





सर्वप्रथम समस्त गुरु परिवार के सुजनों को बधाई देता हूं व आप सभी को इस विशिष्ट उत्सव में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित करता हूं। उज्जैन एक ऐसी पावन भूमि है जहां हजारों साधु-संतो ने सिद्धि प्राप्त की है। महाकुंभ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आकर इस पावन स्थान पर पूजा, अर्चना करते हैं ताकि उनका भविष्य आनन्द और अमृतयुक्त सुख-समृद्धि पूर्ण रहें व उनके गृहस्थ भौतिक सुखों में पूर्णता का भाव प्राप्त हो सकें। प्राचीन काल से उज्जैन शहर विद्या अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। यहां पर हजारों ने साधना तप, चिंतन कर अपने आप को शून्य से महानतम् बनाया है। इस पावन धरती पर महान विद्वान ब्रह्मगुप्त जो एक गणितज्ञ थे, भास्कर आचार्य जो एक ज्योतिष आचार्य थे एवं भारतवर्ष के महान कवि कबीर दास की जन्म भूमि भी उज्जैन ही है और महाराज चन्द्रगुप्त ने उज्जैन की भूमि पर ही सुशासन किया था।
गुरुदेव ने उज्जैन को ही क्यों चुना?
हमारे देश में विभिन्न तीर्थ स्थल हैं, कई पावन नदियां व घाट हैं, तो फिर उज्जैन ही क्यों- तब पूज्य गुरुदेव ने मेरे मस्तक पर चेतना का प्रहार किया और मेरी अज्ञानता पर मुस्कुराते हुए बोले कि ‘‘ये वही स्थान है जहां पर समुन्द्र मंथन हुआ था, जहां देवताओं व राक्षसों ने मिल कर समुंद्र मंथन किया। मेरु पर्वत से समुद्र मंथन कर, संसार को चौदह तरह के विशिष्ट वरदान मिले। 1- सुधा – मदिरा की देवी, 2- अप्सरा-रम्भा, मेनका, 3- कौस्तुब मणि -बहुमूल्य रत्न, 4- उच्चश्रवस् – सतमुखी घोड़ा, 5- कल्पवृक्ष – मनोकामनापूर्ति वृक्ष, 6- कामधेनु गाय, 7- ऐरावत हाथी-भगवान इन्द्र का द्वारपाल , 8-धनवन्तरी – आयुर्वेद के ज्ञाता भगवान, 9- माता लक्ष्मी-समुद्र मंथन में प्रकट हुई थी और विष्णु भगवान ने अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया, 10- पारिजात, 11- चन्द्र – जिसे भगवान शिव ने अपने मस्तिष्क पर धारण किया, 12- हलाहल- विषपूर्ण पान, 13 शंख, 14- अमृत। विशेष रूप से हमारे प्राणों के आधार हमारे आराध्य सद्गुरुदेव निखिलेश्वरानन्द जी महाराज ने उज्जैन में अपने परम पूज्यनीय गुरुदेव से नारायण शक्ति धाम स्थल पर तपस्या कर 108 कला पूर्ण व्यक्तित्व रूपी सद्गुरुदेव बन पाये।
जिस प्रकार भगवान शिव ने हलाहल का सेवन कर सृष्टि को विषपूर्ण स्थिति के प्रकोप से बचाया, उसी प्रकार आप गुरुदेव से दीक्षा प्राप्त कर अपने जीवन में हलाहल विषरूपी अनेक-अनेक समस्याओं के निवारण हेतु गुरुदेव की विशिष्ट शक्ति और चेतना को आत्मसात कर अपने जीवन को अमृतमय बना सकते हैं। 24 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक उज्जैन में कुबेर वैभव लक्ष्मी महाकाल शक्ति साधना शिविर आयोजित है।
इस दिन मानसिक व आत्मिक शुद्धि के लिए गुरुदेव द्वारा मंत्रोच्चारण कर वैदिक शुद्धिकरण कराया जायेगा जिससे आने वाले पंच दिवसीय आयोजित साधनात्मक चेतना की ऊर्जा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। यह प्रथम और महत्वपूर्ण दिन होगा क्योंकि जब तक आपकी मन व आत्मा शुद्ध न हो, आप किसी भी मंगल कार्य का लाभ नहीं उठा सकेंगे। इस दिन की क्रिया के बाद आपके जीवन में हर दिवस एक उत्साह रूपी होगा और कोई भी दूषित क्रिया और शत्रु स्वतः ही परास्त हो जायेंगे।
