





न शक्यं विधाता लिखितं तवः यशः गान
श्रावण मास के आगमन से जहां आकाश में उमड़ते-घुमड़ते काले बादलों का नर्तन मन को मोह लेता है— और प्रत्येक प्राणी का मन, मयूर की तरह नृत्य करने को मचल उठता है, वहीं मनुष्य का हृदय अत्यधिक शिव भक्ति-भावना से ओत-प्रोत भी हो जाता है, क्योंकि पूरा श्रावण मास ‘शिव कृपा सिद्धि कल्प’ के रूप में हमारे सम्मुख प्रति वर्ष उपस्थित होता है।
किसी भी देवी-देवता की आराधना करने के लिये एक विशेष दिवस का निर्धारण पूरे वर्ष में एक बार या दो बार किया गया है, किन्तु भगवान् शिव की उपासना के लिये तो पूरा का पूरा एक माह ही हम सभी को प्रतिवर्ष प्राप्त होता है।
श्रावण मास में सम्पन्न की गई कोई भी साधना पूर्णरूपेण फलदायक ही होती है, क्योंकि इस मास का प्रत्येक दिवस सर्वकामना सिद्धि प्रदायक अमृत महोत्सव की गरिमा को अपने अन्दर समेटे हुए होता है। श्रावण मास भूमभावन भोले नाथ का मास है। इस पूरे माह में यदि पूर्ण श्रद्धा एवं विधि-पूर्वक पूजा-आराधना की जाय, तो निश्चित रूप से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि साधक को किसी कार्य को पूर्ण करने में अड़चन आ रही हो, किसी भी कारण से वह कार्य पूर्ण नहीं हो रहा हो या किसी साधना में सिद्धि प्राप्त नहीं हो रही हो, तो ऐसी स्थिति में श्रावण मास से अधिक सिद्ध मुहुर्त अन्य कोई नहीं है।
इस पूर्ण सिद्धि प्रदायक मुहुर्त की प्रतीक्षा केवल मात्र उच्चकोटि के साधु एवं योगियों को ही नहीं होती, अपितु प्रत्येक व्यक्ति को होती है, क्योंकि यह माह है ही पूर्ण आनन्द, पूर्ण मस्ती की फुहार से आप्लावित कर व्यक्ति के तन-मन और आत्मा में पूर्ण उत्साह, आवेग और चेतना भरने का—–
श्रावण मास के महात्म्य का वर्ण करते हुए ‘शिव पुराण’ में उल्लेख किया गया है कि श्रावण मास में की गई ‘शिव साधना’ और वह भी इस माह में पड़ने वाले विविध सोमवारों को सम्पन्न की गई साधना योगियों और गृहस्थों के लिये पूर्ण सौभाग्य का द्वार खोल देती है। जो इस विशिष्ट दिवसों पर साधना सम्पन्न कर लेता है, उसे शिव गौरी गणपति, कार्तिकेय, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ का भाव पूर्णरूपेण प्राप्त होता ही है।
व्यक्ति की घोर दरिद्रता समाप्त होकर पूर्ण सम्पन्नता प्राप्त होती है। व्यक्ति यदि ऋण बोझ से दबा हुआ हो, व्यापार में अत्यधिक श्रम के बाद भी हानि मिल रही हो, विपक्षियों के द्वारा मुकदमे तथा अड़चनें पैदा कर मानसिक व शारीरिक कष्ट निरन्तर प्राप्त हो रहा हो, या किसी भी प्रकार की कोई परेशानी हो, तो श्रावण मास की साधना से बढ़कर अन्य कोई लाभदायक विधान अन्यत्र है ही नहीं।
श्रावण मास में सम्पन्न की गई साधना के द्वारा न केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, अपितु उस व्यक्ति पर पूर्ण जीवन काल तक लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है, क्योंकि मां पार्वती स्वयं अन्नपूर्णा, लक्ष्मी स्वरूपा हैं— विघ्न विनाशक भगवान् गणपति तो साक्षात् शिव पुत्र हैं ही अतः इनकी भी कृपा का फल प्राप्त होता है। कहने का तात्पर्य मात्र इतना ही है- ‘जहां शिव हैं,? वहां सर्व है।’ इस वर्ष श्रावण मास में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार को निम्न साधनाओं को करने का विधान फलप्रदायक है-
प्रथम सोमवार भगवान् शिव के जया-पार्वती युक्त ‘आशुतोष शिवलिंग’ के पूजन करे। इस पूजन के द्वारा अखण्ड लक्ष्मी की प्राप्ति होती है, अतः निम्न मंत्र के द्वारा 51 कमल बीजों को जया-पार्वती आशुतोष शिवलिंग पर अर्पित करें।
द्वितीय सोमवार पर ‘सहस्त्र सामफल्य शिवलिंग’ का पूजन करने से सम्पूर्ण मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पारद शिव का वीर्य है, सत्व और पूर्ण अमरत्व प्रदान करने में सक्षम है।
पारद को विशेष क्रियाओं से आबद्ध कर सहस्त्र सामफल्य शिवलिंग का निर्माण किया जाता है, ऐसे सहस्त्र सामफल्य शिवलिंग पर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए एक साथ 21 बिल्व पत्र व ‘मृत्युजंय सिद्धि गुटिका’ अर्पित करने से प्रत्येक मनोकामना पूर्ण होती है।
तृतीय सोमवार पूर्णिमा को ‘धातु निर्मित शिवलिंग’ के पूजन का योग स्पष्ट हो रहा है। यह शिवलिंग किसी भी धातु यथा-स्वर्ण, रजत, ताम्र अथवा कांसे का बना हो सकता है। इस शिवलिंग पर निम्न मंत्र के द्वारा 11 फल, 11 चन्द्रानन्द गोमती चक्र के साथ चढ़ाने का विधान है।
प्रत्येक फल को चन्द्रानन्द गोमती चक्र पर चढ़ाने से पूर्व 108 बार उंगलियों पर निम्न मंत्र का जप करना चाहिये, ऐसा करने से आर्थिक समृद्धता प्राप्त होती है, तथा व्यापार में लाभ मिलता है।
चतुर्थ सोमवार पर ‘चिन्तापूर्णी ज्योतिर्लिंग’ पूजन का विधान निर्धारित हुआ है। शास्त्रों में द्वाद्वश ज्योतिर्लिंग का उल्लेख मिलता है, यदि आपके क्षेत्र के आस-पास दिव्य ज्योतिर्लिंग हो, तो आप वहां जाकर पूजन करें अथवा ऐसा शिवलिंग विग्रह प्राप्त करें, जिसके अन्दर भगवान् शिव के चिन्तापूर्णी ज्योतिर्मय स्वरूप की स्थापना की गई हो, उस ‘चिन्तापूर्णी ज्योतिर्मय’ शिवलिंग पर रूद्राभिषेक करने से पूर्ण शिवत्व की प्राप्ति होती ही है तथा पूरे जीवन काल तक सभी तरह की दुषः चिन्ताओं से मुक्ति प्राप्त होती है और आकस्मिक धन प्राप्ति का योग निर्मित होता है, निम्न मंत्र का विद्युत माला से 3 माला मंत्र का जप सम्पन्न करें।
चारों सोमवार को सम्पन्न की जाने वाली साधना में प्रयुक्त सामग्री-शिवलिंग, गुटिका, माला, कमलबीज एवं गोमती चक्र को अगले दिन नदी में प्रवाहित कर दें।
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