





महामंत्र प्रदान करने वाले शिव स्वरूप, ब्रह्मज्ञान को प्रकाशित करने वाले संसार के समस्त दुःख को हरने वाले हे सद्गुरु देव! आपके श्री चरणों में मेरा पुनः पुनः नमन हो।1।
अत्यन्त सौम्य ज्ञान स्वरूप, निर्भय रहने वाले अज्ञान को हरण करने वाले उच्चकुल में उत्पन्न ब्रह्मज्ञान को देने वाले ऐसे गुरु को मैं नमन करता हूं।2।
शिव तत्व को प्रकाशित करने वाले, ब्रह्मज्ञान को देने वाले तथा साधकों को अभय प्रदान करने वाले सद्गुरु को मैं बारम्बार नमन करता हूं।3।
आचार और अनाचार में भेद दिखाने वाले प्रेम स्वरूप भाव और अभाव दोनों से र्निमुक्त, मुक्ति प्रदान करने वाले गुरु को मैं नमन करता हूं।4।
उच्चतम ज्ञान को बताने वाले ज्ञान स्वरूप ऐश्वर्य प्रदान वाले शिव रूप गुरु को मैं बारम्बार नमन करता हूं।5।
शिव स्वरूप शक्ति जिनके बस में हैं, सत्चित और आनन्द रूप कामदेव के समान सुन्दर मनोकामना को पूर्ति देने वाले कामशास्त्र में प्रवीण गुरु को मैं बारम्बार नमन करता हूं।6।
ब्रह्मज्ञान के मार्ग को बताने वाले साक्षात् ज्ञान स्वरूप अपनी शक्ति माया को वश में किए हुए और अपने बाएं भाग में शक्ति को स्थापित किए हुए गुरु को मैं नमन करता हूं।7।
जो साधक पूर्व दिशा में मुंह करके इस स्तोत्र को बार बार पाठ करता है, हे! पार्वती विद्या उस पर प्रसन्न होकर उसको वर प्रदान करती है। जो साधक अनुष्ठान आदि से पूर्व इस स्तोत्र का पाठ नहीं करता उसकी समस्त पूजा विधान किल हो जाती है तथा उसे इस क्रिया के अभाव में दोष लगता हैं।
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