





श्री विष्णु ने समुद्र मंथन के समय कूर्म अर्थात् कच्छप अवतार लेकर मदरांचल पर्वत का समस्त भार अपनी पीठ पर उठाकर देवगणों व दैत्यों की सहायता की। जिससे बहुमुल्य चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई, देवताओं को अमृतत्व प्राप्त हुआ जिससे उनकी क्षीण हुई शक्तियाँ उन्हें पुनः मिली और वे दैत्यों को पराजित कर स्वर्गलोक का आधिपत्य ग्रहण कर पाए। परिणामतः विश्व का कल्याण हुआ।
वर्तमान में भी साधक के जीवन में कई बार ऐसी चुनौतियां एवं व्यवधान कारक स्थितियां आ खड़ी होती हैं, जहाँ साधक का मंत्र-पूजन से मन विचलित हो उठता है या फिर पारिवारिक स्थिति ऐसी हो जाती है जहाँ साधक पूर्णतया एकाग्रचित होकर साधना नहीं कर पाता, किसी काम में मन नहीं लगता, जिससे उसे कहीं सफलता नहीं मिलती। वह हताश निराशावादी-हो जाता है। ऐसे समय में उसे आत्मसम्बल, स्थिरता, दृढ़ विचारधारा की आवश्यकता होती है। जिससे उसका (CONFIDENCE BOOST) अर्थात् विश्वास में बढ़ोत्तरी हो, कि मैंने जो कार्य पूर्ण करने की मन में ठानी है, वह पूरा करने हेतु अपने मार्ग पर अडिग टिका रहुंगा। और ऐसे विश्वास और एकाग्रचित्तता के लिये “श्रीविष्णुदृढ़संकल्पशक्तिदीक्षा”प्राप्तकरसाधकस्वयंकोकार्यसफलताहेतुपूर्णसंकल्पितएवंसमर्पितकरजीवनकेप्रत्येकक्षेत्रचाहे‘विद्यार्थी’जीवनमेंसफलताहो, साधना, मंत्र-जप में ध्यान लगाना हो, साधक सभी कार्य पूर्ण एकाग्र व शांत मन से पूरा करने में सफल होते हैं।
“श्री विष्णु दृढ़ संकल्प शक्ति साधना”संपन्नकरसाधकशीघ्रहीमनमेंव्याप्तव्याकुलता, बेचैनी व अधीरता से मुक्ति प्राप्त कर अपने जीवन के समस्त कार्य व जिम्मेदारियों को समर्पण और कुशलता से सम्पन्न करने में अग्रसर होते हैं।
“श्री विष्णु दृढ़ संकल्प शक्ति साधना”
साधना सामग्री: आत्मशक्ति प्राप्ति यंत्र, ईच्छा शक्ति गुटिका, विशिष्ट सफेद हकीक माला।
साधना विधि: यह साधना सोमवार, गुरुवार को बह्ममुहुर्त में सम्पन्न की जा सकती है।
साधक सर्वप्रथम प्रातः काल जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं, तत्पश्चात श्वेत वस्त्र पहनकर पूर्वाभिमुख अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठ जाएं तथा तांबे के पात्र में उपर्युक्त तीनों सामग्री को रख लें। तत्पश्चात चावल के कुछ साबुत दानें उस पात्र में डालें, फिर पुष्प अर्पित करें, फिर धूप दीप आदि दिखायें। तत्पश्चात अपने ईष्ट, आराध्य सद्गुरुदेव को नैवेद्य का भोग अर्पित करते हुए गुरु मंत्र की कम से कम एक माला मंत्र जप सम्पन्न करें।
फिर सद्गुरुदेव से प्रार्थना करें कि हे सद्गरुदेव! मेरे जीवन में व्याप्त व्याकुलता, बेचैनी, अधीरता आदि को समाप्त करते हुए मुझे आत्मविश्वास की प्राप्ति हो तथा मैं ¬प्रत्येक क्षेत्र में अद्वितीय बनकर कार्य कर सकूं।
तत्पश्चात विशिष्ट सफेद हकीक माला से निम्न मंत्र का पाँच माला मंत्र जप 11 दिनों तक करें
मंत्र
।। ऊँ श्रीं श्रूं श्रियै फट् ।।
OM SHREEM SHROOM SHRIYAI PHAT
साधना समाप्ति के बाद गुरु मंत्र की 1 माला मंत्र जप अवश्य करें। जब भी किसी विशेष कार्य से बाहर जायें तो उस विशिष्ट सफेद हकीक माला को या तो धारण कर लें अथवा कम से कम 21 बार उपरोक्त मंत्र का जप अवश्य कर लें।
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