





सही अर्थों में देखा तो मानव का जीवन पग पग पर समस्याओं से, चुनौतियों से भरा होता है और सही अर्थों में देखा जाये तो जीवन जीने का मजा भी तभी है जब हम उन सभी चुनौतियों का मुंहतोड़ जवाब दें। जिस प्रकार भगवान शिव का परिवार सभी विरोधाभाषों को समेटे एक सम्पूर्णता का प्रतीक है, उसी प्रकार प्रस्तुत साधनाएं साधक के जीवन के सभी विरोधाभाषी स्थितियों को दूर करने में पूर्णता सक्षम है। उदाहरण के तौर पर परिवार का मुखिया अपनी सभी जिम्मेदारियों के साथ साथ जीविकोपार्जन के लिये चिन्तित रहता है। पत्नी अपने अक्षुण्ण सौभाग्य की कामना करती रहती है, युवा वर्ग के साथ विवाह की, सुखद ग़ृहस्थ जीवन, शत्रु नाश आदि स्थितियों का समाधान भी इन साधनाओं से प्राप्त होता है।
भगवान शिव का स्वरूप शक्ति युक्त होने के कारण सर्वाधिक प्रभावशाली और साधक की मनोकामना को पूर्ण करने वाला है। इसी से जहां छोटे से छोटे गांव में शिव का मन्दिर मिलता है, वहां कोई भी स्त्री गौरी पार्वती की आराधना के बिना जीवन को सम्पूर्ण नहीं मानती।
हर परिवार यही चाहता है कि उसका पुत्र जहां भगवान गणपति के समान बल, बुद्धि से युक्त हो, वहीं वह यह भी चाहता है कि उसका पुत्र कार्तिकेय जैसा सौन्दर्यवान और वीर हो। ये प्रमाण है कि किस प्रकार सम्पूर्ण शिव परिवार जन मानस में पैदा हुआ है। जिस प्रकार जहां शिव हैं वहीं शक्ति भी हैं, ठीक उसी प्रकार जहां गणपति हैं वहां लक्ष्मी हैं और जहां कार्तिकेय हैं वहां भगवती सरस्वती हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं है। इसलिये श्रावण मास की साधनाओं को सम्पूर्ण साधना कहा गया है।
साधना मुहुर्त
सम्पूर्ण श्रावण मास ही अपने आप सिद्ध मास है। इन दिनों में हम भगवान शिव, भगवती गौरी, भगवान गणपति तथा कार्तिकेय की साधना कर सकते हैं। प्रत्येक साधक के लिये पूरे महीने नियमित साधना करना सम्भव नहीं हो पाता है । अतः वह श्रावण मास के सभी सोमवारों को साधना अवश्य सम्पन्न करे।
सोमवार 25 जुलाई
साधक अपने जीवन में निम्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये इस प्रयोग को करें –
साधना विधान
कामदेव माला से निम्न मंत्र का 11 माला जाप करें
मंत्र जप समाप्ति के बाद अगले दिन यंत्र और माला को श्वेत वस्त्र में बांध कर नदी में विसर्जित कर दें।
उस पर केशर से ”शं“ बीज अंकित कर शिवत्व प्राप्ति यंत्र को स्थापित करें।
9 श्वेत पुष्प चढ़ाकर यंत्र का पूजन करें।
शिवत्व माला से निम्न मंत्र का 11 माला जप करें
मंत्र जप समाप्ति के बाद अगले दिन यंत्र और माला को पीले वस्त्र में बांध कर शिव मन्दिर में चढ़ा दें।
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