





बहेड़ा को संस्कृत में ‘बिभीतकी’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘‘रोगों से दूर रखने वाला’’। यह ‘त्रिफला’ का एक प्रमुख घटक है जिसका उपयोग सर्दी-ज़ुकाम, ग्रसनीशोथ और कब्ज के उपचार में किया जाता है। बहेड़ा भारत के अधिकांश भागों में पाया जाने वाला एक विशाल पर्णपाती वृक्ष है। इस वृक्ष के सभी भागों का, विशेष रूप से सूखे फलों का, औषधीय उपयोग किया जाता है। बहेड़ा के फल कसैले (कड़वे) और तीखे (खट्टे) स्वाद वाले होते हैं।
बहेड़ा की पहचान करना कोई मुश्किल कार्य नहीं है। यह भी बाकी फलों की तरह दिखने वाला एक सामान्य फल है। इसकी पहचान करने के लिए आप इसकी उंचाई से अंदाजा लगा सकते हैं। इसके फल बाकी फलों की तरह ही हैं, लेकिन इसका पेड़ करीब 800 से 2000 मीटर तक ऊँचा होता है। यह एक बारामासी फल है। यह हर मौसम में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इसके पेड़ आपको भारत के तमाम हिस्सों में आसानी से मिल सकते हैं। खासकर यह पहाड़ी हिस्सों में ज्यादा पाया जाता है। आप इस पेड़ की छाल देखकर भी इसे पहचान सकते हैं। इसके पेड़ की छाल में अक्सर दरारें पाई जाती हैं। इसकी पत्तियां भी अन्य पत्तियों की तरह न होकर कई पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं।
बहेड़ा में हरे-सफेद फूल होते हैं, जो कि अक्टूबर और नवंबर के महीने में पेड़ पर गुच्छों के रूप में दिखाई देते हैं, साथ में नये पत्ते (इस पेड़ के पत्ते नवंबर माह में) निकलते हैं। इन फूलों से तेज महक आती है। इस पौधे के फल आकार में अंडाकार, रंग में पीले और हल्के पीले रंग के रेशों से कवर होते हैं। इस पेड़ की पत्तियां पांच-पांच पत्तियों के समूह में होती हैं और इसके फल नवंबर-दिसंबर में दिखाई देते हैं।
एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर बहेड़ा आपके पेट की बीमारियों से लेकर खून बढ़ाने तक में उपयोगी है। साथ ही फ्रुकटोज, ग्लूकोज, एंटीडायरियल गुण होने के साथ ही एंटी कैंसर गुण भी पाये जाते हैं। यह फल टायफाइड और डायबिटीज आदि बीमारियों में भी आपकी मदद करता है। विटामिन की प्रचुरता वाला बहेड़ा आपको कई संक्रमणों से भी दूर रखता है।
बहेड़ा वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को दूर करता है, लेकिन इसका मुख्य प्रयोग कफ-प्रधान विकारों में होता है। यह आँखों के लिए हितकारी, बालों के लिए पोषक होता है। इतना ही नहीं बहेड़ा असमय बाल पकने, गला बैठने, नाक सम्बन्धी रोग, रक्त विकार, कंठ रोग (लैरियेंगोट्राकियोब्रॉन्काइटिस) तथा हृदय रोगों में फायदेमंद होता है। बहेड़ा कीड़ों को मारने वाली औषधि है।
बहेड़ा के फायदे-
बहेड़ा का औषधीय प्रयोग कैसे और किन बीमारियों में किया जा सकता है
आँखों के रोग में लाभ-
बहेड़ा और शक्कर के बराबर मात्रा में मिश्रण का सेवन आँखों की ज्योति को बढ़ाता है।
बहेड़ा की छाल को पीसकर मधु के साथ मिलाकर लेप करने से आँख के दर्द का नाश होता है।
इसके बीज के मज्जा के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर महीन पेस्ट बना लें। इसे रोज सुबह काजल की तरह लगाने से आँख का रोग नष्ट होता है।
दमा में फायदेमंद बहेड़ा-
बहेड़ा और हरड़ की छाल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसे 4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से दमा और खांसी में लाभ होता है।
बहेड़ा के फल की छाल के चूर्ण (10 ग्राम) में अधिक मात्रा में मधु मिला लें। इसे चाटने से दमा की गंभीर बीमारी तथा हिचकी में भी शीघ्र लाभ होता है।
पथरी में बहेड़ा का उपयोग-
बहेड़ा के फल के मज्जा के 3-4 ग्राम चूर्ण में मधु मिला लें। इसे सुबह-शाम चाटने से गुर्दे की पथरी की बीमारी में लाभ होता है।
खाँसी में बहेड़ा से लाभ-
बहेड़ा के छिलके को चूसने से खांसी में लाभ होता है।
बहेड़ा के 10 ग्राम चूर्ण में शहद मिला लें। इसे सुबह और शाम भोजन के बाद चाटने से सूखी खाँसी तथा पुराने दमा रोग में बहुत लाभ होता है।
बहेड़ा से हृदय रोग में लाभ-
बहेड़ा के फल के चूर्ण तथा अश्वगंधा चूर्ण को समान मात्रा में मिला लें। इसे 5 ग्राम की मात्रा में लेकर गुड़ मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता है।
