





जो रसराज पारद से निर्मित असीमित देह बला, देह शुद्धि एवं बल, वीर्य ओज रस की प्रदायक है।
रसराज देह सिद्धि का तात्पर्य पारद को इस प्रकार से संस्कारित करना है, कि जिसके सेवन, धारण से यह शरीर समस्त प्रकार की व्याधियों से मुक्त हो सके, वृद्धावस्था समाप्त हो सके और पूरा शरीर दिव्य, चैतन्य, तेजस्वी और लोहे की तरह मजबूत हो सकें।
देह सिद्धि गुटिका धारण करने के लाभ-
– देह की क्रिया शक्ति जाग्रत हो जाती है तथा देह की एक-एक मांसपेशी स्वस्थ एवं जाग्रत हो जाती है।
– शरीर का मोटापा-थुलथुला पन गायब होने लगता है।
– गुटिका धारण कर नित्य योगाभ्यास किया जाये तो चेहरे की चमक बढ़ती है और प्रभा मंडल का विकास होता है।
– गुटिका धारण करने से व्यक्ति सर्वथा सुरक्षित रहता है और आने वाले संकट का पूर्वानुमान लग जाता है।
– गुटिका को रात्रि में सिरहाने रख कर सोने से इच्छित प्रश्नों का उत्तर प्राप्त होता है।
– गुटिका को दुकान में कपड़े में बांध कर लटकाने से बिक्री में बढ़ोतरी होती है और निरन्तर लक्ष्मी का आगम होता है।
– तांबे के पात्र में पानी के साथ गुटिका को रात भर रखने के पश्चात् जल ग्रहण करने से रोग समाप्त होता है, साथ ही जल ग्रहण करने से शरीर में स्थित भूत-प्रेतों का उपद्रव समाप्त होता है और घर में जल छिड़काव से तांत्रिक प्रयोग भी समाप्त होता है।
– देह सिद्धि गुटिका धारण करने से शरीर की शक्ति में वृद्धि होने के साथ गृहस्थ सुख में भी वृद्धि होती है। जो व्यक्ति इस गुटिका को धारण करता है उसे एक महीने के भीतर अद्भुत परिवर्तन होने लगता है।
देह सिद्धि गुटिका का सिद्ध को स्वयं के लिये सिद्ध करने हेतु निम्न मंत्र की एक माला मंत्र जप 11 दिन तक करें।
।। ऊँ हृीं हूं फट् चक्रेश्वरी परत पादुका साधनं स्वर्ण देहि वज्र देहि फट् ।।
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