





जीवन का मूल उद्देश्य निरन्तर विकसित होना, उन्नत होना, आगे बढ़ना है, कुछ तो प्राकृतिक रूप से स्वतः ही हो जाता है जैसे शारीरिक विकास, ज्ञान वृद्धि, मानसिक विकास, अच्छे बुरे का ज्ञान, भावनात्मक विकास। परन्तु कुछ ज्ञान-चेतना को प्राप्त करने या आत्म सात करने के लिये आपको विशेष प्रयास करने पड़ते है जो मूलतः आपके पूरे जीवन की राह को निर्धारित करते है जैसे एक बच्चे को पढ़ाई के लिये क्या विषय चुनना है, या फिर आजीविका के लिये किस चीज का अध्ययन करना है, साथ ही अपने ग्रहण करने की क्षमता का विकास करना।
उस दिव्य ज्ञान को भी प्राप्त करना जो केवल ध्यान, साधना, मंत्र जाप के माध्यम से प्राप्त हो सकता है जो वास्तव में आपके विकास को गति प्रदान करेंगे, जीवन के शोक-निराशा दूर करके जो आपको चैतन्यता प्रदान करेंगे आपके POTENTIAL को बढ़ायेगा।
आपको तो केवल स्वयम् को निखारना है जो आज हो उससे उत्तम बनाना है, अपने अन्दर के ज्ञान पुंज को विकसित करना है, उस ज्ञान को प्राप्त करना है जो आपके कल को निखारे, आपको हर उस भौतिक सुख की प्राप्ति करवाये जिसकी आपको चेष्टा हो।
साधक को अगर एक अच्छा DOCTOR, ENGINEER, अधिकारी या व्यवसाई बनाना है तो बुनियादी शिक्षा व ज्ञान तो आपको अर्जित करना ही होगा उसके उपरान्त आपके सफलता व सन्तुष्टि केवल उस सत्य ज्ञान के माध्यम से प्राप्त होगी जो आपने ध्यान-साधना व मंत्र जाप से अर्जित किया है। आपके आस पास कई DOCTOR, ENGINEER व अधिकारी होंगे पर सफल व उत्कृष्ट तो कुछ ही होंगे वे सफलता को तभी प्राप्त कर सके जब उनमें वह दिव्य चेतना आत्मसात थी।
आप आज किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो-विकसित तभी हो पाओगे जब आप में वह दिव्य चेतना आत्मसात होगी तभी आप सही मायने में सफल हो पाओगे। आपको उस मूल को पाना है उस सुख को पाना है, वह अनुभव करना है जो आपको हर्ष-उल्लास प्रदान करे व आपको सन्तुष्टि प्रदान करे। आपको मैं कोई साधु-सन्यासी नहीं बनने का कह रहा हूँ- आपको तो इस भौतिक जीवन में सफल होकर साधनात्मक जीवन का भी रस लेना है। जीवन में एक BALANCE बनाना है धन के लिये भी कार्य करना है और मन के लिये भी। अगर मन शांत नहीं तो धन का क्या करोगे। इसीलिये इस सृष्टि के रचयिता व संहारक को परम सुख केवल ध्यान में आता है।
आप भी अपने जीवन में उस रस की प्राप्ति व अपने गुरू की चेतना को आत्मसात करने के लिये 14-15 फरवरी को काशी विश्वनाथ शिवत्व गौरी लक्ष्मी महाशिवरात्रि महोत्सव में सम्मिलित हो।
आपका अपना
विनीत श्रीमाली
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