





परन्तु जहां हमारे शास्त्रों ने इन जैसे अनेक पर्वो को सराहा है, प्राथमिकता दी है, वहीं उन्होंने कुछ विशेष पर्वों को अति शुभ एवं साधना और तंत्र क्षेत्र में सर्वोपरि माना है। ये पर्व हैं-
ग्रहण की महत्ता इसलिये सर्वाधिक है, क्योंकि उस समय कुछ इस प्रकार का गुरूत्वाकर्षण प्रभाव पैदा होता है, जो साधना से प्राप्त होने वाले फल को कई गुणा बढ़ा देता है।
ग्रहण काल के दौरान किये गये मंत्र जप सामान्य रूप से किये गये लाख मंत्र जपों के बराबर होते हैं, उस दिन दी गई एक आहुति भी हजार आहुतियों के समान फल देती है।
इस बार चन्द्र ग्रहण 07 सितम्बर, रविवार को है और चूंकि ज्योतिष के अनुसार चन्द्र एवं सूर्य मुख्य ग्रह हैं, अतः इस काल का मानव जीवन के साथ – साथ समस्त संसार पर भी निश्चित प्रभाव पड़ता है।
चन्द्रमा मन, भावना, कल्पना शक्ति, ऐश्वर्य, संगीत, कला, धन, वैभव, सौन्दर्य, माधुर्य, तीव्र-बुद्धि, चरित्र, यश, कीर्ति आदि का ग्रह है, अतः इसके द्वारा जब ग्रहण निर्मित होता है, तो उपरोक्त बातों की प्राप्ति के लिये व्यक्ति चाहे, तो इस दिवस का लाभ उठा कर उचित साधना सम्पन्न कर सकता है और इच्छित सफलता प्राप्त कर सकता है।
वैसे तो इन सब स्थितियों को प्राप्त करने के लिये भिन्न-भिन्न साधनाएं हैं, परन्तु व्यक्ति एक ही समय में अलग-अलग साधनाएं किस प्रकार से सम्पन्न कर सकता है? यदि किसी को आकर्षक व्यक्तित्व के साथ-साथ अतुलनीय धन की भी कामना है, तो दो अलग-अलग प्रयोग सम्पन्न करने होंगे, जो कि सामान्यतः मुश्किल कार्य है, क्योंकि आजकल का जीवन बड़ा ही अस्त-व्यस्त एवं तीव्र गति युक्त हो गया है। न तो किसी के पास ज्यादा प्रयोग करने का समय ही है और न ही क्षमता …… तो फिर उपाय क्या है? क्या व्यक्ति को हर बार नवीन ग्रहण का इंतजार करना होगा?
इसका उत्तर है ‘नहीं’। हमारे ऋषि बहुत ही विचारवान, दिव्य विज्ञान से युक्त श्रेष्ठ महापुरूष थे। अपने तेज से उन्होंने कई प्रकार की अद्वितीय साधनाएं निर्मित कीं और इन्हीं श्रेष्ठ साधनाओं में से है-
ऋषिजन जानते थे, कि कलियुग का व्यक्ति तेजयुक्त और तपस्या का धनी नहीं होगा, अतः उन्होंने ऐसी साधनाएं निर्मित कीं, जो अनेक इच्छित फल एक बार में ही देने में सक्षम थीं।
‘सर्व मनोकामना पूर्ति’ का अर्थ है- जो कुछ भी मन की इच्छायें, अभिलाषाएं हो, वे पूर्ण हों, व्यक्ति अपनी मनोनुकूल स्थिति प्राप्त करे ही और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सके….
कामनाएं तो अनगिनत है… इनका कोई पार नहीं है…. कोई चाहता है, कि आकर्षक व्यक्तित्व और आत्म विश्वास से युक्त हो, कोई चाहता है अतुलनीय धन, सम्पति हो, कोई कला के क्षेत्र में शीर्ष स्थान तक पहुँचना चाहता है, कोई इच्छित विवाह करना चाहता है, तो कोई यश, कीर्ति का आकांक्षी है, क्योंकि जो व्यक्ति जीवित है, उसके अंदर कामना एवं आकांक्षा की अग्नि तो धधक ही रही होगी, यह सम्भव नहीं, कि व्यक्ति की कोई इच्छा ही न हो ….. ऐसा हो नहीं सकता।
इस ‘मनोकामना पूर्ति साधना’ के द्वारा व्यक्ति अपनी सभी मनाकामनायें पूरी कर सकता है। परन्तु इसका यह अर्थ नहीं, कि कोई यह सोचे, कि मैं प्रधानमंत्री बन जाऊं, या अमरीका का राष्ट्रपति बन जाऊं……. इच्छा वही हो जो संभव हो, जो आपकी जरूरत हो, जिसमें आपका फायदा होता हो और सबसे बड़ी बात, जिसके लिये आप बहुत ज्यादा उतावले हों।
वैसे तो मनोकामना पूर्ति साधना किसी भी दिन सम्पन्न की जा सकती है और इसके द्वारा सभी प्रकार की इच्छायें पूर्ण होती देखी गई है, परन्तु यदि चन्द्र ग्रहण के अवसर पर उसे सम्पन्न किया जाय, तो अपने आप ही हजार गुणा फल प्राप्त होता है और जिस कार्य के लिये व्यक्ति साधना करता है, वह सम्पन्न होता ही है…..
आम मनुष्य की अधिकतर मनोकामनाएं निम्न हैं-
ऊपर दी गई स्थितियां शायद ही संसार में कोई व्यक्ति हो, जो अपने जीवन में नहीं चाहता होगा, और संसार में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके जीवन में ये सभी स्थितियां मौजूद हों …………… क्योंकि आदर्श जीवन में कोई न कोई कमी तो देखने को मिल ही जाती है, और फिर वही कमी बन जाती है इच्छा।
अतः प्रत्येक व्यक्ति इस साधना के द्वारा अपनी कोई भी मनोकामना पूर्ण कर सकता है- चाहे मनोकामना एक हो या अधिक, इस साधना से निश्चित सफलता मिलती है ……
यह साधना तांत्रिक साधना है और इसमें विशेष नियमों का पालन आवश्यक हैं।
साधना नियम
साधना विधान
चन्द्र ग्रहण दिवस को चन्द्र ग्रहण के समय श्वेत वस्त्र धारण कर, सफेद आसन पर पूर्व की ओर मुख कर बैठें, और अपने सामने श्वेत वस्त्र से ढके बाजोट पर सर्व मनोकामना पूर्ति महायंत्र को स्थापित कर उसका पंचोपचार पूजन सम्पन्न करें। फिर उस यंत्र पर ‘अभिलाषिका’ अर्पित कर अपनी मनोकामना अथवा मनोकामनाओं का उच्चारण करें। जितनी मनोकामनाएं हों, उतने पुष्प लाल या पीले रंग के यंत्र पर अर्पित करें। तदुपरान्त यंत्र को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम कर निम्न मंत्र का जप प्रारम्भ करें-
ग्रहण काल में यह जप चलता रहे। प्रयोग समाप्ति के बाद उसी रात्रि में या अगले दिन समस्त साधना सामग्री को एकत्रित कर किसी नदी या जलाशय में विसर्जित कर दें। ऐसा करने से साधना फलीभूत होती है और हाथों-हाथ इसका प्रभाव देखने को मिलता है।
ग्रहण काल की वजह से साधना वैसे ही हजार गुणा ज्यादा प्रभावशाली हो जाती है, अतः व्यक्ति को सफलता मिलती है।
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