





सूर्य की किरणें असंख्य हैं, साथ ही समुद्र की लहरें अनंत, न ही आज तक कोई आकाश की ऊँचाई नाप सका, न ही समुद्र का तल। उससे भी ऊँचा और गहरा है ‘मन’ जो सोच व समझ के परे है- केवल मन से ही आपका व्यक्तित्व भगवान बुद्ध की भांति ज्ञान-चेतनावान, परोपकारी बन सकता है और मन के द्वारा ही विनाशकारी राक्षस, अधर्मी क्रूर रावण की भांति पापी व अन्यायी।
साथ ही आपके सुख व दुःख का कारण भी आपका मन ही तो है। मन आपके शरीर का कोई अंग नहीं फिर भी इसके बिना मानव का जीवन होना संभव नहीं।
पर क्या सामान्य जन के नियन्त्रण में है उनका मन? मन तो केवल किसी को न पाने का दुःख या किसी को पा लेने की लालसा, उसको पा लेने पर भी उसकी चिन्ता या उसको खो देने की व्याकुलता से पीड़ित ही रहता है।
सांसारिक बातों के बारे में चिन्तन करोगे तो व्यर्थ की चिन्ता, राजनीति, भेद-भाव, अपराध, आपदा, गरीबी, भूख, वासना या फिर बिना सर पैर की GOSSIP जो मन को आनन्द देगी। ज्ञान-चिन्तन करेंगे तो नीरस या असहज महसूस करेगा आपका मन।
आपको तो केवल अपने मन को नियन्त्रण कर अपने अपने अनुरुप अपने हित के लिए, अपनी सांसारिक व आध्यात्मिक उन्नति के लिए कार्यरत रहना है, मन को स्वतंत्र नहीं रहने देना है, उसमें आने वाले हर विचार आपके लिए प्रेरणा, हर्ष व उन्नत होने पर लगाना है। अपने मन को ध्यान में, चेतना में, साधना में लगाना है। ध्यान अपने गुरु का, अपने ईष्ट का…. चेतना शक्ति भगवान विष्णु की, महादेव की….. साधना अपसरा की, यक्ष की, किन्नर की…. साथ ही संसार में सभी सुखों को भी भोगना है। धन-यश-वैभव-संतान सभी सुखों की प्राप्ति में कार्यरत रहना है।
होगा कैसे मन नियंत्रित ?
आपको जो ज्ञान-चेतना-साधना का ज्ञान अपने गुरु से प्राप्त हुआ है उसे आत्म सात कर, उसे ग्रहण कर।
भोजन को केवल देखने से पेट नहीं भरता – उसे ग्रहण करना पड़ता है, फिर शरीर को उसे जलाना पड़ता है तभी ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मन तो सदैव खुश रहेगा यह आप पर निर्भर है कि आप उसे कैसे विचार परोसते हैं!
आपके गुरु का ज्ञान भी अनन्त है तो आपको अपनी श्रद्धा-भक्ति भी अनन्त ही रखनी होगी तभी आपकी हर कामना-इच्छा को पूर्ण करने में आपके गुरु आपके सार्थक होंगे।
अपने मन-भाव के चिन्तन को गुरुमय करने 19-20-21 अप्रैल सर्व दु:ख हरण अक्षय धनदा लक्ष्मी सद्गुरू नारायण जन्मोत्सव पर्व दुर्ग (भिलाई) में अवश्य सम्मिलित हों
आपका अपना
विनीत श्रीमाली
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,