संसार में मौजूद हर व्यक्ति का अस्तित्व उसके माता-पिता से होता है, हमें अपने पितृरों के पाप और पुण्य का फल भोगना ही होगा। इस चक्र से कोई भी मनुष्य नहीं बच सकता क्योंकि इस सृष्टि में ऐसा कोई मनुष्य नहीं है, जिसने पाप या बुरा कर्म ना किया हो, जिसे पितृ दोष कहते हैं। इस दिवस पर गुरुदेव के सानिध्य में विशिष्ट मंत्रों द्वारा पुण्यदायी क्षिप्रा नदी में स्नान, पिण्डदान, तर्पण क्रिया सम्पन्न होगी, जिससे वर्तमान जीवन के पापों से मुक्ति प्राप्ति की क्रिया की प्राप्ति हो सकेगी।
महायज्ञ व हवन देव, साधु, महर्षि व संत पुरूषों के द्वारा अनेकों कार्यों को सिद्ध करने के लिए आदिकाल से किया जाते रहें हैं। यज्ञ से साक्षात् देवता को प्रकट कर कई संत पुरुषों ने अपने ज्ञान चेतना में पूर्णता प्राप्त की है और भौतिक जीवन में श्रेष्ठता और आध्यात्मिक ज्ञान की दिव्यता को प्राप्त किया है। शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश, जनेऊ, विश्व शांति, वर्षा हेतु समय-समय पर महायज्ञ आयोजित हुए हैं। नारायण शक्ति धाम स्थल पर सहस्त्र चण्डी हवन में सम्मिलित होकर आहुति देने से साधक के जीवन के विकारों की समाप्ति होती है और जीवन में सदैव सुस्थितियों का निर्माण होता है। इस हवन में सम्मिलित प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं गुरुदेव द्वारा विधि-विधान सहित आहुति दिलाई जायेगी, जिससे जीवन में आने वाली कठिनाइयों को समाप्त कर प्रत्येक व्यक्ति को उन्नति की ओर अग्रसर करेगी और भौतिक जीवन की समस्त सुख-समृद्धि को प्राप्त करने के लिए अग्रसर करेगी।
जिस प्रकार भगवान शिव ने हलाहल का सेवन कर संसार को विषरूपी आपदाओं से बचाया और समस्त सृष्टि के मनुष्यों व जीव-जन्तुओं के कष्टों का पान कर लिया, उसी प्रकार महाकाल मंदिर प्रागण की तपोभूमि पर महारुद्राभिषेक में सम्मिलित होकर आप अपने जीवन में मौजूद दुःख और कष्टरूपी विषो को समाप्त कर सकेंगे। इस दिव्यतम ज्योर्तिलिंग का रुद्राभिषेक कर जीवन को मृत्युजंय युक्त और ज्योर्तिमय चेतना से अपने आप को पूर्णरूपेण आप्लावित कर सकेंगे।
इस समायोग दिवस पर गुरुदेव द्वारा सिद्धाश्रम से प्रणित चेतना से युक्त दिव्यत्म ज्योर्तिलिंगमय देवभूमि पर विशिष्ट दीक्षायें प्राप्त कर आपके जीवन में चेतनावान उत्साह व ऊर्जा का सृजन होगा। जिससे जीवन की सारी न्यूनताएं समाप्त हो सकेंगी। इन पांच दिवसों में गुरुदेव के सानिध्य में योगा, प्राणायाम, ध्यान, भजन, पूजन, मंत्र जाप, प्रवचन कार्यक्रम में लीन होकर अपने जीवन की दीनता, गरीबी, विलगता अनेक-अनेक रोगों-कष्टों से पूर्णरूपेण निवृत्ति प्राप्त हो सकेंगी।
