्रावण मास है। जो साधक को आध्यात्मिक चेतना व जीवन में शुभ्रता की वृद्धि के फलस्वरूप पारिवारिक जीवन को शिव-गौरीमय बनाने का सर्वश्रेष्ठ चिंतन है।
श्रावण मास का प्रत्येक दिव्यतम दिवस सर्व कामनापूर्ति संतान सुख, शतायु जीवन, धन, वैभव, यश, लक्ष्मी पति शतायुमय जीवन युक्त सौभाग्य सुखदा, अविवाहित बहन बेटियां व पुत्र-पौत्र हेतु योग्य वर-वधू की प्राप्ति व कुलवंश वृद्धि कामना पूर्ति हेतु ही विशेष पूजा साधना अभिषेक सम्पन्न किये जाते है।
द्वादश ज्योर्तिलिंग भगवान शिव के अनंत और शाश्वत ज्योर्तिमयता के प्रतीक है।
सोमनाथ- सनातन धर्म का प्रथम व प्राचीन ज्योर्तिलिंग है।
मल्लिकार्जुन- इस पवित्रतम ज्योर्तिलिंग के साथ-साथ माता गौरी पार्वती का शक्तिपीठ भी है।
महाकालेश्वर-यह दक्षिणमुखी ज्योर्तिलिंग की भस्म आरती चेतना प्रदान करती है।
ओंकारेश्वर-यह प्राकृतिक रूप से ऊँ आकार में ज्योर्तिलिंग है।
केदारनाथ- सबसे अधिक उच्चतम स्थान पर स्थित दिव्य धाम यात्रा का भाव है।
भीमाशंकर- यह शिव के संरक्षण स्वरूप का प्रतीक है।
विश्वनाथ- बाबा विश्वनाथ साक्षात् रूप से विराजमान है। इसीलिये वे मोक्षदामय है।
त्रयंबकेश्वर- गर्भ गृह में तीन लिंग ब्रह्मा विष्णु महेश स्वरूप में विद्यमान है।
वैद्यनाथ- महादेव दुःखों व रोगों का नाश करने वाले वैद्य है।
नागेश्वर- भगवान शिव को नागों का देवता माना गया है। इसीलिये वे गले में नाग धारण किये हुये है।
रामेश्वरम- लंका विजय के पूर्व भगवान श्रीराम ने विजयश्री हेतु इस ज्योर्तिलिंग की स्थापना की।
घृष्णेश्वर-एलोरा गुफाओं के मध्य स्थित है। इसे ‘‘घुश्मेश्वर’’ से जाना जाता है।
गृहस्थ जीवन में शिव परिवारमय सर्व सुखों की प्राप्ति हो इसी हेतु सद्गुरूदेव जी द्वारा महामृत्युंजय, विघ्नहर्ता गणपति व माता-गौरी लक्ष्मी के वैदिक मंत्रों से द्वादश ज्योर्तिलिंग ताम्र यंत्र पूर्णरूपेण मंत्र सिद्ध चेतन्य किया गया है। इसे सावन मास में सद्गुरूदेव जी द्वारा बारह ज्योर्तिलिंगों की दिव्यतम दीक्षा ग्रहण कर स्थापित करने से सम्पूर्ण द्वादश ज्योर्तिलिंगों की दिव्यता ऊर्जा चेतना से पूरा परिवार निरन्तर शिवमय सुखों से परिपूर्ण रहेगा।
इस हेतु कैलाश सिद्धाश्रम, जोधपुर में सम्पर्क करें।
आप सभी को सद्गुरूदेव जी का सुमंगलमय आर्शीवाद है कि सभी का जीवन शिव-गौरी लक्ष्मी, गणपति, कार्तिकेय, रिद्धि-सिद्धि शुभ लाभमय, महामृत्युंजय, चेतन्यता से परिपूर्ण रहे।
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