दस्त को रोकता है बहेड़ा-
बहेड़ा फल के 3-6 ग्राम चूर्ण को खाने के बाद सेवन करने से पाचनशक्ति ठीक होती है।
बहेड़ा के 2-3 भुने हुए फल का सेवन करने से दस्त की गंभीर बीमारी भी ठीक हो जाती है।
डायबिटीज में बहेड़ा से फायदा-
बहेड़ा, रोहिणी, कुटज, कैथ, सर्ज, सप्तपर्ण तथा कबीला के फूलों का चूर्ण बना लें। इसे 2 से 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 1 चम्मच मधु के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे पित्त विकार के कारण हुए डायबिटीज में लाभ होता है।
बुखार उतारने के लिए बहेड़ा का प्रयोग-
बहेड़ा और जवासे के 40-60 मिली काढ़े में 1 चम्मच घी मिला लें। इसे दिन में तीन बार पीने से पित्त और कफ विकार से हुए बुखार में लाभ होता है।
नेत्र रोग में फायदेमंद बहेड़ा-
नेत्र रोग में बहेड़ा का प्रयोग फायदेमंद होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार बहेड़ा में चक्षुष्य गुण पाया जाता है जिससे बहेड़ा नेत्र संबंधी रोग में लाभ पहुंचाता है।
श्वास रोग में फायदेमंद बहेड़ा-
श्वास की समस्या अधिकतर कफ दोष के बढ़ने की वजह से होती है जिसमें श्वसन नली में बलगम इकठ्ठा होना शुरू हो जाता है। बहेड़ा में कफ शामक गुण पाया जाता है साथ ही इसके उष्ण होने के कारण यह बलगम को पिघला कर आराम देने में सहयोगी होता है।
बहेड़ा का इस्तेमाल कैसे करें?
बहेड़ा का इस्तेमाल आयुर्वेदिक चिकित्सा में विभिन्न रूपों में किया जाता है। यह पाउडर, चूर्ण, काढ़ा या तेल के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
पाउडर (चूर्ण) के रूप में- बहेड़ा का पाउडर बाजार में आसानी से उपलब्ध होता है। इसे आंवला और हरड़ के साथ मिलाकर त्रिफला चूर्ण तैयार किया जाता है। त्रिफला चूर्ण पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। 5-10 ग्राम बहेड़ा पाउडर को पानी या शहद के साथ दिन में दो बार लेना पाचन सुधारता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
काढ़ा- बहेड़ा का काढ़ा श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे बनाने के लिए 2-3 बहेड़ा फल को पानी में उबालें और इसका सेवन करें। यह खांसी, सर्दी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में राहत दिलाता है। बहेड़ा का काढ़ा प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
तेल के रूप में- बहेड़ा का तेल बालों के लिए फायदेमंद होता है। इसे नारियल या तिल के तेल के साथ मिलाकर बालों में लगाया जा सकता है। यह बालों की जड़ों को मजबूत करता है, बालों का झड़ना रोकता है और उन्हें घना और काला बनाता है। बालों में नियमित रूप से बहेड़ा तेल का उपयोग करने से बालों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
दूध के साथ- बहेड़ा के चूर्ण को दूध में मिलाकर लेने से त्वचा पर निखार आता है। यह त्वचा को अंदर से पोषण प्रदान करता है और मुंहासों, दाग-धब्बों से राहत दिलाता है। इसे दूध में मिलाकर रात में सोने से पहले लिया जा सकता है।
वजन घटाने में- वजन कम करने के लिए बहेड़ा का पाउडर शहद और गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है। यह शरीर में वसा के जमाव को रोकता है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
आंखों के लिए- बहेड़ा के पाउडर का नियमित सेवन आँखों की रौशनी को बढ़ाता है। त्रिफला चूर्ण में बहेड़ा की उपस्थिति आँखों के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी होती है।
इन उपायों का नियमित और संतुलित उपयोग शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है।
बहेड़ा का सेवन आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। बहेड़ा का सेवन करते समय हाइपरएसिडिटी या गैस्ट्राइटिस की स्थिति में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यह इन स्थितियों को बढ़ा सकता है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या बीमारी के लिए बहेड़ा का उपयोग करने से पहले किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
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