|| Om Param Tatvaaye Naarayanaaye Gurubhayo NamaH ||

March 25, 2026

Divine Upanishads Upanishad Vani

उपनिषद् वाणी   जब आप कारण में सुख खोजते हैं- किसी और में, किसी वस्तु में, किसी घटना में, किसी व्यक्ति में, तो अंतिम परिणाम सिवाय […]
March 25, 2026

Editorial Sampaadakiya

अपनों से अपनी बात…!   सूर्य की किरणें असंख्य हैं, साथ ही समुद्र की लहरें अनंत, न ही आज तक कोई आकाश की ऊँचाई नाप सका, […]
February 25, 2026

Divine Upanishads Upanishad Vani

उपनिषद वाणी आत्मतत्व स्थिर होते हुये भी गतिमान से भी ज्यादा गतिमान है। आत्मतत्व इंद्रियों और मन की दौड़ के परे है, क्योंकि इंद्रियों और मन […]
February 25, 2026

Editorial Sampaadakiya

अपनों से अपनी बात…! आपका स्वयं को लेकर क्या कर्तव्य है? भिन्न-भिन्न धर्म ग्रन्थों में लिखे गये कृत्य के पालन को ही मानव जीवन का कर्तव्य […]
January 25, 2026

Divine Upanishads Upanishad Vani

उपनिषद वाणी उपनिषद मनुष्यों के दो विभाजन करते हैं। एक तो वे लोग जो आत्मा का हनन करने वाले हैं। अपनी ही आत्मा के हंता हैं […]
January 25, 2026

Editorial Sampaadakiya

अपनो से अपनी बात…! जीवन का मूल उद्देश्‍य निरन्तर विकसित होना, उन्नत होना, आगे बढ़ना है, कुछ तो प्राकृतिक रूप से स्वतः ही हो जाता है […]
December 24, 2025

Divine Upanishads Upanishad Vani

उपनिषद वाणी   संसार में जीना और कर्म से लिप्त न होना बड़ी ही बुद्धिमत्ता की बात है। करीब-करीब ऐसे ही है, जैसे कोई काजल की […]
December 24, 2025

Editorial Sampaadakiya

अपनों से अपनी बात…!   दीक्षा का शाब्दिक अर्थ है “दक्ष” (Able) हो जाना, अर्थात् अयुक कार्य के पूर्ण करने के लिये आवश्‍यक गुणों को अपने […]
November 24, 2025

Divine Upanishads Upanishad Vani

उपनिषद वाणी   तेन त्यक्तेन भुंजीथाः। कहा कि जो छोड़ते हैं, वे ही भोग पाते हैं। हम तो जानते हैं कि जो पकड़ते हैं, वे ही भोग […]
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