अष्टावक्र गीता मय्यनन्तमहाम्भोधावाश्चर्य जीववीचयः । उद्यन्ति घ्नन्ति खेलन्ति प्रविशन्ति स्वभावतः ।।25।। जनक स्वयं को महासागर के रूप में अभिव्यक्त कर रहे हैं। जिस प्रकार महासागर में […]
पुरूषोत्तममय राम जानकी सौभाग्य प्राप्ति दीक्षा मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति की परम प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं। मानव जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, […]
रूप चतुर्दशी लूनी धाम-जोधपुर 18 अक्टूबर सहस्त्र लक्ष्मी प्राप्ति नारायण भगवती शक्तिपात दीक्षा मनुष्य जीवन में ऐसे काल खण्ड भी आते हैं, जिसकी महत्ता अपने आप […]