ऐसा संयोग सैकड़ों वर्षों में एक या दो बार आता है, ये दिवस कार्तिक मास के विशिष्ट रूप से लक्ष्मी के श्रेष्ठतम स्वरूप में हैं, उज्जैन की पावन भूमि पर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी शिक्षा व दीक्षा महाऋर्षि सांदीपन से ग्रहण की थी और चौसठ कला युक्त योगेश्वर बन पायें। ऐसी पावन भूमि पर गुरुदेव कैलाश जी द्वारा विशिष्ट साधना शिविर में सम्मिलित होने का अवसर गंवाना नहीं चाहिए। इन दिवसों का पूर्णरूपेण लाभ उठाकर जीवन में हर दृष्टि से धर्म-अर्थ-काम की पूर्णता की निश्चिंत रूप प्राप्ति हो सकेंगी। जिससे कि जीवन की सभी अभिलाषाये, धारणाये, इच्छाये पूर्ण हो सकें। किसी भी प्रकार का संकोच न रखें क्योंकि ऐसा मौका जीवन में एक बार ही आता है। सारी व्यवस्था प्राचीन मंत्र-यंत्र विज्ञान द्वारा की गई है। इस उत्सव में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है। साधना सामग्री, दीक्षा, विश्राम व भोजन की व्यवस्था कैलाश सिद्धाश्रम जोधपुर द्वारा प्रदान की जायेगी।
सभी पत्रिका पाठकों, साधकों, शिष्यों से आग्रह है कि वे अपना पंजीकरण शीघ्र करायें जिससे उनसे सम्बंधित साधनात्मक चैतन्य सामग्री और ठहरने, भोजन, प्रसाद, विश्राम की सुव्यवस्था की जा सके।
24 अक्टूबर 2013 गुरुवार को सायं काल तक उज्जैन पहुँचना अनिवार्य है। देश के प्रत्येक शहर से उज्जैन पहुंचने के लिए एक्सप्रेस और सुपरफास्ट बस, रेलगाडि़यों की सुगम व्यवस्था है।
उदय कार्तिकेय दिवस पर परमहंस स्वामी सद्गुरुदेव द्वारा शक्तिपात दीक्षायें प्रदान की जाएगी, इसके साथ ही नित्य प्रतिदिन योगा, प्राणायाम, मंत्र-जप, साधना-पूजा, प्रवचन, भजन आरती सम्पन्न होगी। साथ ही सात्विक प्रसाद और भोजन की व्यवस्था गुरुदेव द्वारा प्रदान की जायेगी।
पूर्व में ही ऐसी व्यवस्था कर के आयें कि 28 अक्टूबर संध्या आरती के बाद सीधे घर को प्रस्थान कर सकें जिससे की गुरुदेव के सानिध्य में पवित्र दिव्य अलौकिक स्थानों पर जो साधना, योगा, प्राणायाम, मंत्र जप, पूजन, हवन, दीक्षा, अभिषेक सम्पन्न किये हैं उसका पूरा लाभ आपको जीवन भर अक्षुण्ण प्राप्त होता रहे। इसीलिए इधर-उधर ना भटक कर सीधे घर को लौटना श्रेयष्कर रहता है।
वे ही पंजीकरण करवायें जो अपनी स्वयं की बुद्धि, ज्ञान और विवेक से जीवन में कर्मशील रहते हैं, अपने स्वयं के निर्णय से ही जीवन में क्रियाशील रहते हैं।
वे ही पंजीकरण करवायें जो भगवान महादेव की अमृतरूपी चेतना और गौरी स्वरूपा लक्ष्मी शक्ति से अपने आप को आपूरित करना चाहते हैं।
पूर्व में ही पंजीकरण अनिवार्य है जिससे कि आप ही से सम्बन्धित साधना सामग्री मंत्र सिद्ध चैतन्य की जा सके। पंजीकरण शुल्क प्रति साधक 15000/- (Fifteen Thousand Only)
केवल पति-पत्नी द्वारा संयुक्त रूप से शिविर में भाग लेने पर शुल्क में रियायत सम्भव है।
पति-पत्नीः- 24000/- (Twenty Four Thousand Only)
महाकाल मंदिर प्रांगण उज्जैन में ही DORMITORY अर्थात हॉल में सामूहिक रूप से ठहरने और विश्राम की व्यवस्था की गयी है जिससे पारिवारिक और आत्मिक वातावरण बन सके। दोनों समय सात्विक भोजन-प्रसाद, चाय, साधना सामग्री, पूजन-हवन, अभिषेक, दीक्षा, पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान मंत्र जप दीक्षा का शुल्क सम्मिलित है।
शिविर स्थलः- श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण उज्जैन (म- प्र-)
किसी प्रकार की जानकारी के लिए कैलाश सिद्धाश्रम जोधपुर में सम्पर्क करें।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,