





यदि अजीर्ण के साथ अफ़रा हो जाय तो भी मूली का रस लाभ करता है उसमें अजवाईन का चूर्ण ड़ालकर प्रयोग किया जाय तो अफ़रा शांत होने में अधिक समय नहीं लगता ।
मूली के समान ही उसके पत्ते भी लाभदायक होते हैं । उनका प्रयोग साग-सब्जी के रूप में भी किया जा सकता है अथवा पत्तों को साफ़ पानी में धोकर काटें और उन पर सेंधा-काला नमक का मिश्रण और अदरक डाल कर, ऊपर से नीम्बू निचोड़ दें । इसके सेवन से भी अपच में बहुत लाभ होता है ।
अदरक का रस 3-4 चम्मच में अनार का रस भी उतना ही मिला कर पीने से अरूचि, खट्टे डकारें, जी मिचलाना, गले में जलन, अपच आदि लक्षणों में पर्याप्त लाभ होता है। अदरक, अनार का यह मिश्रण तत्काल लाभ दिलाता है ।
अदरक को पीस कर अपेक्षित नमक, जीरा डालकर उसका पतला शाक अथवा सूप बनाकर पीने से अजीर्ण और उसके सभी पेट के रोग दूर हो जाते हैं। यदि इस सूप में नींबू का रस भी डाल लिया जाय तो स्वाद भी बढ़ता है और लाभ भी अधिक होता है।
कच्चे दूध में नींबू निचोड कर पिलाने से भी दस्त एवं आम-दस्त में लाभ होता है ।
एक लीटर गरम पानी में 2 चम्मच चीनी तथा 1 चुटकी भर नमक मिला कर रखें ठण्डा कर थोड़ा-थोड़ा कर पीयें । दस्तों में हितकर है ।
आम की गुठली को चूने के पानी में घिस कर पिलाने से आमातिसार या रक्तातिसार में भी लाभ होता है ।
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