





यह तो ध्रुव सत्य है कि व्यक्ति का पूर्वजन्म होता है तो अपने इस जन्म में किये गये श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ कार्यो का भार अगले जीवन में ले जाना ही होता है। कई बार जब बचपन में मंदबुद्धि बालक अथवा किसी अन्य पीड़ा से युक्त व्यक्तियों को देखता हूं जो जीवन में प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं होते है, उसका कारण पूर्वजन्म कृत दोष ही है। जो आज किया उसका फल कल भुगतना ही है, ठीक उसी प्रकार पूर्वजन्म में किये गये दोषों का परिणाम इस जन्म में प्राप्त होता है। उसी प्रकार पूर्व में किये गये श्रेष्ठ कार्यो का सौभाग्य फल भी इस इस जीवन में प्राप्त होता है। मैं यह नहीं कहता कि आपने पूर्व जन्म में केवल दोष युक्त कार्य ही किये हैं लेकिन यदि इस जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं तो निश्चय ही इसका स्त्रोत पूर्व जन्म में ही है। जिसकी आपको जानकारी नहीं है। उन पूर्वजन्म कृत दोषों का शमन व्यक्ति स्वयं कर सकता है, यदि उसके पास श्रेष्ठ गुरू है, स्वयं का ज्ञान है और साधना करने की क्षमता है। आप में ये तीनों गुण विद्यमान हैं तो अवश्य सम्पन्न करें पूर्व जन्म कृत पाप शमन फेत्कारिणी साधना-
यह प्रयोग पाप मोचनी एकादशी को प्रातः करें। स्नान आदि नित्य क्रिया से निवृत होकर पीला वस्त्र पहनें तथा पीलें आसन पर दक्षिण दिशा की ओर बैठें। सर्वप्रथम दोनों हाथ जोड़कर भगवान गणपति का स्मरण करें तथा शब्द उच्चारण पूर्वक अपनी मनोकामना पूरी करने के लिये, पारिवारिक सुख के लिये निवेदन करें। इसके पश्चात् गुरू पूजन करके दो माला गुरू मंत्र का जप करें।
गणेश पूजन कुंकुम, पुष्प, अगरबत्ती, दीपक व प्रसाद आदि से करें, फिर अपने सामने साफ तांबे की प्लेट में फेत्कारिणी यंत्र को स्थापित करें। इस पर सिन्दूर की 7 बिन्दियां दाहिने हाथ की अनामिका से लगावें और फिर इसका पूजन उक्त सामग्री एवं पुष्प से करें। इसके पश्चात् दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प बोलें कि मैं (अपना नाम) यह प्रयोग गणपति, गुरू को साक्षी में मेरे घर पर या व्यापार पर किये गये प्रयोग या दोष निवारण के लिये कर रहा हूं। वे दोष समाप्त हो जाये और मेरी पुनः उन्नति आरम्भ हो। यह कहकर जल को भूमि पर छोड़ दें। मूंगा माला से निम्नलिखित मंत्र की 11 माला जप नित्य तीन दिनों तक करें।
मंत्र
।। ऊँ क्लीं मम समस्त पूर्व दोषान् निवारय
क्लीं फट् स्वाहा।।
|| Om Kleem Mam Samasta Purva Doshaan Nivaaraya Kleem Phat Swaha ||
मंत्र जप करने के पश्चात् पुनः गुरू पूजन करें, और गुरू मंत्र की एक माला मंत्र जप करें। तीन दिन के मंत्र का जप पूर्ण हो जाने पर फेत्कारणी यंत्र को घर के बाहर किसी सुनसान स्थान पर एक फीट का खड्डा खोदकर उसमें गाढ़ दें। साधना काल में एक समय शुद्ध एवं सात्विक भोजन लें, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें और भूमि पर शयन करें।
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