





स्त्रियों के लिये तो यह ‘‘हर गौरी’’ प्रयोग है, जिसके माध्यम से वे इस प्रयोग को सम्पन्न कर सौभाग्य की कामना करती हैं, इस प्रयोग से पति को दीर्घायु प्राप्त होती है, और उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते है। कुंवारी कन्याएं इस प्रयोग को करने से मनोवांछित वर प्राप्त करने में सफल हो पाती है। भगवान शिव को ‘‘रूद्र’’ कहते हैं जो कि शत्रुओं के पूर्ण संहारक हैं, इस प्रयोग को सम्पन्न करने से साधक शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है, अपने विरोधियों पर हावी होता है और सभी दृष्टियों से सफलता प्राप्त करता है। वास्तव में ही यह प्रयोग पूरे वर्ष का सौभाग्य प्रयोग है, जिसे प्रत्येक पुरूष एवं स्त्री को सम्पन्न करना चाहिये।
प्रयोग विधि-
श्रावण का प्रारम्भ 11 जुलाई को हो रहा है, 11 जुलाई को परिवार का मुखिया, साधक या घर का कोई भी सदस्य स्नान कर शुद्ध, स्वच्छ वस्त्र धारण कर किसी पात्र में केसर से ‘‘ऊँ नमः शिवाय’’ लिख दें और उस पर भगवान ‘सिद्धेश्वर’ की स्थापना कर दें। सिद्धेश्वर एक विशेष प्रकार का ज्योतिर्लिंग है जिसे घर में स्थापित करना ही जीवन की पूर्णता है। विशिष्ट मन्त्रों से सिद्ध ऐसे सिद्धेश्वर ज्योतिर्लिंग को पात्र में स्थापित कर उनकी संक्षिप्त पूजा करें, केसर, कुंकुंम, गुलाल आदि चढ़ा कर यदि संभव हो तो बिल्व पत्र भगवान सिद्धेश्वर पर चढ़ाऐं, इसके बाद हाथ में जल लेकर उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर स्वयं या पति-पत्नी दोनों धीरे-धीरे उस सिद्धेश्वर शिवलिंग पर ऊँ नमः शिवाय का उच्चारण करते हुये जल चढ़ावें। धीरे-धीरे उस पात्र में इतना जल चढ़ा देना चाहिये कि भगवान सिद्धेश्वर का शिवलिंग उस जल में डूब जाय, उस पूरे दिन यह ज्योतिर्लिंग उस जल में डूबा रहे।
इसके बाद सामने दीपक, अगरबत्ती लगावें, और निम्न विशिष्ट गोपनीय मंत्र की पांच माला मंत्र जप सम्पन्न करें-
सिद्धेश्वर मंत्र
।। ऊँ हृीं ऐं हर गौर्यै रूद्राय अनंग रूपाय सिद्धि प्रदाय सिद्धेश्वराय नमः ।।
इस मंत्र को पुरूष या स्त्री कोई भी जप कर सकता है, रूद्राक्ष की माला से ही इस मंत्र का जप होना चाहिये, इसके बाद भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद चढ़ावें, इस प्रसाद को पड़ोस के बालकों में बांट दें।
दूसरे दिन उस जल का पान थोड़ा-थोड़ा घर के सभी सदस्य करें, जिससे उनके शरीर में स्थित रोगों की निवृत्ति हो सके और बाकी जल को घर में छिड़क दें, इस प्रकार नित्य पूरे तीस दिन करें।
साधक सोमवार के दिन भगवान शिव को 11 पुष्प या 11 बिल्व पत्र चढ़ायें और 11 माला मंत्र जप करें।
11 छोटे-छोटे बालकों को भोजन करा दें और सिद्धेश्वर शिवलिंग को पूजा स्थान में स्थापित कर दें।
यह इस वर्ष का श्रेष्ठतम और अद्वितीय प्रयोग है, जो सौभाग्य से प्राप्त होता है, प्रत्येक साधक को अपने घर में सिद्धेश्वर की स्थापना करनी ही चाहिये और इस प्रयोग को स्वयं या घर का कोई भी सदस्य सम्पन्न करे, आप स्वयं इस प्रयोग का चमत्कार और प्रभाव हाथों हाथ अनुभव करेंगे।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,