





शुभाशीर्वाद !
परमात्मा ने मानव रचना में सभी को समान गुण दिये हैं लेकिन हम उन गुणों को प्रकट न करके अपने आप में भयभीत और शांत भाव में ही रह जाते है। जबकि चुप्पी या शांतता ने ही हमारी सारी खुशियों को समाप्त कर दिया है। मनुष्य दुःखों से मुक्त होने के लिए अनेक प्रयास करता है किन्तु पाप मुक्त बनने और अपने आप को श्रेष्ठ गुणों से युक्त करने का कभी प्रयास नहीं करता। इसलिए गुरु ऐसे सद्बुद्धि का दिव्य आलोक प्रदान करते है जिससे साधक स्वयं में गुरु आत्मतत्व भाव को सद्बुद्धि से युक्त होकर अपनी गलतियों का सुधार कर सके। गुरु रूपी ज्ञान चक्षु के माध्यम से आत्म साक्षात्कार कर सकें।
जीवन का मर्म क्या है उद्देश्य क्या है लक्ष्य क्या है? इसे गुरु रूपी ज्ञान चक्षु के माध्यम से ही जाना जा सकता है हम समस्त मनुष्यों का एक मात्र लक्ष्य भौतिक जीवन के आनन्द की प्राप्ति और सुखोपभोग ही है। इसे प्राप्त करना मानव जीवन का नैसर्गिक अधिकार है। यह समूचा जगत आनन्द का उद्भवशील है और आनन्द ही हमारा उदगम् स्थान है। आनन्दातिरेक से ही आत्मा जीवन धारण करती है।
इच्छा धारण करने से या संकल्प से जीवन के सांसारिक बन्धनों और कर्त्तव्यों की पूर्ति नहीं होती ओर न ही आनन्द और भौतिक सुखों की प्राप्ति हो सकती है। इसके लिए संकल्प के साथ-साथ निरन्तर क्रियाशीलता और इच्छा शक्ति का भाव भीतर ही भीतर प्रज्ज्वलित रहना चाहिए। शिष्य कोई बैल या भेड़ नहीं है, कोई भी यदि शिष्यों को भेड़ों या बैलों की तरह हांकता है तो वह सच्चा मार्गदर्शक नहीं, सही गुरु की चेतना का भाव शिष्यों को हंस बनाने की क्रिया करना है। अज्ञानी और अन्धा गुरु ही अपने शिष्य को खण्ड-खण्ड में बांटता है और यह धारणा बनाने की क्रिया के फलस्वरूप चिकनी चुपड़ी बाते कहानियां, मजाक आदि करता रहता है। जहां गुरु भी अंधा और शिष्य भी अन्धा हो वहां क्या जीवन की स्थिति होती है। यह आप स्वयं समझ सकते हैं।
अपनी जिन्दगी के मालिक हम खुद है। लेकिन अधिकांश मौकों पर हम दूसरों से संचालित होते है। बहुत अधिक चिंता इस बात की नहीं कि जाये कि लोग हमारे बारे में क्या सोच रहे और कह रहे है, न तो कोई दूसरा हमे सुखी कर पाता है। और न कोई दुःखी, न कोई हमें बाधा पहुंचा पाता है। और न ही हम किसी को दुःख देते है। इस आत्मिय भाव से संसार में चलेंगें तो हर पल को नवीनता और उत्साह के साथ व्यतीत कर सकेंगे। यह देह सद्गुदेव की दी हुई है, तन-मन ज्ञान रूपी धन सब सद्गुरुदेव का दिया हुआ है इसे अपने शिष्यों को पूर्ण समर्पित करना है जिससे प्रत्येक शिष्य सद्गुरुदेवमय बन सकें। उन्हीं की आज्ञा को शिरोधार्य रखते हुए ऐसी ही क्रिया की कड़ी में आपके साथ माता वैष्णों देवी की यात्रा सम्पन्न कर सका। साधकों को जो दिव्यपात और शक्ति प्राप्त हुई वह हम सभी के लिए अमूल्य और अविस्मरणीय धरोहर को सद्गुरुदेव और माता भगवती के साक्षीभूत स्वरूप में आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
श्री श्री सच्चिदानन्द जी महाराज और सद्गुरुदेव जी की आज्ञा स्वरूप ही सप्तदिवसीय अहम ब्रह्मास्मी कुबेर वैभव लक्ष्मी साधना शिविर का आयोजन बद्रीनाथ धाम उत्तरांचल में 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक सम्पन्न किया जायेगा। इस साधना शिविर में वे ही साधक सम्मिलित हो सकेंगे जिन्हें वास्तव में अपने जीवन की विषमताओं और दुष्चिंताओं को पूर्णरूपेण समाप्त करते हुए जीवन को नूतन और नवीन श्रेष्ठताओं को प्राप्त करते हुए सच्चिदानन्द स्वरूप योगेश्वरमय बनाने की ओर पूर्णरूपेण गतिशील होना है। समस्त समर्पित शिष्यों की मनोकामनापूर्ण कर सद्गुरुदेव डॉ- नारायण दत्त श्रीमाली जी की कृपा से साधनात्मक चेतनायुक्त कैलाश सिद्धाश्रम एक और बड़े विशाल आश्रम का शुभारम्भ—– अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सम्पन्न किया गया। यह सब परमपिता परमेश्वर स्वरूप निखिलेश्वरानन्द जी महाराज और आप सभी के शुभ चिंतन के फलस्वरूप ही क्रियान्वित हो सका हैं।
E – 1077 सरस्वती विहार, पीतमपुरा नई दिल्ली 110034 में समय समय पर आप से व्यक्तिगत रूप से इस नूतन आश्रम में मिलकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर सकूंगा।
इस वर्ष की गुरु पूर्णिमा का पर्व इस मास की 21 तारीख के मध्य अर्थात् 20-21-22 जुलाई को रायपुर में सम्पन्न हो रहा हैं। ऐसे श्रेष्ठ और दिव्यतम अवसर पर आप सपरिवार जीवन चैतन्य जाग्रत दीक्षा प्राप्त कर अपने सांसारिक जीवन को हर दृष्टि से सुखमय और आनन्दयुक्त बना सकें और जीवन के सभी भौतिक सुखों से ओत-प्रोत हो सकें। जिससे की आने वाला श्रावण मास आपके जीवन में शिवस्वरूप और गौरीमय बना सके और आपका जीवन ऋद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और कार्तिकेय युक्त बन सकें। सही अर्थों में ऐसा ही मर्म और भाव गुरु पूर्णिमा का हैं। तभी आप जीवन में पूर्णमदः पूर्णमिदं की स्थितियों को प्राप्त करते हुए इस गुरुपूर्णिमा को साक्षीभूत कर सकेंगें।
सुखमय गृहस्थ जीवन के आनन्द महोत्सव का उत्साह हर पल बना रहे यही में पूर्ण हृदय भाव से आप सभी को सौभाग्य, आरोग्य और पूर्ण सफलता का आशीर्वाद है और यही मंगल कामना आप सभी के प्रति प्रदान करता हूं।
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