





मनुष्य का जीवन ग्रहों के अधीन है, ग्रहों की गति मनुष्य जीवन की गति से जुड़ी हुयी है। जब मनुष्य के ग्रह अनुकूल होते हैं, तो वह निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। जातक की कुंडली में ग्रहों की शुभ स्थिति जातक को अपार सफलता प्रदान करती है, जबकि अशुभ स्थिति होने पर जीवन में संघर्ष और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। अत: जातक को ज्योतिषी उपायों (साधना, दीक्षा आदि) के माध्यम से ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करके सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।
स्वयं भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के कुंडली में भी ग्रह दोष था। ग्रह-नक्षत्रों के दोष के कारण उत्पन्न बाधाओं से जीवन हर प्रकार से कष्ट कारक हो जाता है, प्रतिकूल ग्रह होने के फलस्वरुप ही मनुष्य को अनेक पीड़ाओं, बाधाओं और दु:खमय स्थितियों को भोगना पड़ता है।
ज्योतिषिमय मान्यता के अनुसार प्रत्येक जातक के जीवन में किसी न किसी ग्रह की कुदृष्टि अवश्य ही होती है । निरन्तर प्राप्त हो रही न्यूनतायें पुत्र-पुत्री का आज्ञाकारी न होना, पति-पत्नी में कलह, कलिष्ट रोग, मानसिक तनाव, परिवार में विरोध, निरन्तर शत्रु भय, मानसिक अशांति, डिप्रेशन, अनिद्रा और भावनाओं पर नियंत्रण न रहना, अत्यधिक गुस्सा, दुर्घटना, संपत्ति विवाद, और कर्ज की समस्या तथा अचानक आने वाली बाधाओं के निस्तारण में हमारी जीवट शक्ति का बहुत बड़ा हिस्सा व्यय हो जाता है। साथ ही व्यापार में नुकसान, निर्णय लेने में असमर्थता, शिक्षा और ज्ञान में रुकावट, धन की हानि, और पाचन संबंधी समस्याएं, वैवाहिक जीवन में कलह, भौतिक सुखों की कमी, और किडनी से जुड़ी समस्यायों से भी जातक ग्रसित तथा व्यथित हो जाता है।
हम अपने जीवन में बहुत कुछ नूतन स्वरुप में सृजन करना चाहते हैं परन्तु उसका अंश मात्र भी प्राप्त नहीं कर पाते और एक प्रकार से सारा जीवन चिन्ता, तनाव, अवसाद्-निराशा तथा मानसिक संताप में ही समाप्त हो जाता है। चन्द्रमा मन, भावना, शांति तथा शीतलता का प्रतिक है। चन्द्रग्रहण युक्त चेतना पर्व पर साधना सम्पन्न करने तथा दीक्षा ग्रहण करने से जातक को शत् गुना अनुकूल प्रभाव प्राप्त होता है। अत: ग्रह दोषों के निवारण हेतु यह दीक्षा ग्रहण करना श्रेष्ठमय रहता है। जातक को यह भी चाहिये कि वह अपने जीवन में सदैव नवग्रहों से सम्बन्धित साधनात्मक क्रियायें करता रहे। जिससे उसके जीवन के किसी भी पक्ष में बहुत अधिक हानि की स्थितियां ना बनें। क्योंकि ग्रहों का कुचक्र बहुत ही भारी पड़ता है, वह व्यक्ति के सामने ऐसी परिस्थितियां निर्मित कर देते हैं, कि व्यक्ति ना चाहते हुये भी, उनमें फंस जाता है। इसलिये प्रत्येक स्थिति में नवग्रह शांति के लिये उपाय स्वरुप में दीक्षा साधना अवश्य ही करते रहना चाहिये।
नवग्रह बाधा निवारण दीक्षा ग्रहण करने से जीवन में जहां एक ओर उक्त कुस्थितियों से मुक्ति मिलती है, वहीं अनुकूल होने पर जिन कार्यो में बाधा आती रहती थीं, वे बहुत सरलता से सम्पन्न होने लगते हैं, रोग व्याधि, कष्ट-पीड़ा यें, पूर्णत: समाप्त हो जाती हैं तथा ग्रहों के अनुकूल होने पर जीवन में सब कुछ मंगल ही मंगल होता है।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,