





साधना विधान
यह साधना 11 दिनों कि साधना है और किसी भी शुक्रवार से प्रारम्भ की जा सकती है। यह रात्रि कालीन साधना है। साधक को लाल धोती पहन कर लाल आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुंह कर के बैठ जाना चहिए। अपने सामने किसी पात्र में यक्षिणी यंत्र को स्थपित करें और उसका संक्षिप्त पूजन करें। फि़र यंत्र पर लाल पुष्प चढ़ाएं। इसके बाद मूंगे की माला से निम्न मंत्र की 11 माला मंत्र जाप करें।
साधक को 11 दिनों तक एक समय ही भोजन करना चाहिए। साधना के उपरान्त पूजा कक्ष में ही जमीन पर सोना चाहिए। स्वपन में उसे लौटरी से सम्बन्धित, जुए से सम्बन्धित दिशानिर्देश स्पष्ट दिखते हैं और साधक को दिशानिर्देश के अनुसार ही कार्य करना चाहिए। ऐसा करने पर उसका जो भी मनोरथ होता है वह पूर्ण होता ही है।
कार्य पूर्ण होने के बाद भी साधक को चाहिए कि वो साधना को पूर्ण करे और पूरे 11 दिनों तक साधना करे। इस साधना को वैसे तो एक ही बार सम्पन्न करने की आवश्यकता है पर अगर साधक किसी भी शुक्रवार को केवल एक रात्रि के लिये इस साधना को कर लेता है तो उसे जीवन भर संकेत मिलते रहते हैं। इस प्रयोग के द्वारा मैंने कई लोगों को लाखों कमाते हुए देखा है। आप भी इस प्रयोग के द्वारा अपने मनोरथों को पूर्ण कर सकते हैं और अतुलनीय धन अर्जित कर सकते हैं।
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